16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वाराणसी में ₹10,998 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर मंजूर, बाबा विश्वनाथ दर्शन होगा आसान: PM मोदी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वाराणसी में ₹10,998 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर मंजूर, बाबा विश्वनाथ दर्शन होगा आसान: PM मोदी

सारांश

वाराणसी की भीड़भाड़ से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने ₹10,998 करोड़ की लागत से 43 किमी से अधिक लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को हरी झंडी दी है। NH-31 से रिंग रोड तक यह लिंक यात्रा समय आधा करेगा और बाबा विश्वनाथ के दर्शन को करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सुलभ बनाएगा।

मुख्य बातें

CCEA ने 15 जुलाई 2026 को वाराणसी में 43.218 किमी लंबे एलिवेटेड लिंक कॉरिडोर को ₹10,998.32 करोड़ की लागत से मंजूरी दी।
परियोजना NHAI हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत क्रियान्वित होगी; सिविल निर्माण लागत ₹4,565.33 करोड़ ।
NH-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा समय 40 मिनट से घटकर 20 मिनट — लगभग 50% की कमी।
कॉरिडोर वाराणसी हवाई अड्डा , वाराणसी जंक्शन , दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन , रामनगर पोर्ट और प्रमुख घाटों को जोड़ेगा।
पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत 6 लॉजिस्टिक्स नोड और चंदौली आर्थिक क्षेत्र तक बेहतर पहुँच।
PM मोदी ने एक्स पर कहा — बाबा विश्वनाथ के दर्शन को और सुगम बनाने के लिए सरकार कृतसंकल्प है।

केंद्र सरकार ने 15 जुलाई 2026 को वाराणसी की यातायात समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने वरुणा नदी के किनारे एनएच-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 43.218 किमी लंबे लिंक/कनेक्टर कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी। इस परियोजना की कुल पूंजीगत लागत ₹10,998.32 करोड़ है और इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत क्रियान्वित करेगा।

परियोजना की संरचना और लागत

यह कॉरिडोर मुख्यतः 6/4-लेन का एलिवेटेड ढाँचा होगा, जिसमें मेन कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड शामिल हैं। कुल लागत में ₹4,565.33 करोड़ सिविल निर्माण पर और ₹934.91 करोड़ भूमि अधिग्रहण पर खर्च होंगे। परियोजना को 80–100 किमी/घंटे की प्रचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया है।

गौरतलब है कि यह वाराणसी डीकंजेशन प्लान का एक अहम हिस्सा है, जो एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा का समय लगभग 40 मिनट से घटाकर 20 मिनट कर देगा — यानी लगभग 50 प्रतिशत की कमी।

कनेक्टिविटी का दायरा

यह कॉरिडोर वाराणसी हवाई अड्डा, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर पोर्ट, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रमुख घाटों और चंदौली क्षेत्र तक पहुँच को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बनाएगा। इससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को बाबा विश्वनाथ मंदिर तक पहुँचना सुगम होगा।

PM मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन को और अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनाने के लिए हम कृतसंकल्प हैं।' उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट सांस्कृतिक महत्त्व के शहरों के लिए एक मॉडल बनेगा और यहाँ के लोगों का जीवन आसान करेगा।

आर्थिक और लॉजिस्टिक्स प्रभाव

यह परियोजना पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देगी। एक इकोनॉमिक नोड (चंदौली सोशल इकोनॉमिक जोन), एक सोशल नोड (चंदौली) और छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड तक पहुँच बेहतर होगी। इससे कृषि उत्पादों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्री और खनिज अवयवों की आवाजाही सुगम होगी, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के सतत आर्थिक विकास में सहायक होगी।

शहर के रोड नेटवर्क पर भीड़ में अत्यधिक कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और वाहन परिचालन व्यय में कटौती इस परियोजना के अतिरिक्त लाभ होंगे। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर वाराणसी को एक आधुनिक, एक्सेस-कंट्रोल्ड शहरी परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक राजनीतिक और धार्मिक संदेश भी है — PM मोदी के संसदीय क्षेत्र में ₹10,998 करोड़ का निवेश यह दर्शाता है कि काशी उनके विकास-एजेंडे में केंद्र में है। हालाँकि, यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई बड़े NHAI एलिवेटेड प्रोजेक्ट लागत-वृद्धि और भूमि अधिग्रहण विवादों में फँसे हैं। HAM मॉडल निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, लेकिन क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता ही असली कसौटी होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर शुरू हुई यह परियोजना यदि समयसीमा और बजट में पूरी हो, तो यह भारत के धार्मिक पर्यटन शहरों के लिए एक वास्तविक मॉडल बन सकती है — अन्यथा यह वाराणसी की लंबित परियोजनाओं की सूची में एक और नाम बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना क्या है?
यह वरुणा नदी के किनारे NH-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाला 43.218 किमी लंबा 6/4-लेन एलिवेटेड लिंक कॉरिडोर है, जिसे CCEA ने 15 जुलाई 2026 को ₹10,998.32 करोड़ की लागत से मंजूरी दी। इसे NHAI हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत क्रियान्वित किया जाएगा।
इस कॉरिडोर से वाराणसी में यात्रा समय कितना कम होगा?
NH-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा का समय लगभग 40 मिनट से घटकर 20 मिनट हो जाएगा, यानी करीब 50 प्रतिशत की कमी। कॉरिडोर को 80–100 किमी/घंटे की प्रचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया है।
बाबा विश्वनाथ दर्शन के लिए यह परियोजना कैसे मददगार होगी?
यह कॉरिडोर वाराणसी हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशनों और प्रमुख घाटों को सीधे जोड़ेगा, जिससे देशभर से आने वाले तीर्थयात्रियों को बाबा विश्वनाथ मंदिर तक पहुँचना अधिक सुगम और तेज़ होगा। शहर की भीड़भाड़ में उल्लेखनीय कमी से दर्शन का अनुभव भी बेहतर होगा।
इस परियोजना से आर्थिक और लॉजिस्टिक्स लाभ क्या होंगे?
परियोजना पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड और चंदौली सोशल इकोनॉमिक जोन तक पहुँच बेहतर करेगी। इससे कृषि उत्पादों, औद्योगिक वस्तुओं और खनिज अवयवों की आवाजाही सुगम होगी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
इस परियोजना में HAM मॉडल क्यों अपनाया गया है?
हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) में सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर लागत वहन करते हैं, जिससे निजी निवेश को आकर्षित करते हुए परियोजना जोखिम साझा होता है। NHAI इस मॉडल के तहत ₹10,998.32 करोड़ की इस परियोजना को क्रियान्वित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 7 घंटे पहले
  4. 8 घंटे पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले