केजरीवाल के तानाशाही रवैये पर भाजपा का हमला: आप सांसदों के इस्तीफे से पार्टी में बड़ी दरार उजागर
सारांश
Key Takeaways
- आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों ने एक साथ इस्तीफा देकर पार्टी में बड़ी दरार उजागर की।
- पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने केजरीवाल की निरंकुश कार्यशैली को इस संकट का मुख्य कारण बताया।
- मुख्यमंत्री भगवंत मान को शर्मा ने केजरीवाल की 'कठपुतली' करार दिया।
- प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भाजपा में शामिल सांसदों का स्वागत किया और आप को देश की सबसे कम समय तक सक्रिय रहने वाली पार्टियों में बताया।
- फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पंजाब आप का एकमात्र बड़ा राज्य बचा है, जहाँ 2027 में चुनाव होने हैं।
- स्वाति मालीवाल विवाद और राघव चड्ढा से जुड़े मामले को भाजपा ने आप के संकट की पृष्ठभूमि के रूप में फिर उठाया।
चंडीगढ़, 24 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (आप) के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों द्वारा इस्तीफा दिए जाने की घटना ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। पंजाब भाजपा ने इस घटनाक्रम को अरविंद केजरीवाल की बढ़ती तानाशाही कार्यशैली और पार्टी के भीतर गहराती असंतोष की लहर का प्रमाण बताया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब आप पहले से ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद संगठनात्मक संकट से जूझ रही है।
भाजपा का पलटवार: केजरीवाल के नेतृत्व पर उठे सवाल
पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को एक तीखे बयान में कहा कि इस बड़े पैमाने पर हुए इस्तीफे ने केजरीवाल के नेतृत्व की खोखली नींव को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम महज एक संयोग नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर पनप रहे गहरे असंतोष की स्वाभाविक परिणति है।
शर्मा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल अपनी पार्टी को लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि एकतरफा और निरंकुश तरीके से चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पार्टी के अपने ही वरिष्ठ सांसद संगठन से मुंह मोड़ने लगें, तो यह नेतृत्व की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भगवंत मान पर 'कठपुतली' का आरोप
शर्मा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने मान को केजरीवाल की 'कठपुतली' करार देते हुए कहा कि वे हर बार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अप्रासंगिक बयानबाजी करते हैं। शर्मा के अनुसार, पंजाब की जनता ने साढ़े चार वर्ष पहले यह सोचकर वोट दिया था कि राज्य की बागडोर पंजाबियों के हाथ में होगी, लेकिन वास्तव में राज्य दिल्ली से रिमोट-कंट्रोल से चलाया जा रहा है।
उन्होंने स्वाति मालीवाल के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और राघव चड्ढा से जुड़े विवाद को भी उठाया। शर्मा ने कहा कि ये मुद्दे जनता की स्मृति से मिटाए नहीं जा सकते और आने वाले समय में आप को इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी।
जाखड़ ने कहा — आप की डूबती नाव छोड़ने का सही वक्त
पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भाजपा में शामिल हुए आप के राज्यसभा सदस्यों का खुले दिल से स्वागत किया। जाखड़ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आप की डूबती नाव को समय रहते छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले सभी सांसदों का हार्दिक स्वागत है।
जाखड़ ने आम आदमी पार्टी को देश की सबसे कम समय तक सक्रिय रहने वाली प्रमुख पार्टियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि आप के कुशासन, भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण पंजाब की जनता पार्टी से पूरी तरह निराश हो चुकी है। उनके अनुसार, जब पार्टी ने जनहित को दरकिनार कर दिया, तो अब उसके भीतर के ईमानदार लोग भी पार्टी छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने फरवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार का सामना किया था, जहां भाजपा ने भारी बहुमत से सत्ता हासिल की। उसके बाद से पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता रहा है। राज्यसभा सांसदों का यह सामूहिक इस्तीफा उसी असंतोष की एक बड़ी अभिव्यक्ति माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि आप ने अपनी आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत नहीं किया और पंजाब में शासन सुधार नहीं दिखाया, तो 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केजरीवाल इस संगठनात्मक संकट से उबरने के लिए क्या कदम उठाते हैं।