बिहार में खगड़िया-पूर्णिया NH-31 व NH-231 का 4-लेन अपग्रेड मंज़ूर, ₹3,936 करोड़ की मंज़ूरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने बुधवार, 3 जून को बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को 4-लेन मानक में अपग्रेड करने को मंज़ूरी दे दी, जिसकी कुल लंबाई 143.529 किलोमीटर और अनुमानित लागत ₹3,936.05 करोड़ है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने बीओटी (टोल) मोड पर हरी झंडी दी। साथ ही, समिति ने ओडिशा में ₹8,300.79 करोड़ की लागत वाले नए तटीय राजमार्ग को भी मंज़ूरी दी है।
परियोजना का स्वरूप
सरकारी बयान के अनुसार, इस परियोजना के तहत पूर्णिया शहर के लिए 6.729 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास भी विकसित किया जाएगा। उन्नत कॉरिडोर से औसत यात्रा गति बढ़ने और यात्रा समय में लगभग दो घंटे की कटौती होने की उम्मीद है, साथ ही सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार का दावा किया गया है।
किन ज़िलों को मिलेगा फ़ायदा
प्रस्तावित अपग्रेड से खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया ज़िलों के शहरी क्षेत्रों में मौजूद गंभीर भौगोलिक खामियों, तीखे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या के समाधान का दावा किया गया है। यह कॉरिडोर बिहार के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ेगा।
गति-शक्ति से जुड़ाव
सरकार के मुताबिक यह कॉरिडोर 5 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों — 1 टेक्सटाइल क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, और 2 मत्स्य व समुद्री खाद्य पार्क — तथा 11 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (4 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 1 हवाई अड्डा और राष्ट्रीय राजमार्गों) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा। इससे माल और यात्रियों की आवाजाही तेज़ होने की संभावना जताई गई है।
ओडिशा में तटीय राजमार्ग को भी मंज़ूरी
समिति ने ओडिशा में रामेश्वर से पारादीप तक हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत नए तटीय राजमार्ग के निर्माण को दो पैकेज में मंज़ूरी दी है। इस राजमार्ग की कुल लंबाई 160.18 किलोमीटर और कुल लागत ₹8,300.79 करोड़ होगी। यह खंड खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर ज़िलों से होकर गुज़रेगा, जिससे रामेश्वर–पारादीप के बीच यात्रा समय 2 घंटे 30 मिनट कम होने की उम्मीद है।
आगे क्या
परियोजना का क्रियान्वयन BOT (टोल) ढाँचे में होगा, और निविदा व काम शुरू होने की समय-सीमा का विस्तृत ब्यौरा संबंधित मंत्रालय द्वारा अलग से जारी किए जाने की संभावना है। पूर्वोत्तर बिहार के लिए यह कॉरिडोर सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।