ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: Lt. Gen. राजीव चौधरी बोले — मलक्का पर नियंत्रण से चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' को मिलेगा करारा जवाब
सारांश
Key Takeaways
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजीव चौधरी, जो सीमा सड़क संगठन (BRO) के पूर्व महानिदेशक रह चुके हैं, ने 1 मई 2026 को पुणे में कहा कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत को मलक्का जलडमरूमध्य पर रणनीतिक नियंत्रण दिलाएगा और चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का सीधा जवाब बनेगा। उनके अनुसार, यह परियोजना समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक स्वायत्तता और स्थानीय विकास — तीनों मोर्चों पर भारत के हितों की रक्षा करती है।
मलक्का जलडमरूमध्य: रणनीतिक महत्व
ग्रेट निकोबार द्वीप, मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चौधरी ने कहा कि दुनिया का लगभग 30 प्रतिशत व्यापार और चीन की 60 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति इसी जलमार्ग से होकर गुजरती है। उन्होंने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तनाव का केंद्र बन चुका है, उसी तरह मलक्का भी इंडो-पैसिफिक में एक निर्णायक रणनीतिक बिंदु है। गौरतलब है कि अंडमान और निकोबार कमांड फिलहाल पोर्ट ब्लेयर तक ही सीमित है और द्वीप समूह के दक्षिणी हिस्सों में इसकी उपस्थिति बेहद सीमित है।
चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' और भारत का जवाब
चौधरी ने कहा कि चीन अपनी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के तहत ग्वादर, हंबनटोटा, चटगांव और क्यौकप्यू जैसे बंदरगाहों का एक घेरा बना रहा है, जो भारत के रणनीतिक हितों के लिए सीधी चुनौती है। उनके अनुसार, कैंपबेल-बे और गैलाथिया-बे में प्रस्तावित एकीकृत बंदरगाह सुविधा इस घेरेबंदी का प्रभावी प्रतिउत्तर बन सकती है। यह भारत को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संगम पर एक फॉरवर्ड लॉजिस्टिक्स बेस देगी, जिससे सिक्स डिग्री चैनल सहित पूरे क्षेत्र में समुद्री निगरानी मजबूत होगी। भविष्य में किसी भी संघर्ष की स्थिति में यह एक फोर्स प्रोजेक्शन बेस के रूप में भी काम कर सकता है।
आर्थिक लाभ और व्यापारिक स्वायत्तता
चौधरी ने बताया कि भारत अभी कोलंबो, पोर्ट क्लांग और सिंगापुर के बंदरगाहों पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे भारी राजस्व हानि होती है। ग्रेट निकोबार का प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट एक 'जीरो डेविएशन पोर्ट' के रूप में काम करेगा — यानी जहाज बिना मार्ग बदले वहाँ रुक सकेंगे। इस बंदरगाह से सालाना 16 मिलियन TEU कार्गो संभालने की क्षमता अपेक्षित है। इससे शिपमेंट में होने वाली 3 से 7 दिनों की देरी कम होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और भारत की वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। जहाज मरम्मत और भंडारण सुविधाओं से अतिरिक्त राजस्व भी अर्जित होगा।
राहुल गांधी की टिप्पणी और राजनीतिक विरोध पर प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ग्रेट निकोबार परियोजना पर की गई टिप्पणियों पर चौधरी ने कहा कि उनकी समझ से यह बयान