वाराणसी गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर को कैबिनेट की मंजूरी: ₹14,447 करोड़ की परियोजना, यात्रा समय 67% घटेगा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने 15 जुलाई 2026 को वाराणसी में गंगा नदी के किनारे ₹14,447.64 करोड़ की लागत से 6-लेन एलिवेटेड लिंक कॉरिडोर के निर्माण को स्वीकृति दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) और वाराणसी रिंग रोड को आपस में जोड़ेगा, जिससे शहर में ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
करीब 46.039 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 6-लेन एलिवेटेड मुख्य मार्ग, गंगा नदी पर 910 मीटर लंबा आइकॉनिक केबल-स्टे ब्रिज, 1.32 किलोमीटर लंबा एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-सह-प्रमुख पुल (जिसमें ट्रैवलेटर की सुविधा होगी), लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड शामिल होंगे। इसे 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के लिए डिज़ाइन किया गया है।
परियोजना की कुल लागत में से ₹6,037.85 करोड़ सिविल निर्माण कार्य पर और ₹541.11 करोड़ भूमि अधिग्रहण पर व्यय होंगे। निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत किया जाएगा।
यात्रा समय पर असर
सरकार के अनुसार, इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद परियोजना क्षेत्र में औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा — यानी करीब 67 प्रतिशत की कमी। इसके अलावा, एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में लगने वाला समय 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो जाएगा।
गौरतलब है कि वाराणसी में हर वर्ष 15 करोड़ से अधिक पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं, जिससे शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव अत्यधिक बना रहता है। यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब काशी विश्वनाथ धाम के विस्तार के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आर्थिक लाभ
यह परियोजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई है। इसके जरिए लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, काशी रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और रामनगर आईडब्ल्यूएआई पोर्ट सहित छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ा जाएगा।
इसके साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों तक पहुंच भी पहले से अधिक सुगम हो जाएगी। चंदौली एसईजेड जैसे आर्थिक केंद्र और चंदौली आकांक्षी जिले को भी इस कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
इंजीनियरिंग और वास्तुशिल्प विशेषताएं
बीएचयू/लंका से सामने घाट तक एक एलिवेटेड स्पर (शाखा मार्ग) भी बनाया जाएगा, जिससे अत्यधिक व्यस्त लंका चौराहे पर जाम में राहत मिलेगी। परियोजना में आपातकालीन पार्किंग बे, शोर अवरोधक (नॉइज़ बैरियर), आकर्षक फसाड लाइटिंग और वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित वास्तुशिल्प डिज़ाइन भी शामिल होंगे।
मौजूदा और प्रस्तावित मालवीय ब्रिज के ऊपर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण भी इस परियोजना का हिस्सा है। ये सभी विशेषताएं परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ वाराणसी के शहरी परिदृश्य को भी नया आयाम देंगी।
आगे की राह
सरकार के अनुसार, यह कॉरिडोर वाराणसी और चंदौली के सड़क नेटवर्क को जाम से मुक्त करने के व्यापक उद्देश्य से तैयार किया गया है। परियोजना से वाहनों की परिचालन लागत और प्रदूषण में कमी आने, माल परिवहन अधिक कुशल होने और पूर्वी उत्तर प्रदेश के समग्र आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।