आंध्र प्रदेश शराब घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, छह आरोपियों के ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 24 अप्रैल, शुक्रवार को आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में छह आरोपियों के परिसरों पर एकसाथ छापेमारी की।
- छापेमारी हैदराबाद, विजयवाड़ा और तिरुपति में की गई, जो एसआईटी रिपोर्ट पर आधारित है।
- आरोपियों में पूर्व विधायक चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी, केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी और भारती सीमेंट्स के निदेशक बालाजी गोविंदप्पा शामिल हैं।
- तीन दिन पहले ईडी ने ₹441.63 करोड़ की संपत्तियां पीएमएलए के तहत अटैच की थीं।
- अब तक जांच में ₹1,048.45 करोड़ के किकबैक का मनी ट्रेल सामने आया है।
- घोटाले में सरकारी खजाने को ₹4,000 करोड़ के नुकसान का आरोप है; जांच जारी है और और गिरफ्तारियां संभव हैं।
विजयवाड़ा, 24 अप्रैल। आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बड़ी छापेमारी कार्रवाई को अंजाम दिया। एजेंसी ने हैदराबाद, विजयवाड़ा और तिरुपति में एक साथ छह आरोपियों के घरों, दफ्तरों और अन्य परिसरों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
किन-किन आरोपियों के यहां पड़े छापे?
ईडी की टीमों ने जिन आरोपियों के परिसरों की तलाशी ली, उनमें वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के नेता और पूर्व विधायक चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी, इस मामले के मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, भारती सीमेंट्स के निदेशक बालाजी गोविंदप्पा, कृष्ण मोहन और धनुंजय रेड्डी शामिल हैं।
कृष्ण मोहन पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) के पद पर रह चुके हैं। वहीं, धनुंजय रेड्डी उस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में सचिव के पद पर तैनात थे। इन दोनों से 9 मार्च को ईडी पहले भी पूछताछ कर चुकी है।
₹441 करोड़ की संपत्तियां पहले ही हो चुकी हैं अटैच
इस छापेमारी से महज तीन दिन पहले ईडी ने ₹441.63 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां अटैच की थीं। ये संपत्तियां केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, उनके परिजनों, बूनेटी चाणक्य, डोंथीरेड्डी वासुदेव रेड्डी और अन्य संबंधित व्यक्तियों तथा संस्थाओं की बताई जा रही हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई।
घोटाले की जड़ें और मनी ट्रेल
ईडी ने यह जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर राज्य सरकार के प्रधान सचिव की शिकायत पर दर्ज हुई थी, जिसमें सरकारी खजाने को करीब ₹4,000 करोड़ के नुकसान का आरोप है।
जांच में अब तक ₹1,048.45 करोड़ के किकबैक का मनी ट्रेल सामने आया है। आरोप है कि नकद रिश्वत मुख्यतः हैदराबाद में एकत्र की जाती थी और फिर सिंडिकेट के जरिए उसे विभिन्न स्थानों पर भेजा, बांटा या खपाया जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, कई डिस्टिलरी को जबरन नकद, सोना और अन्य माध्यमों से भुगतान करना पड़ा। कुछ डिस्टिलरी का संचालन सीधे इस सिंडिकेट के नियंत्रण में था और शराब परिवहन से भी आर्थिक लाभ कमाया गया।
अवैध कमाई का इस्तेमाल और आगे की कार्रवाई
ईडी के अनुसार, इस अपराध से अर्जित धनराशि का उपयोग जमीन-जायदाद की खरीद और व्यक्तिगत संपत्ति बनाने में किया गया। एजेंसी का यह भी दावा है कि अपराध से जुड़ी एक बड़ी रकम को आरोपियों ने छिपा दिया है या उसे अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया है।
गौरतलब है कि यह मामला केवल शराब नीति तक सीमित नहीं है — इसमें सत्ता के शीर्ष से जुड़े नौकरशाहों और राजनेताओं की संलिप्तता के आरोप हैं, जो इसे आंध्र प्रदेश के राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार कांडों में से एक बनाते हैं। तेलंगाना के शराब घोटाले से तुलना करें तो आंध्र प्रदेश का यह मामला आर्थिक पैमाने पर कहीं अधिक विस्तृत प्रतीत होता है।
ईडी की यह जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे तथा संभावित गिरफ्तारियां हो सकती हैं।