16 जुलाई 2026
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गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, वाराणसी में BJP का जश्न

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गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, वाराणसी में BJP का जश्न

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने वाराणसी में गंगा नदी के किनारे छह लेन के गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है। ₹25,000 करोड़ की यह परियोजना रामनगर को काशी विश्वनाथ धाम से जोड़ेगी और शहर के यातायात, पर्यटन व व्यापार को नई दिशा देगी।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई 2026 को गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी।
यह छह लेन का अत्याधुनिक कॉरिडोर रामनगर को बीएचयू , हरहुआ और काशी विश्वनाथ धाम से जोड़ेगा।
मेयर अशोक कुमार तिवारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने काशी को ₹25,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात दी है।
परियोजना से शहर में यातायात जाम कम होगा और रामनगर में पर्यटन व रोज़गार के नए अवसर बनेंगे।
सिगरा स्थित गुलाब बाग BJP कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयाँ बाँटकर जश्न मनाया।

केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई 2026 को वाराणसी में गंगा नदी के किनारे प्रस्तावित छह लेन के गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को औपचारिक मंजूरी दे दी। इस घोषणा के बाद सिगरा स्थित गुलाब बाग भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयाँ बाँटकर उत्साह जताया। BJP नेताओं ने इस परियोजना को काशी के बुनियादी ढाँचे की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

परियोजना का स्वरूप और लक्ष्य

यह अत्याधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर गंगा के उस पार स्थित रामनगर क्षेत्र को बीएचयू, हरहुआ और शहर के अन्य प्रमुख मार्गों से जोड़ेगा। इसके तहत श्रद्धालु अपने वाहन नदी के उस पार पार्क कर पैदल काशी विश्वनाथ धाम तक पहुँच सकेंगे, जिससे शहर के भीतरी हिस्सों पर यातायात का दबाव उल्लेखनीय रूप से घटने की उम्मीद है। रोपवे जैसी अन्य आधुनिक परियोजनाओं के साथ मिलकर यह कॉरिडोर वाराणसी की कनेक्टिविटी को नया आयाम देगा।

नेताओं की प्रतिक्रिया

विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में काशी का अभूतपूर्व विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने कहा कि यह नया कॉरिडोर भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

वाराणसी के मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने काशी को लगभग ₹25,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात देकर शहर के भविष्य को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि गंगा-वरुणा कॉरिडोर और रोपवे जैसी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बड़ी संख्या में लोग गंगा के दूसरे छोर से शहर में प्रवेश करेंगे, जिससे जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी।

निर्मला सिंह पटेल ने इस परियोजना को ₹25,000 करोड़ की ऐतिहासिक सौगात बताते हुए कहा कि यह वाराणसी को देश के सबसे आधुनिक धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों में शामिल करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

आम नागरिकों और विशेषज्ञों की राय

काशी निवासी रूपश्री सेनगुप्ता ने कहा कि यह परियोजना शहर के लिए बड़ी सौगात है और इससे काशीवासियों को सुविधा मिलेगी तथा व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। सौरभ चटर्जी ने कहा कि इससे शहर तक पहुँचना आसान होगा और बड़े वाहनों की आवाजाही बेहतर तरीके से हो सकेगी। एडवोकेट विवेक सिंह ने कहा कि इससे दूरी और समय दोनों कम हो जाएँगे।

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रजनीकांत ने कहा कि यह परियोजना केवल काशी के लोगों तक सीमित नहीं है — काशी के विकास की गूंज पूरी दुनिया के कोने-कोने में सुनाई देती है।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर

वाराणसी की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार पर्यटन है। मेयर तिवारी के अनुसार, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, बनारसी साड़ी, स्थानीय बाज़ार और अन्य व्यापारिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलता है। रामनगर क्षेत्र में होटल, पेइंग गेस्ट हाउस और पर्यटन सुविधाओं के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

आगे की राह

यह परियोजना वाराणसी में पहले से चल रही काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, रोपवे और रिंग रोड जैसी अवसंरचना परियोजनाओं की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है। गौरतलब है कि 2014 के बाद से वाराणसी में बड़े पैमाने पर शहरी पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। कॉरिडोर के निर्माण की समयसीमा और विस्तृत तकनीकी ब्यौरा अभी सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹25,000 करोड़ के आँकड़े का संदर्भ स्पष्ट नहीं है — यह राशि केवल इस कॉरिडोर की है या समग्र काशी विकास पैकेज की, यह सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं बताया। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद यह दूसरी बड़ी परियोजना है जो पर्यटन-केंद्रित विकास मॉडल को आगे बढ़ाती है, पर शहर के पुराने बाशिंदों और छोटे व्यापारियों पर इसके विस्थापन-प्रभाव पर अभी तक कोई सार्वजनिक आकलन सामने नहीं आया है। जश्न की खबरें BJP के नज़रिए से प्रमुखता से आई हैं; विपक्ष या स्वतंत्र नागरिक समाज की प्रतिक्रिया अभी तक दर्ज नहीं है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर क्या है?
यह वाराणसी में गंगा नदी के किनारे प्रस्तावित छह लेन का अत्याधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई 2026 को मंजूरी दी। यह रामनगर क्षेत्र को बीएचयू, हरहुआ और काशी विश्वनाथ धाम से जोड़ेगा।
इस परियोजना से वाराणसी को क्या फायदा होगा?
इस कॉरिडोर से शहर के भीतरी हिस्सों पर यातायात का दबाव कम होगा, क्योंकि श्रद्धालु गंगा पार वाहन पार्क कर पैदल धाम पहुँच सकेंगे। साथ ही रामनगर में होटल, पेइंग गेस्ट हाउस और पर्यटन सुविधाओं के विकास से स्थानीय रोज़गार के नए अवसर बनेंगे।
इस परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
मेयर अशोक कुमार तिवारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने काशी को लगभग ₹25,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात दी है। हालाँकि, यह राशि केवल गंगा-वरुणा कॉरिडोर की है या समग्र काशी विकास पैकेज की, इसका आधिकारिक ब्यौरा अभी सरकार की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है।
यह कॉरिडोर कहाँ से कहाँ तक जाएगा?
यह कॉरिडोर गंगा के उस पार स्थित रामनगर क्षेत्र को बीएचयू, हरहुआ और वाराणसी के अन्य प्रमुख मार्गों से जोड़ेगा। निर्मला सिंह पटेल के अनुसार, यह रोपवे जैसी अन्य परियोजनाओं के साथ मिलकर शहर के परिवहन नेटवर्क को पूरी तरह बदल देगा।
वाराणसी में पहले से कौन-सी बड़ी विकास परियोजनाएँ हो चुकी हैं?
2014 के बाद से वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, रिंग रोड, रोपवे और पुल जैसी कई बड़ी परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। विधायक सौरभ श्रीवास्तव के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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