बैंक धोखाधड़ी मामले में अहम फैसला: पीएनबी के पूर्व अधिकारियों समेत कई दोषी ठहराए गए
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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अहमदाबाद की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ा निर्णय सुनाया, जिसमें पंजाब नेशनल बैंक के तीन रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया और उन्हें सजा सुनाई गई। इस मामले में रिटायर्ड असिस्टेंट जनरल मैनेजर गुरिंदर सिंह, रिटायर्ड चीफ मैनेजर केजीसीएस अय्यर और रिटायर्ड सीनियर मैनेजर केई सुरेंद्रनाथ को दो-दो साल की कठोर कारावास (आरई) के साथ प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अदालत ने निजी व्यक्तियों में संजय नागजीभाई पटेल को तीन साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना, सतीश नागजीभाई दावरा को दो साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना, हितेश डोमाडिया को तीन साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना, वैशालीबेन दावरा को दो साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना तथा रमीलाबेन भिकाडिया को दो साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा जलपा एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड पर भी 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
इस मामले की जांच सीबीआई ने 22 अगस्त, 2016 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में पता चला कि सूरत स्थित श्री काली टेक्सटाइल्स के प्रोपराइटर शैलेश भीखाभाई सतासिया ने 10 जुलाई 2011 को 44 वॉटर जेट लूम मशीनों की खरीद और व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए 370 लाख रुपये के टर्म लोन और 40 लाख रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया था। बैंक के तत्कालीन अधिकारियों वरिष्ठ प्रबंधक केई सुरेंद्रनाथ और चीफ मैनेजर केजीसीएस अय्यर की सिफारिश के बाद 29 जुलाई 2011 को तत्कालीन एजीएम गुरिंदर सिंह ने इस लोन को स्वीकृति दी। लोन के बदले मुख्य सुरक्षा के रूप में मशीनें और अतिरिक्त संपत्तियां जैसे प्लॉट और रिहायशी फ्लैट गिरवी रखे गए थे।
जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी शैलेश सतासिया और अन्य निजी व्यक्तियों ने बैंक से ऋण प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों का प्रयोग किया था। इन दस्तावेजों को असली दिखाकर बैंक अधिकारियों को गुमराह किया गया। वहीं, आरोपी बैंक अधिकारियों ने भी निर्धारित दिशानिर्देशों और सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बिना इन दस्तावेजों को स्वीकार कर लिया और लोन स्वीकृत कर दिया। इस पूरे षड्यंत्र के चलते आरोपियों को अनुचित लाभ मिला और बैंक को ब्याज सहित लगभग 156.98 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
सीबीआई ने जांच पूरी होने के बाद 29 जून, 2016 को सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी पाया और उनके खिलाफ सख्त सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।