डॉ. अजय कुमार युगांडा के उच्चायुक्त नियुक्त, डॉ. प्रदीप सिंह राजपुरोहित बहरीन के राजदूत बने
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार ने 21 मई 2026 को दो वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारियों की राजनयिक नियुक्तियाँ घोषित कीं। 2002 बैच के IFS अधिकारी डॉ. अजय कुमार को युगांडा गणराज्य में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि 2004 बैच के IFS अधिकारी डॉ. प्रदीप सिंह राजपुरोहित को बहरीन गणराज्य में भारत का अगला राजदूत बनाया गया है। दोनों नियुक्तियाँ विदेश मंत्रालय द्वारा अधिसूचित की गई हैं।
डॉ. अजय कुमार: प्रोफाइल और अनुभव
डॉ. अजय कुमार ने नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) से कृषि विज्ञान में पीएचडी की है। वे बहुभाषी हैं और हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू तथा अरबी में दक्ष हैं।
युगांडा की नियुक्ति से पूर्व, डॉ. कुमार 2023 से 2026 तक वाशिंगटन D.C. स्थित भारतीय दूतावास में मिनिस्टर (कॉमर्स) के रूप में कॉमर्स विंग के प्रमुख रहे, जहाँ उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार और व्यावसायिक संबंधों का संचालन किया। यह वाशिंगटन में उनका दूसरा कार्यकाल था — इससे पहले वे 2013 से 2016 तक वहाँ फर्स्ट सेक्रेटरी/काउंसलर रह चुके थे।
2016 से 2020 तक उन्होंने नेपाल में काउंसलर के रूप में कार्य किया और भूकंप के बाद भारत के बड़े पुनर्निर्माण परियोजनाओं का नेतृत्व किया। बाद में वे काठमांडू में भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन बनाए गए। अपने शुरुआती राजनयिक कार्यकाल में 2004 से 2010 तक उन्होंने काहिरा (मिस्र) और खार्तूम (सूडान) में मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका क्षेत्र में सेवाएँ दीं।
2020 से 2023 तक वे भारतीय संसद में संयुक्त सचिव और चीफ ऑफ प्रोटोकॉल के पद पर रहे, जहाँ उन्होंने उच्च-स्तरीय अंतर-संसदीय सहयोग और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों का प्रबंधन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने SAARC ढाँचे के अंतर्गत आर्थिक और व्यापारिक मामलों के निदेशक के रूप में 2016–2017 तक अंतर्राष्ट्रीय समितियों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
डॉ. प्रदीप सिंह राजपुरोहित: प्रोफाइल और अनुभव
डॉ. प्रदीप सिंह राजपुरोहित फिलहाल त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य में भारत के उच्चायुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे MBBS स्नातक हैं और उन्होंने राजस्थान के जोधपुर स्थित डॉ. एस. एन. मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जोधपुर जिले के गाँव पीलवा के एक हिंदी माध्यम विद्यालय में हुई।
राजनय में आने से पूर्व, उन्होंने राजस्थान के बाड़मेर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में दो वर्ष तक स्वास्थ्य सेवाएँ दीं — एक असाधारण पृष्ठभूमि जो उनके राजनयिक करियर को विशिष्ट बनाती है।
अपने लंबे राजनयिक जीवन में डॉ. राजपुरोहित ने विदेश मंत्रालय में मध्य पूर्व (WANA) के संयुक्त सचिव के रूप में 15 देशों के साथ संबंधों का प्रबंधन किया। उन्होंने 2017 से 2019 तक इराक में राजदूत और 2019 से 2020 तक सऊदी अरब में उप राजदूत के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने स्पेन में भी भारत के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएँ दीं। वे बर्लिन (2014–2017), अबू धाबी (2008–2011) और काहिरा (2006–2008) में भी विभिन्न राजनयिक भूमिकाओं में रहे।
नियुक्तियों का महत्व
ये दोनों नियुक्तियाँ ऐसे समय में आई हैं जब भारत अफ्रीका और खाड़ी क्षेत्र में अपनी राजनयिक उपस्थिति को और मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। युगांडा के साथ भारत के व्यापारिक और विकास सहयोग संबंध लगातार प्रगाढ़ हो रहे हैं, जबकि बहरीन खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। डॉ. कुमार का व्यापार और कृषि क्षेत्र में विशेष अनुभव तथा डॉ. राजपुरोहित की मध्य पूर्व में गहरी राजनयिक समझ इन नियुक्तियों को रणनीतिक दृष्टि से सुचिंतित बनाती है।
आगे क्या
दोनों अधिकारी शीघ्र ही अपने-अपने देशों में पदभार ग्रहण करेंगे। डॉ. कुमार के कंपाला (युगांडा) और डॉ. राजपुरोहित के मनामा (बहरीन) में कार्यभार संभालने की प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद है।