वाराणसी लिंक कॉरिडोर को कैबिनेट की मंजूरी: 43 किमी, ₹10,998 करोड़ की परियोजना से घटेगी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ₹10,998.32 करोड़ की लागत से 43.218 किलोमीटर लंबे लिंक कॉरिडोर के निर्माण को हरी झंडी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले के तहत वरुणा नदी के किनारे एनएच-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाला यह एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह परियोजना वाराणसी की पुरानी और गंभीर यातायात समस्या के समाधान की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा अवसंरचना कदम है।
परियोजना की मुख्य संरचना
कैबिनेट के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कॉरिडोर का अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड होगा, जिसमें 6/4-लेन का मुख्य कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड शामिल होंगे। परियोजना को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत पूरा करेगी। कुल निवेश में ₹4,565.33 करोड़ की सिविल निर्माण लागत और ₹934.91 करोड़ की भूमि अधिग्रहण लागत शामिल है। कॉरिडोर को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के लिए डिज़ाइन किया गया है।
कनेक्टिविटी और यात्रा समय पर असर
यह कॉरिडोर एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करेगा। इससे यात्रा का समय लगभग 40 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा। इसके दायरे में वाराणसी एयरपोर्ट, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर पोर्ट, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रसिद्ध घाट और निकटवर्ती चंदौली क्षेत्र तक पहुँच बेहतर होगी। गौरतलब है कि वाराणसी देश के सबसे अधिक पर्यटन-भार वाले शहरों में से एक है, जहाँ धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के चलते यातायात दबाव साल-भर बना रहता है।
आर्थिक और लॉजिस्टिक्स लाभ
परियोजना पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन को मज़बूत करेगी। यह एक इकोनॉमिक नोड (चंदौली सोशल इकोनॉमिक ज़ोन), एक सोशल नोड (चंदौली) और छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स तक पहुँच सुगम बनाएगी। कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और खनिजों की आवाजाही तेज़ होगी, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास को दीर्घकालिक गति मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वांचल क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स लागत राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है।
आगे की राह
NHAI इस परियोजना को HAM मॉडल के तहत क्रियान्वित करेगी, जिसमें सरकार और निजी ठेकेदार के बीच निर्माण लागत साझा होती है। परियोजना के पूरा होने पर वाराणसी को एक आधुनिक, एक्सेस-कंट्रोल्ड शहरी परिवहन नेटवर्क मिलेगा, जो न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के अनुभव को भी बेहतर बनाएगा।