15 जुलाई 2026
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सीबीआई का ₹47.37 करोड़ बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ा एक्शन, जुपिटर बायो साइंसेज के ठिकानों पर छापे

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सीबीआई का ₹47.37 करोड़ बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ा एक्शन, जुपिटर बायो साइंसेज के ठिकानों पर छापे

सारांश

सीबीआई ने ₹47.37 करोड़ की यूको बैंक धोखाधड़ी में जुपिटर बायो साइंसेज के खिलाफ चार राज्यों में एक साथ छापेमारी की। फर्जी इनवॉइस और फुलाई गई मूल्यांकन रिपोर्ट से बैंक को नुकसान पहुँचाने का आरोप है। डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज बरामद, जांच जारी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 15 जुलाई 2026 को मेसर्स जुपिटर बायो साइंसेज लिमिटेड और उसके निदेशकों के ठिकानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया।
आरोपियों पर यूको बैंक को ₹47.37 करोड़ का अनुचित नुकसान पहुँचाने का आरोप है।
छापेमारी कर्नाटक , महाराष्ट्र , तेलंगाना और तमिलनाडु — चार राज्यों में की गई।
आरोप है कि फर्जी प्रोफोर्मा इनवॉइस और बढ़ा-चढ़ाकर मूल्यांकन रिपोर्ट के जरिए बैंक को ठगा गया।
तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद; धन प्रवाह और संलिप्त व्यक्तियों की जांच जारी।
मामला 29 जून 2026 को दर्ज हुआ था, तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को यूको बैंक की शिकायत पर मेसर्स जुपिटर बायो साइंसेज लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक, निदेशकों तथा अज्ञात लोक सेवकों व निजी व्यक्तियों के विरुद्ध समन्वित तलाशी अभियान चलाया। आरोपियों पर बैंक को ₹47.37 करोड़ का अनुचित नुकसान पहुँचाने का आरोप है। यह मामला हैदराबाद स्थित यूको बैंक शाखा से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 29 जून 2026 को दर्ज किया गया था। इसकी पृष्ठभूमि में तेलंगाना उच्च न्यायालय के 5 मार्च 2026 और 24 अप्रैल 2026 के आदेश हैं, जो यूको बैंक द्वारा दायर रिट याचिका संख्या 4112/2025 और सीबीआई द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका संख्या 1/2026 के तहत पारित किए गए थे। गौरतलब है कि न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही इस मामले में एफआईआर दर्ज हो सकी।

आरोपों की प्रकृति

शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी और मनगढ़ंत प्रोफोर्मा इनवॉइस प्रस्तुत किए और गिरवी रखी गई प्रतिभूतियों की बढ़ा-चढ़ाकर मूल्यांकन रिपोर्ट बैंक के समक्ष पेश कर ऋण प्राप्त किया। इस प्रकार बैंक को कथित तौर पर व्यवस्थित तरीके से ठगा गया। जांच एजेंसी के अनुसार यह एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है।

तलाशी अभियान का विस्तार

सीबीआई ने एक साथ कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु — चार राज्यों में कई स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी में मेसर्स जुपिटर बायो साइंसेज लिमिटेड के निदेशकों से जुड़ी आवासीय संपत्तियाँ भी शामिल रहीं। यह बहु-राज्यीय अभियान इस मामले के भौगोलिक विस्तार को दर्शाता है।

बरामद साक्ष्य

तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए, जिनमें धन के गबन से संबंधित रिकॉर्ड और जांच से जुड़ी अन्य सामग्रियाँ शामिल हैं। सीबीआई के अनुसार इन साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

आगे की जांच

सीबीआई अब इस पूरे षड्यंत्र की कड़ियाँ, धन के प्रवाह और इसमें संलिप्त सभी व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। अज्ञात लोक सेवकों की संभावित संलिप्तता की जांच इस मामले को और संवेदनशील बनाती है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारियाँ और चार्जशीट दाखिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे साधारण कॉर्पोरेट फ्रॉड से अलग करता है। तेलंगाना उच्च न्यायालय के दो-दो आदेशों के बाद ही एफआईआर दर्ज होना यह भी दर्शाता है कि प्रारंभिक स्तर पर जांच में विलंब हुआ। चार राज्यों में एक साथ छापेमारी बताती है कि धन का प्रवाह व्यापक नेटवर्क में फैला है — और असली सवाल यह है कि बैंक की आंतरिक जोखिम-प्रबंधन प्रणाली इतने बड़े फर्जीवाड़े को पकड़ने में क्यों विफल रही।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुपिटर बायो साइंसेज पर सीबीआई की छापेमारी किस मामले में हुई?
सीबीआई ने यूको बैंक को ₹47.37 करोड़ का अनुचित नुकसान पहुँचाने के आरोप में मेसर्स जुपिटर बायो साइंसेज लिमिटेड और उसके निदेशकों के ठिकानों पर 15 जुलाई 2026 को छापेमारी की। आरोप है कि फर्जी इनवॉइस और बढ़ा-चढ़ाकर मूल्यांकन रिपोर्ट के जरिए बैंक से ऋण लिया गया।
सीबीआई ने किन राज्यों में तलाशी अभियान चलाया?
सीबीआई ने कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु — चार राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इनमें आरोपी कंपनी के निदेशकों की आवासीय संपत्तियाँ भी शामिल थीं।
इस बैंक धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोप क्या हैं?
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी और मनगढ़ंत प्रोफोर्मा इनवॉइस प्रस्तुत किए और गिरवी रखी गई प्रतिभूतियों की बढ़ा-चढ़ाकर मूल्यांकन रिपोर्ट बैंक को सौंपी। इससे यूको बैंक को ₹47.37 करोड़ का नुकसान हुआ।
यह मामला कब और कैसे दर्ज हुआ?
यह मामला 29 जून 2026 को दर्ज किया गया। तेलंगाना उच्च न्यायालय के 5 मार्च 2026 और 24 अप्रैल 2026 के आदेशों के बाद — यूको बैंक की रिट याचिका और सीबीआई की पुनर्विचार याचिका पर — यह कार्रवाई संभव हुई।
तलाशी में क्या बरामद हुआ और आगे क्या होगा?
तलाशी के दौरान धन के गबन से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। सीबीआई अब षड्यंत्र की पूरी कड़ियाँ, धन प्रवाह और सभी संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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