गंगा एक्सप्रेसवे से महाभारत, जैन और संभल सर्किट को मिली नई रफ्तार; मेरठ-प्रयागराज सफर अब 5-6 घंटे में
सारांश
Key Takeaways
- गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई 594 किलोमीटर, लागत ₹36,230 करोड़; मेरठ से प्रयागराज तक छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्ग।
- मेरठ-प्रयागराज यात्रा समय 10-12 घंटे से घटकर 5-6 घंटे होने की उम्मीद।
- महाभारत सर्किट, जैन सर्किट और संभल के 'कल्कि धाम' तक पहुँच सुगम होगी।
- हस्तिनापुर में ₹15 करोड़ से अधिक की एकीकृत पर्यटन विकास परियोजना पहले से जारी।
- मार्ग हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ से होकर गुज़रता है।
- पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इसे इको-टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ उत्तर प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरण पर्यटन को एक साथ नई ऊर्जा मिली है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे महाभारत सर्किट, जैन सर्किट और संभल के 'कल्कि धाम' तक पहुँच को सुगम बनाता है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक सपने की मूर्त अभिव्यक्ति है।
एक्सप्रेसवे की मुख्य विशेषताएँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साकार हुए इस विश्वस्तरीय कॉरिडोर की लागत ₹36,230 करोड़ है। यह छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, जो पश्चिम, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को तेज़ रफ्तार संपर्क से जोड़ता है। मेरठ से प्रयागराज का सफर, जो पहले 10-12 घंटे लेता था, अब 5-6 घंटे में पूरा हो सकेगा।
यह मार्ग मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज में समाप्त होता है। इससे दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
महाभारत और जैन सर्किट को नई पहचान
गंगा एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ पाने वाले क्षेत्रों में मेरठ जिले का हस्तिनापुर प्रमुख है। महाभारत काल से जुड़ा हस्तिनापुर जैन धर्म का भी एक प्रमुख तीर्थस्थल है। योगी सरकार यहाँ ₹15 करोड़ से अधिक की एकीकृत पर्यटन विकास परियोजना चला रही है।
इस परियोजना से पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, करण मंदिर, उल्टा खेड़ा उत्खनन स्थल और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थल नई पहचान पाएंगे। बागपत के लाक्षागृह जैसे ऐतिहासिक स्थलों का पर्यटन महत्व भी बढ़ेगा।
संभल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लाभ
संभल क्षेत्र को भी इस परियोजना से विशेष ऊर्जा मिलेगी। यहाँ विकसित हो रहे कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल और 'कल्कि धाम' तक पहुँच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा। हापुड़ के ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्रीरामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर को भी इस कॉरिडोर से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में धार्मिक और इको-टूरिज्म को गति
पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरदोई के वनेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम और प्रयागराज ब्लैकबक रिजर्व तक पहुँच आसान होने से पर्यावरण पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पर्यटन को रोज़गार और निवेश के प्रमुख स्रोत के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।
व्यापार, निवेश और रोज़गार पर असर
मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन सुगम होने से व्यापार, निवेश और रोज़गार के नए अवसर खुलेंगे। यह कॉरिडोर क्षेत्रीय विकास की रफ्तार को तेज़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। आने वाले वर्षों में इस एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होने की भी संभावना जताई जा रही है।