26 जून 2026
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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट की अग्रिम जमानत, कांग्रेस बोली- न्याय की लौ अब भी जिंदा है

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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट की अग्रिम जमानत, कांग्रेस बोली- न्याय की लौ अब भी जिंदा है

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दी — असम पुलिस की उस एफआईआर में जो सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज हुई थी। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका की जीत बताया, जबकि डॉ. सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी की कोशिश मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित थी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 1 मई 2026 को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दी।
जमानत असम पुलिस द्वारा हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से संबंधित है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी की याचिका मनगढ़ंत, अटकलों पर आधारित और बेबुनियाद थी।
कोर्ट ने माना कि विवादित बयान एक राजनीतिक अभियान के दौरान दिए गए थे और लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में विवादित बयानों का बचाव नहीं किया।
यह मामला कामरूप जिला मजिस्ट्रेट अदालत , तेलंगाना हाई कोर्ट , गुवाहाटी हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय से होकर गुजरा।

सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को 1 मई 2026 को अग्रिम जमानत प्रदान की, जो असम पुलिस द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से संबंधित है। इस फैसले का कांग्रेस पार्टी ने खुलकर स्वागत किया और कहा कि इससे देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा का संदेश मजबूत होता है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश और पार्टी सांसद एवं खेड़ा के वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और गिरफ्तारी — विशेषकर मानहानि के कथित मामलों में — कोई सामान्य कदम नहीं, बल्कि अंतिम उपाय होनी चाहिए।

जयराम रमेश ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे बार-बार दोहराने की जरूरत यह बताती है कि निचले स्तर पर इसका पालन कितना अपर्याप्त है। गौरतलब है कि सॉलिसिटर जनरल ने खुद कोर्ट में विवादित बयानों का बचाव नहीं किया — यह सरकारी पक्ष की कमजोरी का स्पष्ट संकेत है। असली सवाल यह है कि क्या इस फैसले से भविष्य में ऐसे राजनीति-प्रेरित मामलों पर लगाम लगेगी, या यह महज एक और न्यायिक राहत बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत क्यों दी गई?
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि गिरफ्तारी के लिए जरूरी ट्रिपल टेस्ट — भागने का जोखिम, सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करना — इस मामले में पूरा नहीं होता था। कोर्ट ने यह भी माना कि विवादित बयान एक राजनीतिक अभियान के दौरान दिए गए थे, इसलिए लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत इन्हें संरक्षण मिलना चाहिए।
पवन खेड़ा के खिलाफ असम में एफआईआर किसने दर्ज कराई?
असम पुलिस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज की थी। कांग्रेस के वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी की याचिका मनगढ़ंत, अटकलों पर आधारित और बेबुनियाद थी।
यह मामला किन-किन अदालतों से होकर गुजरा?
यह मामला कामरूप जिले की मजिस्ट्रेट अदालत, तेलंगाना हाई कोर्ट, सर्वोच्च न्यायालय, गुवाहाटी हाई कोर्ट और फिर वापस सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा। अंततः शीर्ष अदालत ने खेड़ा को राहत प्रदान की।
कांग्रेस ने इस फैसले पर क्या कहा?
कांग्रेस ने इस फैसले को न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रमाण बताया। जयराम रमेश ने कहा कि इससे देश में न्याय की लौ अब भी जिंदा होने की पुष्टि होती है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह जश्न नहीं मना रही, बल्कि इस फैसले से सीख ले रही है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
डॉ. सिंघवी ने सरमा के बयानों को असंसदीय और नामंजूर बताया तथा कहा कि इससे संवैधानिक मानकों के क्षरण का खतरा है। उन्होंने सरमा से माफी नहीं तो कम से कम अफसोस जताने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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