राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर राजद सांसद मनोज झा का तंज: 'गाना बनाने वाले महापुरुष अब कहाँ हैं?'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने मंगलवार, 14 जुलाई को पटना में पत्रकारों से बातचीत में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी और उन नेताओं पर निशाना साधा जो इस विवाद पर अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर को लेकर गाने तक बनाए थे, वे अब इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोल रहे।
राम मंदिर मामले पर तंज
मनोज झा ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की इस वारदात को एक संगठित गिरोह ने अंजाम दिया है और इन लोगों ने मंदिर का 'बेजा इस्तेमाल' किया है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'मैं उन महापुरुषों को ढूंढ रहा हूं जिनकी जुबां से अब तक एक लफ्ज नहीं निकला — वही लोग जिन्होंने राम मंदिर को लेकर बाकायदा गाना तक बनाया था। आखिर ये लोग कहाँ छुप गए हैं।' राजद सांसद का यह बयान स्पष्ट रूप से उन राजनीतिक दलों और नेताओं पर कटाक्ष था जो मंदिर निर्माण के समय मुखर थे, लेकिन चढ़ावा चोरी के मामले में मौन हैं।
सोशल मीडिया एसओपी पर समर्थन
झा ने केंद्र सरकार के उस निर्देश का स्वागत किया जिसमें सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह कदम न केवल उचित है, बल्कि आवश्यक भी है। चाइल्ड एब्यूज के मामलों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि इससे पहले वे स्वयं सहित 20 से अधिक सांसदों ने इस मुद्दे को संसद में उठाया था, और सरकार की ओर से ठोस कदम उठाने का आश्वासन भी मिला था। उनके अनुसार, यदि सोशल मीडिया के लिए एक ठोस एसओपी अभी नहीं बनाई गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है।
अमेरिका-ईरान तनाव पर प्रतिक्रिया
अमेरिका और ईरान के बीच बनी युद्ध जैसी स्थिति पर राजद सांसद ने कहा कि इस पूरे मामले में अमेरिका का रवैया निराशाजनक रहा है। उनके अनुसार, 'नई दुनिया को गढ़ने की दिशा में अमेरिका का रवैया एक माफिया की तरह बनता जा रहा है।' उन्होंने गाजा की स्थिति और अमेरिका तथा इज़राइल द्वारा बच्चियों के स्कूल को बम से उड़ाने की घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि इन सभी मुद्दों को अलग-अलग नज़रिए से देखने की ज़रूरत नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र की कार्यशैली पर सवाल
झा ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की कार्यशैली पर भी निराशा व्यक्त की। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए या तो यूएन को बंद कर देना चाहिए, अथवा विभिन्न देशों को उसे पर्याप्त शक्ति प्रदान करनी चाहिए ताकि वह गलत को गलत कहने में सक्षम हो सके। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर यूएन की प्रभावशीलता पर बहस तेज़ हो रही है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला हाल के हफ्तों में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है। मनोज झा का यह बयान विपक्षी दलों की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें सत्तारूढ़ खेमे को मंदिर प्रबंधन में कथित लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर और बहस होने की संभावना है।