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यूको बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई अदालत का कड़ा निर्णय: तीन साल की सजा

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यूको बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई अदालत का कड़ा निर्णय: तीन साल की सजा

सारांश

सीबीआई की विशेष अदालत ने यूको बैंक के पूर्व अधिकारियों को तीन साल की सजा सुनाई है। यह मामला बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ा है और अदालत के निर्णय को प्रणाली में सख्ती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य बातें

यूको बैंक के अधिकारियों को तीन साल की सजा मिली।
सीबीआई ने 2016 में मामला दर्ज किया था।
धोखाधड़ी की कुल राशि 643 लाख रुपए थी।
अदालत का निर्णय बैंकिंग धोखाधड़ी पर सख्त रुख दर्शाता है।
इस मामले ने न्याय प्रणाली की गंभीरता को प्रदर्शित किया है।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत, अहमदाबाद ने एक महत्वपूर्ण बैंक धोखाधड़ी मामले में कड़ा निर्णय लेते हुए यूको बैंक की चिलोडा शाखा, गांधीनगर के पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक मेडम भगवती प्रसाद, पूर्व सहायक प्रबंधक भास्कर रमेशचंद्र सोनी और जागृति प्लास्टिक्स की मालिक जागृतिबेन निमिष पारिख को दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को तीन वर्षों के कठोर कारावास (आरआई) और कुल 30 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

इस मामले में सीबीआई ने 27 अप्रैल 2016 को प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर मेडम भगवती प्रसाद, बैंक अधिकारी भास्कर रमेशचंद्र सोनी, जागृतिबेन निमिष पारिख और अन्य पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि मेडम भगवती प्रसाद ने एक लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाली दस्तावेजों के आधार पर 17 विभिन्न व्यक्तियों और फर्मों को धोखाधड़ी से कुल 643 लाख रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट और टर्म लोन स्वीकृत किए।

आरोप के अनुसार, दिसंबर 2015 तक इन 17 खातों में कुल बकाया राशि 363 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। इनमें से अधिकांश खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) बन चुके थे, जबकि बाकी भी एनपीए बनने की स्थिति में थे, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 17 नवंबर 2017 को आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में विशेष सीबीआई न्यायालय ने 23 नवंबर 2021 के आदेश में एजेंसी को विभिन्न आरोप पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए, जिनका अनुपालन करते हुए 10 जून 2022 को पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए।

लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। इस निर्णय को बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे वित्तीय क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है। यह दर्शाता है कि न्याय प्रणाली बैंकिंग अपराधों को गंभीरता से लेती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूको बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों को क्या सजा सुनाई गई?
आरोपियों को तीन वर्षों के कठोर कारावास और 30 लाख रुपए का जुर्माना सुनाया गया है।
सीबीआई ने इस मामले में कब प्राथमिकी दर्ज की थी?
सीबीआई ने 27 अप्रैल 2016 को प्राथमिकी दर्ज की थी।
धोखाधड़ी से कितनी राशि की स्वीकृति दी गई थी?
धोखाधड़ी के आधार पर कुल 643 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी।
अदालत ने निर्णय कब सुनाया?
अदालत ने निर्णय सुनाते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया।
इस मामले का क्या महत्व है?
यह मामला बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी के खिलाफ एक सख्त रुख दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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