वाराणसी में गंगा पर बनेगा सिग्नेचर ब्रिज: 6 लेन सड़क और 4 लेन रेल मार्ग एक साथ
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में गंगा नदी पर एक अत्याधुनिक सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण की योजना को मूर्त रूप मिलना शुरू हो गया है। मदन मोहन मालवीय ब्रिज के समीप प्रस्तावित यह पुल दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज की तर्ज पर बनाया जाएगा और यह एक दोहरे उपयोग वाली संरचना होगी — ऊपर 6 लेन का सड़क मार्ग और नीचे 4 लेन का रेल मार्ग। रेल विकास निगम की ओर से इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
परियोजना का विवरण और स्वरूप
डिविजनल कमिश्नर एस. राजलिंगम ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह पुल पुराने डाक पुल से लेकर पड़ाव चौराहे तक की कार्ययोजना के तहत तैयार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एकीकृत संरचना में सड़क और रेल यातायात का एक साथ संचालन संभव होगा, जो इसे उत्तर भारत में अपनी तरह की विशिष्ट परियोजना बनाएगा।
गौरतलब है कि वाराणसी में गंगा पार करने के लिए फिलहाल सीमित विकल्प हैं और यातायात का दबाव मौजूदा पुलों पर लगातार बढ़ रहा है। यह परियोजना उस दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क को नया आयाम देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है।
पर्यटन और व्यापार पर अपेक्षित असर
वाराणसी देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर संपर्क व्यवस्था से पर्यटकों की आवाजाही सहज होगी और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा। यह पुल काशी को पूर्वांचल के अन्य जिलों से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी नरेंद्र सिंह ने इस परियोजना का स्वागत करते हुए कहा कि यह वाराणसी के लोगों के लिए एक बड़ी सौगात है। उनके अनुसार, सड़क और रेल दोनों के लिए एकीकृत व्यवस्था क्षेत्र के विकास को नई गति देगी और यात्रियों को रोज़मर्रा की परेशानियों से राहत मिलेगी।
एक अन्य स्थानीय नागरिक मनीष सिंह ने कहा कि रेलवे ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है और इससे न केवल वाराणसी बल्कि पूरे उत्तर भारत को लाभ मिलेगा। उनका कहना था कि क्षेत्रीय संपर्क मज़बूत होने से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
आगे क्या होगा
रेल विकास निगम द्वारा परियोजना पर काम शुरू हो जाने की पुष्टि के बाद अब निर्माण की समयसीमा और लागत का विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है। यह परियोजना वाराणसी को एक आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा बताई जा रही है, और इसके पूरा होने पर काशी का स्काईलाइन एक नई पहचान पाएगा।