ऐतिहासिक वोटिंग से लोकतंत्र मजबूत: आठवले बोले — बंगाल में केंद्रीय सुरक्षाबलों ने रोकी गुंडागर्दी

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ऐतिहासिक वोटिंग से लोकतंत्र मजबूत: आठवले बोले — बंगाल में केंद्रीय सुरक्षाबलों ने रोकी गुंडागर्दी

सारांश

पश्चिम बंगाल में 91%25 से अधिक ऐतिहासिक मतदान पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा — केंद्रीय सुरक्षाबलों ने गुंडागर्दी रोककर लोकतंत्र को मजबूत किया। NDA की जीत का दावा, अनिवार्य मतदान कानून की मांग दोहराई।

Key Takeaways

  • पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली बार 91 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ, जिसे ऐतिहासिक माना जा रहा है।
  • रामदास आठवले ने उच्च मतदान का श्रेय केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती को दिया और कहा कि गुंडागर्दी पर लगाम लगी।
  • आठवले ने अनिवार्य मतदान कानून बनाने की मांग दोहराई, जो वे लोकसभा में कई बार उठा चुके हैं।
  • NDA ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों में उच्च मतदान का राजनीतिक लाभ गठबंधन को मिलेगा।
  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनाव आयोग के नोटिस को आठवले ने उचित ठहराया।
  • महाराष्ट्र में मराठी लाइसेंस विवाद पर आठवले ने गरीब चालकों का लाइसेंस रद्द करने का विरोध किया।

मुंबई, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आजादी के बाद दर्ज हुए सर्वाधिक मतदान प्रतिशत ने पूरे देश में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। केंद्रीय राज्यमंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में इस ऐतिहासिक मतदान को लोकतंत्र की जीत बताया और इसका श्रेय केंद्रीय सुरक्षाबलों की सतर्क तैनाती को दिया।

बंगाल में 91%25 मतदान — सुरक्षाबलों की भूमिका निर्णायक

रामदास आठवले ने कहा, "पश्चिम बंगाल में 91 प्रतिशत से अधिक मतदान इसलिए संभव हुआ क्योंकि इस बार किसी को गुंडागर्दी करने का मौका नहीं मिला। ममता दीदी के गुंडे बाहर नहीं निकल सके।" उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय सुरक्षाबलों ने बंगाल के मतदाताओं को पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन दिया, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान केंद्रों तक पहुंचे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पिछले कई चुनावों में हिंसा और बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें आम रही हैं। इस बार चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की, जिसे विपक्ष लंबे समय से मांग करता आ रहा था। यह तथ्य कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार इतना अधिक मतदान हुआ, स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा व्यवस्था ने मतदाताओं का भरोसा जीता।

अनिवार्य मतदान कानून की मांग — आठवले का पुराना रुख

आठवले ने कहा कि वे लोकसभा में कई बार अनिवार्य मतदान का प्रस्ताव रख चुके हैं। उन्होंने कहा, "जो 8-9 प्रतिशत मतदाता अभी भी वोट नहीं देते, उनके लिए कानून बनना चाहिए।" उनका मानना है कि मतदान को नागरिक कर्तव्य घोषित कर उसे कानूनी बाध्यता देने से लोकतंत्र और सशक्त होगा।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो गुजरात और सिक्किम जैसे राज्यों में स्थानीय स्तर पर अनिवार्य मतदान की चर्चा पहले भी उठ चुकी है, जबकि ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम जैसे देशों में यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के ताजा आंकड़े इस बहस को नई ऊर्जा दे सकते हैं।

NDA की जीत का दावा — बंगाल और तमिलनाडु दोनों में

आठवले ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में NDA की सरकार बनना तय है और उच्च मतदान प्रतिशत का लाभ तमिलनाडु में भी गठबंधन को मिलेगा। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि बंगाल में गुंडागर्दी का युग समाप्त होगा और NDA सरकार सत्ता में आने के बाद इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उच्च मतदान प्रतिशत हमेशा सत्ताधारी दल के विरुद्ध नहीं जाता, लेकिन जहां भय के कारण मतदान दबाया जाता रहा हो, वहां स्वतंत्र मतदान का परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है। बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा और चुनाव आयोग की रिपोर्टें इस संदर्भ में महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि प्रदान करती हैं।

खड़गे को नोटिस — आठवले ने बताया उचित

चुनाव आयोग द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जारी नोटिस पर आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री को "आतंकवादी" कहना न केवल अमर्यादित है, बल्कि आचार संहिता का उल्लंघन भी है। उन्होंने कहा, "खड़गे जी दलित समाज से हैं, पार्टी ने उन्हें अध्यक्ष बनाया — यह सम्मान की बात है। लेकिन इस तरह की भाषा किसी भी नेता को शोभा नहीं देती।"

मराठी लाइसेंस विवाद — लाइसेंस रद्द करने से असहमति

महाराष्ट्र में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के उस निर्णय पर, जिसमें मुंबई के टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए मराठी जानना अनिवार्य करने की बात कही गई है, आठवले ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मराठी सीखने की पहल का स्वागत किया, लेकिन लाइसेंस रद्द करने के प्रावधान से असहमति जताई।

उन्होंने कहा, "गरीब चालकों का लाइसेंस रद्द करना अन्याय होगा। जिसे मराठी नहीं आती, वह सीखेगा — लेकिन इस दौरान उसकी रोजी-रोटी नहीं छिननी चाहिए।" यह बयान उनकी उस नीति के अनुरूप है जिसमें वे हमेशा वंचित और श्रमिक वर्ग के अधिकारों की पैरवी करते आए हैं।

आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव परिणाम न केवल इन राज्यों की राजनीति, बल्कि 2026 की राष्ट्रीय राजनीतिक दिशा को भी तय करेंगे। NDA के दावों और विपक्ष की रणनीति के बीच मतगणना का दिन सबसे बड़ा फैसला करेगा।

Point of View

बल्कि वर्षों से दबाए गए मतदाताओं की चीख है — जो इस बार केंद्रीय सुरक्षाबलों की ढाल मिलने पर बाहर आई। आठवले का बयान राजनीतिक रूप से NDA के लिए लाभकारी है, लेकिन इसमें एक गहरी सच्चाई भी है: जब राज्य तंत्र मतदाताओं को डराता है, तो केंद्रीय हस्तक्षेप ही लोकतंत्र की रक्षा करता है। विडंबना यह है कि जो पार्टी 'संघवाद' की दुहाई देती है, उसी के राज में बंगाल को बाहरी सुरक्षा की जरूरत पड़ती है। अनिवार्य मतदान की मांग भी उस वक्त और प्रासंगिक हो जाती है जब यह साबित हो कि डर हटते ही जनता खुद वोट देने निकलती है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

पश्चिम बंगाल में इस बार इतनी ज्यादा वोटिंग क्यों हुई?
रामदास आठवले के अनुसार, इस बार केंद्रीय सुरक्षाबलों की मजबूत तैनाती के कारण किसी को भी मतदाताओं को डराने या गुंडागर्दी करने का मौका नहीं मिला। इससे आजादी के बाद पहली बार बंगाल में 91 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ।
रामदास आठवले ने अनिवार्य मतदान को लेकर क्या कहा?
आठवले ने कहा कि वे लोकसभा में कई बार मतदान को अनिवार्य बनाने की मांग उठा चुके हैं। उनका कहना है कि जो 8-9 प्रतिशत लोग अभी भी वोट नहीं देते, उनके लिए कानून बनाया जाना चाहिए।
क्या NDA को बंगाल और तमिलनाडु में उच्च मतदान का फायदा मिलेगा?
आठवले ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में NDA की सरकार बनेगी और तमिलनाडु में भी उच्च मतदान का लाभ गठबंधन को मिलेगा। हालांकि यह दावा राजनीतिक है और परिणाम मतगणना के दिन स्पष्ट होंगे।
मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनाव आयोग के नोटिस पर आठवले की क्या प्रतिक्रिया है?
आठवले ने चुनाव आयोग के नोटिस को उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को 'आतंकवादी' कहना अमर्यादित भाषा है और खड़गे को इस तरह के बयानों से बचना चाहिए।
महाराष्ट्र में मराठी न जानने पर लाइसेंस रद्द करने के मुद्दे पर आठवले का क्या रुख है?
आठवले ने मराठी सीखने की पहल का समर्थन किया, लेकिन गरीब चालकों का लाइसेंस रद्द करने को अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि मराठी न जानने वाले चालकों को सीखने का मौका दिया जाए, लेकिन उनकी आजीविका नहीं छीनी जानी चाहिए।
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