सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को दी बधाई: 'कांग्रेस की विचारधारा और कर्नाटक के विकास को आगे बढ़ाएं'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार, 30 मई 2026 को डीके शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने और मुख्यमंत्री पद के लिए नामित होने पर बधाई दी। सिद्धारमैया ने अपने संदेश में शिवकुमार की संगठनात्मक क्षमता और पार्टी के प्रति समर्पण पर भरोसा जताते हुए उनसे राज्य और पार्टी दोनों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का आग्रह किया।
सिद्धारमैया ने क्या कहा
शिवकुमार को संबोधित अपने संदेश में सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने अपने सहयोगी की 'अदम्य ऊर्जा, संगठनात्मक कौशल और कांग्रेस पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा' को करीब से देखा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन गुणों का उपयोग कर्नाटक की जनता के कल्याण के लिए किया जाएगा।
सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक न केवल प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश का अग्रणी राज्य है, बल्कि धन, शक्ति और अवसरों के समान वितरण के लिए एक आदर्श के रूप में भी उभरा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में शुरू की गई योजनाओं को अन्य राज्य अपना रहे हैं — जो उनके अनुसार गर्व की बात है।
अपने कार्यकाल पर सिद्धारमैया का मंथन
अपने कार्यकाल पर विचार करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें आठ वर्षों तक कन्नड़ भाषी लोगों के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने और कर्नाटक को एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और आत्मसम्मानित राज्य बनाने में योगदान देने पर गर्व है। उन्होंने शिवकुमार को स्पष्ट संदेश दिया कि 'इस विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब आपके कंधों पर है।'
गौरतलब है कि यह सत्ता हस्तांतरण कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही आंतरिक सहमति की प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें दोनों नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं चलती रही हैं।
राष्ट्रीय चुनौतियों पर चिंता
सिद्धारमैया ने कहा कि देश भर के लोग आर्थिक असुरक्षा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने शिवकुमार से आग्रह किया कि वे प्रभावी शासन के माध्यम से लोगों में विश्वास जगाएं और राज्य को विकास के पथ पर अग्रसर रखें।
उन्होंने देश को जाति और धर्म के आधार पर बांटने के प्रयासों, संविधान पर सवाल उठाने और असहमति को दबाने पर भी चिंता व्यक्त की। सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बलिदानों से निर्मित भारत को जाति और धर्म के नाम पर खंडित किया जा रहा है, जबकि स्वयं संविधान पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता को चुनौती देने वालों को दबाया जा रहा है और महात्मा गांधी की हत्या करने वाले अब गोडसे का महिमामंडन कर रहे हैं।
वैचारिक संघर्ष का आह्वान
एक नए वैचारिक संघर्ष का आह्वान करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि समानता, सद्भाव, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे संवैधानिक मूल्यों पर स्थापित कांग्रेस को जमीनी स्तर से मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक के विकास के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी की पुरानी शान को बहाल करना सभी पार्टी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आने वाले समय में शिवकुमार के नेतृत्व की परीक्षा इस बात से होगी कि वे सिद्धारमैया की विरासत को संभालते हुए पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं।