15 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: संजय निषाद बोले — दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, विपक्ष की बयानबाजी से जनता नहीं भटकेगी

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: संजय निषाद बोले — दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, विपक्ष की बयानबाजी से जनता नहीं भटकेगी

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विपक्ष के हमलों के बीच संजय निषाद ने सरकार का बचाव करते हुए SIT जांच पर भरोसा जताया और सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए एक समान वित्तीय पारदर्शिता कानून की माँग रखी — यह बयान मामले को मंदिर से आगे व्यापक नीतिगत बहस की ओर ले जाता है।

मुख्य बातें

संजय निषाद ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विपक्ष के आरोपों को 15 जुलाई 2026 को निराधार बताया।
SIT की दूसरी रिपोर्ट आने से पहले किसी भी टिप्पणी को उन्होंने अनुचित करार दिया।
माँग की कि वक्फ बोर्ड, चर्च, गुरुद्वारों सहित सभी धार्मिक संस्थाओं की आय-व्यय जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक हो।
KGMU के 18 हॉस्टलों में नॉन-वेज प्रतिबंध के फैसले का समर्थन किया।
ज्ञानवापी सहित विवादित धार्मिक स्थलों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया से समाधान पर जोर दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने 15 जुलाई 2026 को राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार करार देते हुए स्पष्ट किया कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल बयानबाजी, पोस्टरबाजी और प्रेस कॉन्फ्रेंस की राजनीति तक सीमित है, जिसकी वजह से जनता ने उसे सत्ता से दूर रखा है।

मुख्य बयान और तर्क

संजय निषाद ने एक सटीक उपमा देते हुए कहा — 'यदि किसी महल में चोरी होती है तो सजा चोर को मिलती है, महल बनाने वाले या वहाँ रहने वालों को नहीं।' उनके अनुसार राम मंदिर से जुड़े इस मामले में भी जांच पूरी होने के बाद केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी — मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों या करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई सवाल नहीं उठाया जाएगा।

योगी सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। निषाद ने कहा कि देश संविधान के अनुसार चलता है और अपराध की गंभीरता के अनुरूप ही दंड का प्रावधान होगा।

SIT जांच पर रुख

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की दूसरी रिपोर्ट को लेकर चल रही अटकलों पर संजय निषाद ने कहा कि जांच एक संवैधानिक और गोपनीय प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने से पहले अनुमान लगाना उचित नहीं है — पहले जांच पूरी होती है, फिर विश्लेषण होता है और उसके बाद सरकार तथा प्रशासन आवश्यक निर्णय लेते हैं। आवश्यकता पड़ने पर रिपोर्ट अदालत और जनता के सामने रखी जाएगी।

धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता की माँग

संजय निषाद ने इस मामले को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि जनता के धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उन्होंने माँग की कि केवल मंदिर ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि वक्फ बोर्ड, चर्च, गुरुद्वारों और सभी धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन के लिए एक समान और सख्त कानून बनाया जाए। उनका सुझाव था कि सभी धार्मिक संस्थानों की आय-व्यय की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जानी चाहिए।

ज्ञानवापी और अन्य विवादित स्थल

ज्ञानवापी मामले पर निषाद ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं को भी इसमें पहल करनी चाहिए, क्योंकि 'यदुवंशी' खुद को भगवान कृष्ण के वंशज मानते हैं और कृष्ण मंदिर से जुड़े मामले में उन्हें सबसे आगे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहाँ भी मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाए जाने के दावे को लेकर विवाद है, वहाँ न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए — ठीक उसी तरह जैसे राम मंदिर मामले में अदालत के फैसले का सम्मान किया गया।

KGMU में नॉन-वेज प्रतिबंध पर समर्थन

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के सभी 18 हॉस्टलों में नॉन-वेज भोजन पर रोक लगाने के फैसले का समर्थन करते हुए संजय निषाद ने कहा कि शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल, वसा और पानी जैसे सभी पोषक तत्व संतुलित शाकाहारी भोजन से प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में मांसाहार को कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है, हालांकि उन्होंने किसी विशेष अध्ययन का हवाला नहीं दिया। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब देशभर में शैक्षणिक संस्थानों में खानपान नीतियों को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका जवाब न बयान में था, न सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट है। सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए समान पारदर्शिता कानून की माँग सैद्धांतिक रूप से सराहनीय है, लेकिन यह माँग उस सरकार की ओर से आ रही है जिसने वक्फ बोर्ड सुधार पर वर्षों विधायी ऊर्जा खर्च की — विरोधाभास स्पष्ट है। KGMU नॉन-वेज प्रतिबंध पर उनका समर्थन वैज्ञानिक आधार के बजाय सांस्कृतिक प्राथमिकता पर टिका दिखता है, जो चिकित्सा शिक्षण संस्थान की नीति के लिए एक कमज़ोर तर्क है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
यह मामला अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन की कथित चोरी से जुड़ा है, जिसकी जांच के लिए SIT गठित की गई है। SIT अपनी दूसरी रिपोर्ट तैयार कर रही है और मामले में अभी तक दोषियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
संजय निषाद ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष इस मामले में केवल बयानबाजी, पोस्टरबाजी और प्रेस कॉन्फ्रेंस की राजनीति कर रहा है और आरोप बेबुनियाद हैं। उनके अनुसार जनता इन आरोपों से गुमराह नहीं होगी।
SIT की दूसरी रिपोर्ट कब आएगी?
संजय निषाद ने कहा कि जांच एक गोपनीय प्रक्रिया है और रिपोर्ट आने से पहले अटकलें लगाना उचित नहीं है। रिपोर्ट की समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
KGMU में नॉन-वेज प्रतिबंध पर संजय निषाद का क्या कहना है?
संजय निषाद ने लखनऊ के KGMU के 18 हॉस्टलों में नॉन-वेज प्रतिबंध का समर्थन किया और कहा कि शरीर के लिए ज़रूरी सभी पोषक तत्व संतुलित शाकाहारी भोजन से मिल सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ अध्ययनों में मांसाहार को स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है।
धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता को लेकर निषाद ने क्या माँग की?
संजय निषाद ने माँग की कि मंदिर ट्रस्ट के साथ-साथ वक्फ बोर्ड, चर्च और गुरुद्वारों सहित सभी धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन के लिए एक समान कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी की आय-व्यय की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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