राम मंदिर चोरी पर सांसद चंद्रशेखर आजाद का सवाल — 'भगवान के दर पर लूट, तो सुरक्षित कहाँ हैं हम?'
सारांश
मुख्य बातें
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 28 जून 2026 को हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। नगीना लोकसभा क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) से निर्वाचित सांसद ने कहा कि जब मंदिर जैसी पवित्र जगह भी असुरक्षित हो जाए, तो समाज में सच्चाई और सुरक्षा का भरोसा कहाँ बचता है।
मंदिर चोरी पर सांसद का सवाल
चंद्रशेखर आजाद ने हरिद्वार में पत्रकारों से कहा, 'जहाँ लोग चोरी करने से भी नहीं डरते, वहाँ सच्चाई कहाँ है? अगर भगवान के दर पर लूटपाट और चोरी हो रही है, तो आप ही बताइए — सबसे सुरक्षित जगह कौन सी है?' उन्होंने यह भी कहा कि अगर मंदिर में डकैती हो सकती है, तो कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
पुलिस ने रोका, समर्थकों ने जताया विरोध
इसी दौरान, उत्तराखंड के टिहरी जिले में एक दलित युवक की हत्या के बाद पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सांसद चंद्रशेखर आजाद को हरिद्वार में पुलिस ने रोक लिया। सांसद के समर्थकों का दावा है कि पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोका, हालाँकि पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं था।
आजाद ने इस पर कहा, 'परिवार ने हमें अपनी आवाज़ बनने के लिए बुलाया है और हम शांतिपूर्वक मिलने जा रहे थे। इस देश में सभी को संवैधानिक तरीके से विरोध जताने का अधिकार है। डर का यह माहौल खत्म होना चाहिए।'
केतन लाल हत्याकांड — जातीय हिंसा का आरोप
सांसद ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में टिहरी जिले के लंबगांव थाना क्षेत्र के देवल गाँव में 18 वर्षीय दलित युवक केतन लाल की हत्या को 'जातीय घृणा से प्रेरित' बताया। परिजनों के अनुसार, केतन को कथित तौर पर प्रेम संबंध के कारण सुनियोजित ढंग से बुलाया गया, बंधक बनाया गया और पूरी रात लाठी-डंडों तथा बेल्ट से बेरहमी से पीटा गया — उसकी प्रेमिका के सामने। अंततः उसकी मृत्यु हो गई।
आरोपियों ने कथित तौर पर स्वयं परिजनों को फोन कर धमकी भरे लहजे में कहा, 'अपने बेटे को यहाँ से उठाकर ले जाओ।' आजाद ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह घटना 'केवल एक हत्या नहीं, बल्कि संविधान, समानता और मानवता की हत्या है।'
जातिवादी मानसिकता पर चेतावनी
सांसद ने आगे लिखा कि यदि किसी दलित युवक को केवल इसलिए मार दिया जाता है क्योंकि उसने तथाकथित सवर्ण जाति की लड़की से प्रेम करने का साहस किया, तो यह साबित करता है कि जातिवादी मानसिकता समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
आगे क्या
केतन लाल हत्याकांड में अब तक हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है। सांसद चंद्रशेखर आजाद के इस मामले में सक्रिय होने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है और दलित अधिकार संगठनों ने न्याय की माँग तेज़ कर दी है।