ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: मेजर जनरल भाटिया बोले — मलक्का से 100 किमी दूर यह द्वीप भारत की समुद्री ताकत का केंद्र, विपक्ष राजनीति छोड़े

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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: मेजर जनरल भाटिया बोले — मलक्का से 100 किमी दूर यह द्वीप भारत की समुद्री ताकत का केंद्र, विपक्ष राजनीति छोड़े

सारांश

मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 100 किमी दूर ग्रेट निकोबार द्वीप पर बनने वाली यह परियोजना भारत की समुद्री शक्ति का नया केंद्र बन सकती है — लेकिन इसका राजनीतिक विरोध राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। मेजर जनरल भाटिया का कहना है कि यह चीन के समुद्री प्रभाव को चुनौती देने का सबसे बड़ा अवसर है।

Key Takeaways

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अरविंद भाटिया ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य बताया। परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 100 किमी दूर स्थित है, जहाँ से 30% वैश्विक व्यापार गुजरता है। 1.62 मिलियन टीईयू क्षमता वाला अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल, ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा और नौसैनिक ठिकाने प्रस्तावित हैं। परियोजना के लिए केवल 1.82% वन क्षेत्र उपयोग होगा; 82% वन अछूता रहेगा। भारत की 75% कंटेनर हैंडलिंग अभी विदेशी पोर्ट्स पर निर्भर है — यह परियोजना इसे घटाएगी। भाटिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सर्वदलीय समर्थन की माँग की।

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अरविंद भाटिया ने 1 मई 2026 को गुरुग्राम में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की समुद्री और सैन्य रणनीति के लिए अपरिहार्य है, और इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का विरोध राजनीतिक कारणों से नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप के पूर्वी हिस्से में विकसित की जाएगी, जो वैश्विक व्यापार के लगभग 30 प्रतिशत के लिए एक निर्णायक समुद्री चोकपॉइंट है।

परियोजना में क्या शामिल है

भाटिया के अनुसार, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत चार प्रमुख घटक विकसित किए जाएंगे। पहला, स्थानीय आबादी के लिए एक नया शहर। दूसरा, 1.62 मिलियन टीईयू क्षमता वाला एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट कंटेनर टर्मिनल, जो इसे देश के सबसे बड़े पोर्ट्स में शामिल कर देगा। तीसरा, एक ग्रीनफील्ड हवाई क्षेत्र जिसका उपयोग नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए होगा। चौथा, नौसेना और वायुसेना के ठिकाने सहित विभिन्न सैन्य संपत्तियाँ।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच परियोजना के लिए केवल 1.82 प्रतिशत वन क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा, जबकि 82 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह अछूता रहेगा।

रणनीतिक महत्व और चीन का कारक

भाटिया ने कहा,

Point of View

लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमज़ोर करता है। ग्रेट निकोबार पर पर्यावरणीय और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी वैध चिंताएँ हैं जिन्हें रणनीतिक ज़रूरत की आड़ में खारिज नहीं किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय हित और जवाबदेही परस्पर विरोधी नहीं हैं — असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार पारदर्शिता के साथ इन दोनों को संतुलित कर पाती है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट क्या है?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार की एक बहु-आयामी विकास परियोजना है, जिसमें 1.62 मिलियन टीईयू क्षमता का अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा, नौसैनिक व वायुसेना ठिकाने और एक नया शहर शामिल हैं। यह परियोजना ग्रेट निकोबार द्वीप के पूर्वी हिस्से में विकसित की जाएगी।
ग्रेट निकोबार द्वीप रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
ग्रेट निकोबार द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 100 किलोमीटर दूर है, जहाँ से वैश्विक व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत और चीन के व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहाँ सैन्य और निगरानी उपस्थिति बढ़ाने से भारत की समुद्री क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
क्या ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से पर्यावरण को नुकसान होगा?
मेजर जनरल भाटिया के अनुसार, परियोजना के लिए केवल 1.82 प्रतिशत वन क्षेत्र का उपयोग होगा और 82 प्रतिशत वन क्षेत्र पूरी तरह अछूता रहेगा। हालाँकि, पर्यावरणविद् और आदिवासी अधिकार समूह इस परियोजना के दीर्घकालिक पारिस्थितिक प्रभाव को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
भारत की कंटेनर हैंडलिंग में यह परियोजना क्या बदलाव लाएगी?
अभी भारत की लगभग 75 प्रतिशत कंटेनर हैंडलिंग विदेशी पोर्ट्स पर निर्भर है। 1.62 मिलियन टीईयू क्षमता के इस टर्मिनल के बनने से यह निर्भरता काफी हद तक कम होगी और घरेलू बंदरगाह क्षमता मजबूत होगी।
राहुल गांधी की आलोचना पर मेजर जनरल भाटिया ने क्या कहा?
भाटिया ने कहा कि राष्ट्रीय और रणनीतिक संपत्तियों के विकास पर विपक्ष को सरकार का समर्थन करना चाहिए, न कि केवल इसलिए विरोध करना चाहिए क्योंकि यह सरकार की पहल है। उन्होंने राफेल सौदे और गलवान घाटी जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि सैन्य मामलों पर राजनीतिक सवाल राष्ट्रीय हित के विरुद्ध हो सकते हैं।
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