कानपुर-कबराई ग्रीनफील्ड राजमार्ग को कैबिनेट की मंजूरी, ₹7,145 करोड़ में बनेगा 117.7 किमी लंबा 4-लेन कॉरिडोर
सारांश
मुख्य बातें
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 1 जुलाई 2026 को कानपुर और कबराई के बीच 117.7 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को औपचारिक मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय के तहत परियोजना पर ₹7,145.14 करोड़ खर्च होंगे। यह गलियारा भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे का एक अहम हिस्सा है और राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के तहत क्रियान्वित किया जाएगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर होगा, जिसमें भविष्य में छह लेन तक विस्तार की व्यवस्था पहले से ही शामिल की गई है। परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा बीओटी (टोल) मोड पर कार्यान्वित किया जाएगा। इसके साथ ही एनएच-34 के मौजूदा कानपुर-कबराई खंड का संचालन और रखरखाव भी इसी परियोजना के अंतर्गत होगा।
कॉरिडोर को 80 से 100 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे कानपुर और कबराई के बीच यात्रा का समय 3.5 घंटे से घटकर मात्र 1.5 घंटे रह जाएगा — यानी 58 प्रतिशत की कमी। वाहन परिचालन लागत में कमी और सड़क सुरक्षा में सुधार भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं।
आर्थिक और औद्योगिक महत्व
कैबिनेट के बयान के अनुसार, यह परियोजना उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज-समृद्ध, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ेगी। कबराई खनन क्षेत्र तक बेहतर संपर्क से खनिजों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की आवाजाही सुगम होगी।
यह कॉरिडोर एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और राज्य राजमार्ग एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी तथा एसएच-42 से रणनीतिक संपर्क प्रदान करेगा। गौरतलब है कि यह पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप है और 16 आर्थिक नोड से कनेक्टिविटी को मज़बूत करेगा, जिनमें उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर, भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप और बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड शामिल हैं।
सामाजिक और लॉजिस्टिक नोड से जुड़ाव
परियोजना 9 सामाजिक नोड से भी जुड़ेगी — इनमें फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर और महोबा पर्यटक स्थल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 10 लॉजिस्टिक नोड — जिनमें कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरवा सुमेरपुर और बांदा रेलवे स्टेशन, तथा कानपुर, चकेरी और खजुराहो हवाई अड्डे शामिल हैं — से संपर्क मज़बूत होगा।
रोजगार और यातायात अनुमान
सरकारी बयान के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2028 तक इस मार्ग पर वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी) लगभग 18,069 यात्री कार इकाइयों (पीसीयू) तक पहुँचने का अनुमान है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।