विशाखापट्टनम में बैंक धोखाधड़ी मामला: पूर्व कर्मचारी और एक सहयोगी को 5 साल की सजा और 1.71 करोड़ का जुर्माना
सारांश
Key Takeaways
- बैंक धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
- 5 साल की सजा और भारी जुर्माना।
- सीबीआई की जांच ने दोषियों को पकड़ा।
- बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी के खिलाफ कड़े कदम।
- आरोपियों की पहचान और भूमिका स्पष्ट।
विशाखापट्टनम, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विशाखापट्टनम की सीबीआई अदालत ने एक महत्वपूर्ण बैंक धोखाधड़ी मामले में कड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने आंध्रा बैंक के पूर्व क्लर्क-कम-कैशियर और एक निजी व्यक्ति को दोषी ठहराया है।
अदालत ने दोनों आरोपियों को पाँच साल की सजा सुनाई है, और उन पर 1,71,42,000 रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
दोषियों की पहचान वेंपडापु संतोषी रामू और महान्थी रमना के रूप में की गई है। वेंपडापु संतोषी रामू आंध्रा बैंक की चीपुरुपल्ली शाखा (जिला विजयनगरम) में क्लर्क-कम-कैशियर के रूप में कार्यरत थे, लेकिन बाद में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, महान्थी रमना एक निजी व्यक्ति हैं, जो नदिपैना पेटा क्षेत्र के निवासी हैं।
सीबीआई के अनुसार, इस मामले की जांच 13 जून 2018 को आरंभ की गई थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वेंपडापु संतोषी रामू ने महान्थी रमना के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची और उन्हें सौंपी गई रकम का गबन किया। यह राशि कुल 1,71,41,162 रुपए थी, जिसे चीपुरुपल्ली रूरल इलेक्ट्रिक को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खाते में जमा किया जाना था।
यह संस्था विजयनगरम जिले के दूरदराज इलाकों में बिजली उपभोक्ताओं से बिल वसूली का कार्य करती है। आरोप है कि इस पूरी राशि को जमा करने के बजाय आरोपियों ने धोखाधड़ी कर उसे अपने पास रख लिया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 10 जनवरी 2019 को दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा और जुर्माना सुनाया।