रेल मंत्री वैष्णव ने दोहरीघाट-औड़िहार ट्रेन को झंडी दिखाई, जल्द वाराणसी तक होगा विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार, 11 मई को दोहरीघाट-औड़िहार यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस सेवा को जल्द ही वाराणसी तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में रेल संपर्क और यात्री सुविधाओं को नई मज़बूती मिलेगी। दैनिक यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों और तीर्थयात्रियों के लिए यह सेवा एक महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये कार्यक्रम को संबोधित किया और घोषणा की कि उत्तरी गंगा कॉरिडोर के माध्यम से पूर्वांचल से दिल्ली तक एक नई एक्सप्रेस ट्रेन भी जल्द शुरू की जाएगी। यह ट्रेन छपरा, बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद और आनंद विहार को जोड़ेगी — जो पूर्वांचल से राजधानी तक की लंबे समय से लंबित माँग का जवाब है।
ट्रेन की विशेषताएँ
दोहरीघाट-औड़िहार यात्री ट्रेन में कुल आठ कोच होंगे, जिन्हें इस मार्ग पर दैनिक यात्रियों और अन्य यात्रियों को आरामदायक एवं सुविधाजनक यात्रा प्रदान करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। वाराणसी तक विस्तार होने पर यह सेवा इस सांस्कृतिक और वाणिज्यिक केंद्र को सीधे जोड़ेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वैष्णव ने बताया कि इंदारा-दोहरीघाट मीटर गेज लाइन का निर्माण 1904 में हुआ था, यानी 100 वर्ष से भी अधिक पहले, लेकिन इसका गेज रूपांतरण लंबे समय तक लंबित रहा। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश भर में कई लंबित रेलवे परियोजनाओं — गेज रूपांतरण, दोहरीकरण और अधूरी परियोजनाएँ — को गति दी गई। इंदारा-दोहरीघाट लाइन को अंततः ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया गया, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में नई रेल सुविधाएँ उपलब्ध हुईं।
बजट और निवेश
मंत्री ने बताया कि 2014 में उत्तर प्रदेश के लिए रेलवे बजट आवंटन मात्र ₹1,109 करोड़ था, जो अब बढ़कर लगभग ₹20,012 करोड़ हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में राज्य भर में लगभग ₹1.2 लाख करोड़ की रेलवे परियोजनाएँ चल रही हैं — जो उत्तर प्रदेश के इतिहास में रेलवे विकास का अभूतपूर्व पैमाना है।
आगे की योजनाएँ
वैष्णव ने बताया कि गंगा के दक्षिण में प्रयागराज-कानपुर-आगरा-दिल्ली मार्ग पर एक प्रमुख चार-लाइन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में रेल संपर्क का एक नया युग शुरू होने की उम्मीद है।