सिद्दारमैया के इस्तीफे पर BJP का हमला: कांग्रेस हाईकमान बताए कारण — कर्नाटक में नेतृत्व संकट गहराया
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 29 मई 2026 को बेंगलुरु के लोक भवन में राज्यपाल के सचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिससे राज्य में हफ्तों से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता का एक अध्याय समाप्त हुआ और साथ ही एक नई तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई। इस्तीफे के वक्त उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कैबिनेट मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घटनाक्रम पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब माँगा है।
मुख्य घटनाक्रम
सिद्दारमैया का यह इस्तीफा राज्य कांग्रेस इकाई के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कई हफ्तों से जारी अटकलों के बाद आया। लोक भवन में औपचारिक रूप से पद छोड़ने के साथ ही मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। गौरतलब है कि सिद्दारमैया को हाल के वर्षों में कांग्रेस के सबसे बड़े जन नेताओं में गिना जाता रहा है।
BJP की प्रतिक्रिया
BJP के राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने कहा, 'सिद्दारमैया गलत राजनीति कर रहे हैं। वह कर्नाटक में कांग्रेस को खत्म करना चाहते हैं। अगर वह नहीं रहे तो कर्नाटक में कांग्रेस क्या करेगी? कांग्रेस क्या फैसला लेगी, यह तो तय है, लेकिन BJP जल्द ही वहाँ सत्ता में आएगी।'
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, 'पिछले डेढ़ साल से संघर्ष चल रहा है। सीएम और डिप्टी सीएम के समर्थक आपस में ही भिड़ रहे हैं। कांग्रेस के राज में विकास नहीं, बल्कि कौन सत्ता में रहेगा — इस पर जोर दिया जाता है। कर्नाटक में कुछ भी सही नहीं चल रहा है।'
जदयू की माँग
जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि कांग्रेस के आलाकमान को स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को पद से क्यों हटाया। उन्होंने कहा कि राज्य में जिस तरह का हाल है, वह जनता के हित में नहीं है और वहाँ विकास की जगह कुर्सी की लड़ाई हावी है।
आम जनता और राज्य पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर सीएम और डिप्टी सीएम खेमों के बीच आंतरिक तनाव की खबरें लंबे समय से सामने आ रही थीं। आलोचकों का कहना है कि इस आंतरिक खींचतान का असर राज्य के प्रशासन और विकास कार्यों पर पड़ा है।
क्या होगा आगे
सिद्दारमैया के इस्तीफे के बाद कर्नाटक में नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बढ़ गया है। BJP ने इस अवसर को राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अगले कुछ दिन कर्नाटक की सत्ता राजनीति की दिशा तय करेंगे।