बड़ा फैसला: टिपरा मोथा ने TTAADC गठन बंगाल चुनाव नतीजों तक टाला
सारांश
Key Takeaways
- टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने TTAADC की नई परिषद का गठन पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों तक स्थगित किया।
- टीएमपी ने TTAADC चुनाव 2026 में 28 में से 24 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, भाजपा को केवल 4 सीटें मिलीं।
- विधि सचिव संकारी दास 27 अप्रैल 2026 को नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे, लेकिन चेयरमैन और CEM का चुनाव बाद में होगा।
- TTAADC त्रिपुरा के लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग का प्रशासन संभालती है और इसमें 30 सदस्य होते हैं।
- वर्ष 2021 से टीएमपी लगातार दूसरी बार इस परिषद पर नियंत्रण बनाए हुए है।
- पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर 29 अप्रैल 2026 को दूसरे चरण का मतदान होना है।
अगरतला, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा की सबसे बड़ी जनजातीय क्षेत्रीय पार्टी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) की नई परिषद के गठन को फिलहाल टालने का अहम फैसला किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे सामने आने के बाद ही नई परिषद के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब टीएमपी ने हाल ही में हुए टीटीएएडीसी चुनाव में 28 में से 24 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत दर्ज किया है।
गठन प्रक्रिया पर क्यों लगी रोक?
पार्टी के एक नवनिर्वाचित वरिष्ठ नेता ने बताया कि परिषद के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी सदस्य (सीईएम) के चुनाव सहित पूरी गठन प्रक्रिया बंगाल चुनाव परिणामों की समीक्षा के बाद ही संपन्न होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमपी बंगाल के नतीजों से निकलने वाले राजनीतिक संदेश को समझकर अपनी रणनीति तय करना चाहती है, क्योंकि दोनों राज्यों की जनजातीय राजनीति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान गुरुवार को संपन्न हो चुका है, जबकि शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे।
शपथ ग्रहण 27 अप्रैल को, गठन बाद में
त्रिपुरा सरकार के जनजातीय कल्याण विभाग ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि राज्य के विधि सचिव संकारी दास 27 अप्रैल 2026 को टीटीएएडीसी के नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। परंपरागत रूप से शपथ ग्रहण के तुरंत बाद नए चेयरमैन और सीईएम का चुनाव होता है, लेकिन इस बार टीएमपी ने जानबूझकर इस प्रक्रिया को स्थगित रखने का निर्णय लिया है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी क्षेत्रीय दल ने किसी अन्य राज्य के चुनाव परिणामों का इंतजार करते हुए अपने घरेलू राजनीतिक निर्णयों को टाला हो। यह रणनीति दर्शाती है कि टीएमपी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को एक साथ देखकर चलती है।
TTAADC चुनाव में टीएमपी की भारी जीत
हाल ही में घोषित टीटीएएडीसी चुनाव 2026 के नतीजों में टिपरा मोथा पार्टी ने 28 में से 24 सीटें जीतकर निर्णायक बहुमत हासिल किया। भाजपा को मात्र 4 सीटों पर सिमटना पड़ा। इस बार भाजपा, टीएमपी और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, जिससे टीएमपी की जीत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
30 सदस्यीय टीटीएएडीसी में 28 निर्वाचित और 2 नामित सदस्य होते हैं। यह परिषद त्रिपुरा के लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग का प्रशासन संभालती है, जो इसे राज्य की सबसे शक्तिशाली स्थानीय संस्थाओं में से एक बनाती है।
जनजातीय राजनीति में टीएमपी का बढ़ता वर्चस्व
वर्ष 2021 से टीएमपी इस परिषद पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है और लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर उसने अपनी राजनीतिक स्थिति और सुदृढ़ की है। त्रिपुरा की कुल आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा जनजातीय समुदाय से है, जो राज्य की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टीएमपी की यह रणनीतिक प्रतीक्षा यह भी संकेत देती है कि पार्टी भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन या नीतिगत बदलाव की संभावना को ध्यान में रखकर चल रही है। बंगाल चुनाव के नतीजे मई 2026 में आने की संभावना है, जिसके बाद टीटीएएडीसी के नए नेतृत्व की तस्वीर स्पष्ट होगी।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बंगाल चुनाव परिणाम टिपरा मोथा की रणनीति को किस दिशा में मोड़ते हैं और क्या वे भाजपा के साथ किसी नए समझौते की ओर बढ़ेंगे या स्वतंत्र रूप से अपना एजेंडा आगे ले जाएंगे।