हरियाणा का बड़ा फैसला: एनसीआर में 23 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र, जुलाई तक 52 स्टेशन होंगे सक्रिय
सारांश
Key Takeaways
- हरियाणा सरकार एनसीआर में 23 नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित करेगी, जुलाई 2025 तक कुल संख्या 52 होगी।
- मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में 5 मॉडल धूल-मुक्त सड़कें विकसित करने के निर्देश दिए गए।
- एग्रीगेटर नीति जल्द लागू होगी जो कैब और राइड-शेयरिंग सेवाओं को नियमित कर उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित करेगी।
- एनसीआर के प्रमुख जिलों में डीजल ऑटो-रिक्शा लगभग हटाए जा चुके हैं, शेष 31 दिसंबर 2025 तक हटाए जाएंगे।
- नया सफर योजना के तहत 1.9 लाख पुराने ट्रक और 16,000 बसें हटाकर बीएस-6, सीएनजी व इलेक्ट्रिक वाहन लाए जाएंगे।
- पुराने ठोस कचरे (लेगेसी वेस्ट) को 11 महीनों में पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
चंडीगढ़, 24 अप्रैल: हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 23 अतिरिक्त वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस कदम से जुलाई 2025 तक एनसीआर में ऐसे स्टेशनों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो जाएगी। यह घोषणा मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई वायु गुणवत्ता प्रबंधन समीक्षा बैठक में की गई।
समीक्षा बैठक में क्या हुए अहम फैसले
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा का सख्ती से पालन करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता में दीर्घकालिक और टिकाऊ सुधार के लिए विभिन्न विभागों के बीच निरंतर समन्वय अनिवार्य है।
रस्तोगी ने गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरणों तथा एनसीआर के नगर निगम आयुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कम से कम पांच प्रमुख सड़कों को चिह्नित कर उन्हें धूल-मुक्त मॉडल सड़क के रूप में विकसित या पुनर्विकसित करें। इसके लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) से लेकर अंतिम कार्य पूरा होने तक की स्पष्ट समयसीमा तय करने को कहा गया।
वाहन प्रदूषण नियंत्रण पर सख्त रुख
अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यावरण) सुधीर राज पाल ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने की तत्काल जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिक यातायात वाले क्षेत्रों में जांच अभियान तेज किए जाएं और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पाल ने चलती गाड़ियों से निकलने वाले धुएं की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने और उसी के आधार पर चालान जारी करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। मुख्य सचिव रस्तोगी ने परिवहन विभाग को पीयूसी केंद्रों से डेटा एकत्र करने के निर्देश दिए, जिसमें प्रमाणपत्र देने से इनकार किए गए मामले और मानक से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जानकारी भी शामिल होगी।
एग्रीगेटर नीति और डीजल ऑटो-रिक्शा पर कार्रवाई
प्रधान सचिव (परिवहन) राजा शेखर वुंडरू ने बताया कि विभाग जल्द ही कैब और राइड-शेयरिंग सेवाओं को व्यवस्थित करने के लिए एग्रीगेटर नीति लागू करेगा। इस नीति का उद्देश्य निजी वाहनों के बड़े बेड़े को एक नियमित ढांचे में लाकर उत्सर्जन मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना और परिवहन से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
वुंडरू ने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत एनसीआर के प्रमुख जिलों में डीजल ऑटो-रिक्शा लगभग पूरी तरह हटाए जा चुके हैं और शेष क्षेत्रों में इन्हें 31 दिसंबर तक चरणबद्ध रूप से हटाया जाएगा।
नया सफर योजना और लेगेसी वेस्ट प्रबंधन
'नया सफर योजना' के तहत करीब 1.9 लाख पुराने ट्रकों और 16,000 बसों को हटाकर उनकी जगह बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन लाने की योजना है, जिसके लिए वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाएगा। यह योजना एनसीआर में परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने में सहायक होगी।
इसके अतिरिक्त, पुराने ठोस कचरे (लेगेसी वेस्ट) को 11 महीनों के भीतर पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है, जो वायु प्रदूषण में कचरा जलाने की भूमिका को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर प्रत्येक सर्दी में गंभीर वायु प्रदूषण संकट से जूझता है और CAQM लगातार हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों पर ठोस कदम उठाने का दबाव बनाता रहा है। इस पृष्ठभूमि में हरियाणा का यह कदम न केवल नियामकीय अनुपालन की दिशा में है, बल्कि एनसीआर के करोड़ों निवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में इन नीतियों के जमीनी क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।