ईडी की बड़ी कार्रवाई: 20.59 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में सुनील त्रिपाठी गिरफ्तार, डेयरी मिलावट कांड का पर्दाफाश
सारांश
Key Takeaways
- सुनील त्रिपाठी, जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स के पूर्व CEO, को ईडी ने 20 अप्रैल 2025 को 20.59 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया।
- कंपनी पर डेयरी उत्पादों में मिलावट कर एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन एजेंसी, इंदौर को फर्जी लैब रिपोर्ट जमा करने का आरोप है।
- 1 अप्रैल 2025 को वडोदरा में छापेमारी में आपत्तिजनक दस्तावेज और 9.36 लाख रुपए की बैंक राशि फ्रीज की गई।
- कंपनी के MD किशन मोदी को 13 मार्च 2025 को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे न्यायिक हिरासत में हैं।
- ईडी ने प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत 20.59 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं।
- 28 अप्रैल 2025 को पीएमएलए न्यायालय, भोपाल में सुनील त्रिपाठी की अगली पेशी होगी।
भोपाल, 24 अप्रैल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने डेयरी उत्पादों में मिलावट और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील त्रिपाठी को 20 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत की गई, जिसमें कंपनी पर 20.59 करोड़ रुपए की अवैध आय अर्जित करने का आरोप है। फर्जी लैब रिपोर्ट के जरिए मिलावटी डेयरी उत्पादों का निर्यात इस पूरे घोटाले की धुरी है।
गिरफ्तारी और न्यायिक कार्यवाही
सुनील त्रिपाठी को गिरफ्तारी के बाद विशेष पीएमएलए न्यायालय, भोपाल में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें विस्तृत पूछताछ के लिए 28 अप्रैल 2025 शाम 4 बजे तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
ईडी के अनुसार, सुनील त्रिपाठी ने जांच के दौरान एजेंसी का सहयोग करने से बार-बार इनकार किया। एजेंसी द्वारा भेजे गए कई समन और ईमेल को उन्होंने जानबूझकर नजरअंदाज किया, जिसके बाद गिरफ्तारी की नौबत आई।
वडोदरा में छापेमारी और बरामदगी
गिरफ्तारी से पहले 1 अप्रैल 2025 को वडोदरा स्थित सुनील त्रिपाठी के ठिकानों पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली गई थी। इस छापेमारी में आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
इसके अलावा, 9.36 लाख रुपए की बैंक जमा राशि को भी तत्काल फ्रीज कर दिया गया। यह राशि संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी बताई जा रही है।
मामले की जड़: डेयरी मिलावट और फर्जी दस्तावेज
ईडी की जांच में यह उजागर हुआ है कि जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स बड़े पैमाने पर डेयरी उत्पादों में मिलावट कर रही थी। निर्यात की मंजूरी पाने के लिए कंपनी एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन एजेंसी, इंदौर को फर्जी लैब रिपोर्ट जमा करती थी।
इन जाली दस्तावेजों की आड़ में मिलावटी उत्पादों का निर्यात किया गया, जिससे लगभग 20.59 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) उत्पन्न हुई। यह रकम विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की गई।
जांच में सुनील त्रिपाठी की भूमिका तीन स्तरों पर सामने आई है — फर्जी दस्तावेज तैयार करना, निर्यात गतिविधियों की निगरानी, और अवैध आय को वैध बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी, संपत्तियां जब्त
इस मामले में ईडी 13 मार्च 2025 को कंपनी के प्रबंध निदेशक किशन मोदी को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। किशन मोदी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने इस मामले में एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी करते हुए किशन मोदी और अन्य आरोपियों से जुड़ी 20.59 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त कर ली हैं।
इस पूरे मामले की शुरुआत भोपाल के हबीबगंज पुलिस स्टेशन और ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी, जिसमें कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों पर भारतीय दंड संहिता 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
व्यापक संदर्भ: खाद्य सुरक्षा और निर्यात घोटालों की बड़ी तस्वीर
यह मामला केवल एक कंपनी के वित्तीय अपराध तक सीमित नहीं है। मिलावटी डेयरी उत्पादों का निर्यात भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को सीधे नुकसान पहुंचाता है। जब फर्जी लैब रिपोर्ट के आधार पर घटिया उत्पाद विदेश भेजे जाते हैं, तो इससे न केवल उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ता है, बल्कि भारतीय निर्यात उद्योग की विश्वसनीयता भी दांव पर लगती है।
गौरतलब है कि FSSAI और एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल जैसी संस्थाओं की निगरानी प्रणाली में इस तरह की चूक गंभीर सवाल खड़े करती है। ईडी के अनुसार जांच अभी जारी है और मनी ट्रेल का पता लगाने, अन्य संपत्तियों की पहचान करने तथा इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों व संस्थाओं की भूमिका की जांच की जा रही है।
आने वाले दिनों में 28 अप्रैल को पीएमएलए कोर्ट में सुनील त्रिपाठी की अगली पेशी महत्वपूर्ण होगी, जहां ईडी अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी।