काशी को मिला ₹14,447 करोड़ का गंगा तटीय 6-लेन कॉरिडोर, यात्रा समय 60 से घटकर 20 मिनट होगा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 15 जुलाई 2026 को वाराणसी में गंगा नदी के तट पर 46.039 किलोमीटर लंबे अत्याधुनिक 6-लेन कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। ₹14,447.64 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) और वाराणसी रिंग रोड को आपस में जोड़ेगी और पूर्वांचल के आर्थिक विकास को नई दिशा देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निर्णय को काशी के लिए ऐतिहासिक बुनियादी ढाँचा कदम बताया है।
परियोजना में क्या-क्या शामिल है
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस परियोजना को स्वीकृति दी गई। इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 6-लेन एलिवेटेड मुख्य मार्ग, एक प्रतिष्ठित केबल-स्टे ब्रिज, एक्स्ट्राडोज्ड फुटओवर ब्रिज-सह-प्रमुख पुल, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। इस मार्ग को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के अनुसार डिज़ाइन किया जाएगा।
यात्रियों को कितनी राहत मिलेगी
सरकारी अनुमान के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद इस क्षेत्र में औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा — यानी तीन गुना तेज़ आवागमन। इसके अलावा NH-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुँचने में लगने वाला समय 50 मिनट से घटकर 25 मिनट होने का अनुमान है। यह कॉरिडोर शहर के धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुँच को भी सुगम बनाएगा।
पीएम मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "हम काशी में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी दिशा में आज गंगा के किनारे अत्याधुनिक छह-लेन कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना पूर्वांचल के आर्थिक विकास को नई गति देगी और सड़क नेटवर्क पर यातायात का दबाव कम करेगी।
पूर्वांचल के विकास पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब वाराणसी पहले से ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और बनारस-प्रयागराज एक्सप्रेसवे जैसे बड़े बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट्स के बाद तेज़ी से विकास की राह पर है। गौरतलब है कि वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यहाँ केंद्र सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर निवेश का यह क्रम जारी है। नया कॉरिडोर NH-19 और रिंग रोड के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करेगा, जिससे शहर के भीतर और बाहर दोनों ओर की आवाजाही सुधरेगी।
आगे क्या होगा
परियोजना को HAM मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित किया जाएगा। निर्माण की समयसीमा और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विवरण जल्द जारी होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर के पूरा होने पर वाराणसी की शहरी गतिशीलता और पर्यटन क्षमता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आने की संभावना है।