सिद्दारमैया के इस्तीफे की घोषणा पर भावुक हुई पूरी कर्नाटक कैबिनेट, मंत्री तिम्मापुर ने बताया बैठक का माहौल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के आबकारी मंत्री आर.बी. तिम्मापुर ने 28 मई 2026 को बताया कि जब मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने नाश्ते की बैठक में अपने इस्तीफे की घोषणा की, तो पूरा मंत्रिमंडल भावुक हो उठा। बेंगलुरु में हुई इस बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए तिम्मापुर ने कहा कि कई मंत्री खुद को संभाल नहीं पाए और रो पड़े।
बैठक का माहौल
तिम्मापुर के अनुसार, जैसे ही सिद्दारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान किया, बैठक कक्ष में पूरी तरह सन्नाटा छा गया। उन्होंने कहा, 'कैबिनेट के सभी सदस्य भावुक हो गए। मेरे समेत कई मंत्री उनकी घोषणा के बाद रो पड़े।' मंत्रियों को परेशान देखकर स्वयं सिद्दारमैया भी भावुक हो गए।
इस्तीफे की वजह और कांग्रेस आलाकमान का फैसला
तिम्मापुर ने बताया कि सिद्दारमैया ने कैबिनेट को सूचित किया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) नेतृत्व ने उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'सिद्दारमैया ने यह भी बताया कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से वादा किया था कि जब भी पार्टी कहेगी, वे इस्तीफा दे देंगे — और अब वे अपना वादा निभा रहे हैं।' बैठक में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने का मुद्दा नहीं उठाया गया।
शिवकुमार का आश्वासन और पार्टी की एकता
तिम्मापुर ने बताया कि बैठक के दौरान डी.के. शिवकुमार ने सिद्दारमैया को आश्वासन दिया कि वे उनके मार्गदर्शन के अनुसार काम करेंगे और उनका समर्थन एवं सलाह लेते रहेंगे। सिद्दारमैया ने सभी मंत्रियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और पार्टी की भविष्य की दिशा, विचारधारा तथा लोकतंत्र को मजबूत करने की ज़रूरत पर भी विस्तार से बात की।
सिद्दारमैया की राजनीतिक विरासत
तिम्मापुर ने सिद्दारमैया को स्वर्गीय डी. देवराज उर्स के बाद कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सेवारत मुख्यमंत्री के रूप में याद करते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, 'उनमें हमेशा उन ताकतों से लड़ने का दृढ़ संकल्प रहा है जो लोगों को न्याय और कल्याण पहुँचाने में बाधा बनती हैं।' आंतरिक आरक्षण जैसे जटिल मुद्दों पर सिद्दारमैया की भूमिका की भी उन्होंने तारीफ की।
तिम्मापुर का व्यक्तिगत आभार
दलित समुदाय से आने वाले तिम्मापुर ने अपने राजनीतिक करियर का श्रेय सिद्दारमैया को दिया। उन्होंने कहा, 'मैं तीन बार चुनाव हारा और राजनीतिक रूप से किनारे कर दिया गया। जब मुझे लगा कि करियर खत्म हो गया, तब सिद्दारमैया ने मुझे एमएलसी बनाया और बाद में कैबिनेट में शामिल किया।' उन्होंने पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावी जीत के उदाहरणों का भी उल्लेख किया और देश में लोकतंत्र के भविष्य को लेकर सिद्दारमैया की चिंताओं को साझा किया। कर्नाटक में सत्ता का यह परिवर्तन आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।