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थ्री सी से कोई समझौता नहीं: CM सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा में पेश किया विश्वास प्रस्ताव

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थ्री सी से कोई समझौता नहीं: CM सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा में पेश किया विश्वास प्रस्ताव

सारांश

बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म से कोई समझौता न करने का संकल्प दोहराया। लालू यादव के शासनकाल पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने महिला सुरक्षा, औद्योगिक विकास और सरकारी स्कूल सुधार की बड़ी घोषणाएं कीं।

मुख्य बातें

24 अप्रैल 2025 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव पेश किया।
थ्री सी नीति — क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म से कोई समझौता नहीं करने का संकल्प दोहराया गया।
ब्लॉक, अंचल और थाना की निगरानी अब सीधे सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) से होगी।
सरकारी स्कूलों में मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था करने की बड़ी घोषणा की गई।
लालू यादव के शासनकाल को बिहार की दुर्दशा का दौर बताते हुए राजद पर तीखा हमला बोला गया।
कोसी नदी को अभिशाप से वरदान बनाने और बिहार में औद्योगिक विकास तेज करने की प्रतिबद्धता जताई गई।

पटना, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म — यानी 'थ्री सी' — से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि बिहार में सुशासन की नींव पिछले 21 वर्षों से मजबूत होती आ रही है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

विश्वास प्रस्ताव में 'थ्री सी' नीति की पुनरावृत्ति

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में कहा कि जिस तरह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म के खिलाफ अडिग रुख अपनाया, उसी राह पर वर्तमान सरकार भी चलेगी। उन्होंने कहा कि यह नीति केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि शासन का मूल आधार है।

विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर सम्राट चौधरी ने दो-टूक जवाब दिया — "यह सत्ता किसी की बपौती नहीं है।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लालू यादव के शासनकाल में उन्हें जेल भेजा गया, और उसी अन्याय ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था — "अगर लालू यादव मुझे जेल नहीं भेजते, तो शायद आज मैं मुख्यमंत्री नहीं बनता।"

लालू राज पर तीखा प्रहार

सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शासनकाल को बिहार के लिए अंधकार का दौर बताया। उन्होंने कहा कि लालू यादव सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बने, लेकिन बिहार को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने जनता से कहा कि उस दौर की दुर्दशा उन्हें याद है और वे उसे फिर नहीं होने देंगे।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नीतीश कुमार को न राजनीति से हटाया जा सकता है और न ही बिहार की जनता के दिलों से। भाजपा और एनडीए की एकजुटता पर उन्होंने कहा कि दोनों एक हैं और किसी को भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

महिला सुरक्षा और आरक्षण पर कड़ा संदेश

विपक्ष के महिला आरक्षण संबंधी सवालों पर सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक ओबीसी और दलित वर्ग की महिला विधायक हैं — यही असली प्रतिनिधित्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं के खिलाफ गलत नजर डालने वाले को "पाताल से भी खोजकर निकाला जाएगा।"

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर बहस तेज है। बिहार में हाल के वर्षों में महिला अपराध के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, इसलिए मुख्यमंत्री का यह सख्त रुख राजनीतिक संदेश के साथ-साथ प्रशासनिक प्रतिबद्धता भी दर्शाता है।

विकास और प्रशासनिक सुधार की घोषणाएं

सम्राट चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि अब ब्लॉक, अंचल और थाना स्तर की निगरानी सीधे सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) से होगी — यह प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कोसी नदी को अभिशाप से वरदान बनाने का संकल्प दोहराया और बिहार में तेज औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्धता जताई। किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक साहसिक घोषणा भी की — सरकारी स्कूलों में अधिकारियों और मंत्रियों के बच्चे भी पढ़ें, ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी।

यह घोषणा अगर जमीन पर उतरती है तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। गौरतलब है कि बिहार में सरकारी स्कूलों की दशा लंबे समय से चिंता का विषय रही है।

आगे की राह: बिहार की राजनीतिक दिशा

सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में बिहार विकास की नई ऊंचाइयां छुएगा। विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनडीए की एकजुटता किस हद तक बनी रहती है और विपक्ष अपनी रणनीति में क्या बदलाव करता है। आने वाले महीनों में बिहार में औद्योगिक निवेश और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार के प्रदर्शन पर सबकी नजर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार की नई सत्ता संरचना का पहला राजनीतिक परीक्षण है। दिलचस्प यह है कि जो नेता लालू यादव की 'पाठशाला' का हिस्सा रहे, वही आज उसी पर सबसे तीखे प्रहार कर रहे हैं — यह बिहार की राजनीति की विडंबना है। 'थ्री सी' नीति 21 साल पुरानी है, लेकिन सरकारी स्कूलों में मंत्रियों के बच्चे पढ़ाने जैसी घोषणाएं अगर जमीन पर उतरें तो यह वाकई नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत होगी — वरना यह भी चुनावी भाषण बनकर रह जाएगा। राष्ट्र प्रेस की नजर रहेगी कि सीएमओ से ब्लॉक-थाना निगरानी का वादा कितने दिनों में अमल में आता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सम्राट चौधरी ने विश्वास प्रस्ताव में क्या मुख्य घोषणाएं कीं?
सम्राट चौधरी ने क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म से समझौता न करने की नीति दोहराई। उन्होंने ब्लॉक, अंचल और थाना की निगरानी सीधे सीएमओ से करने और सरकारी स्कूलों में मंत्रियों व अधिकारियों के बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था करने की घोषणा की।
बिहार विधानसभा का विशेष सत्र क्यों बुलाया गया?
नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सदन में बहुमत साबित करने के लिए बिहार विधानसभा का विशेष सत्र 24 अप्रैल 2025 को बुलाया गया। यह विश्वास प्रस्ताव एनडीए सरकार की स्थिरता की आधिकारिक पुष्टि के लिए जरूरी था।
सम्राट चौधरी ने लालू यादव पर क्या कहा?
सम्राट चौधरी ने कहा कि लालू यादव ने उन्हें जेल भेजा, जिसने उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा दी। उन्होंने लालू के शासनकाल को बिहार की दुर्दशा का दौर बताते हुए कहा कि राजद के कुशासन का विरोध ही उनकी राजनीति का मूल आधार है।
थ्री सी नीति क्या है और बिहार में इसका क्या महत्व है?
थ्री सी नीति का मतलब है — क्राइम (अपराध), करप्शन (भ्रष्टाचार) और कम्युनलिज्म (सांप्रदायिकता) के खिलाफ शून्य सहनशीलता। नीतीश कुमार के शासनकाल से चली आ रही यह नीति बिहार में सुशासन की पहचान बन चुकी है और सम्राट चौधरी ने इसे जारी रखने का वादा किया।
सम्राट चौधरी ने महिला सुरक्षा पर क्या कहा?
सम्राट चौधरी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ गलत नजर डालने वाले को पाताल से भी खोजकर निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक ओबीसी और दलित वर्ग की महिला विधायक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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