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सीबीआई कोर्ट ने पीएनबी के पूर्व अधिकारियों को दोषी क्यों ठहराया?

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सीबीआई कोर्ट ने पीएनबी के पूर्व अधिकारियों को दोषी क्यों ठहराया?

सारांश

दिल्ली की सीबीआई विशेष अदालत ने पीएनबी के पूर्व अधिकारियों को 4 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी में दोषी ठहराया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और सजा की बारीकियां।

मुख्य बातें

पीएनबी के पूर्व अधिकारियों को सजा सुनाई गई।
बैंक धोखाधड़ी का मामला गंभीर है।
सीबीआई ने कड़ी कार्रवाई की पुष्टि की।
सख्त दंड से जनता का विश्वास बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जालसाजी के मामलों में त्वरित न्याय आवश्यक है।

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की सीबीआई विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की जोर बाग ब्रांच से संबंधित 4 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में दो पूर्व बैंक अधिकारियों और एक पैनल एडवोकेट को दोषी ठहराया। अदालत ने सजा का फैसला सुनाया।

दोषी ठहराए गए बैंक अधिकारी कुलविंदर कौर जौहर (तत्कालीन चीफ मैनेजर और ब्रांच हेड) और रंजीव सुनेजा (तत्कालीन सीनियर मैनेजर) हैं। अदालत ने दोनों को तीन-तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 75,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। बैंक के पैनल एडवोकेट नरेंद्र सिंह परिहार को ढ़ाई साल की कैद की सजा सुनाई गई और 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

सीबीआई ने यह मामला 11 जुलाई 2013 को दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपी संजीव दीक्षित (मैसर्स शंकर मेटल्स के मालिक), संजय शर्मा (मैसर्स सुपर मशीन्स के मालिक), इंदिरा रानी और अन्य लोगों ने आपराधिक साजिश रचकर जाली और नकली संपत्ति दस्तावेजों और केवाईसी के आधार पर पीएनबी जोर बाग ब्रांच से 4 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सुविधा हासिल की। लोन की राशि को मंजूर के उद्देश्यों के अलावा अन्य कामों में इस्तेमाल किया गया और बैंक फंड को फर्जी बैंक खातों के जरिए डायवर्ट कर दिया गया।

जांच में पता चला कि संजीव दीक्षित ने बैंक अधिकारी कुलविंदर कौर जौहर, रंजीव सुनेजा और पैनल एडवोकेट एनएस परिहार के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों से क्रेडिट लिमिट मंजूर कराई और फर्जी फर्मों के खातों से पैसे निकाल लिए। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने संजीव दीक्षित (उर्फ संजय शर्मा), एन.एस. परिहार, कुलविंदर कौर जौहर, रंजीव सुनेजा, राहुल शर्मा और राजीव शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

ट्रायल के दौरान अदालत ने कुलविंदर कौर जौहर, रंजीव सुनेजा और नरेंद्र सिंह परिहार को दोषी करार दिया और सजा सुनाई। राहुल शर्मा और राजीव शर्मा को बरी कर दिया गया है। संजीव दीक्षित इस मामले में भगोड़ा अपराधी है और ट्रायल से बच रहा है।

यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के दुरुपयोग को उजागर करता है। सीबीआई ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी बताता है कि कैसे जालसाजी और गलत दस्तावेजों का उपयोग करके फंड का दुरुपयोग किया गया। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है, ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई कोर्ट ने किस मामले में सजा सुनाई?
सीबीआई कोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक की जोर बाग ब्रांच से जुड़े 4 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में सजा सुनाई।
दोषी ठहराए गए अधिकारियों का नाम क्या है?
दोषी ठहराए गए अधिकारियों में कुलविंदर कौर जौहर और रंजीव सुनेजा शामिल हैं।
सजा के तहत उन्हें क्या दंड दिया गया?
उन्हें तीन-तीन साल की कठोर कारावास और जुर्माना लगाया गया है।
इस मामले की शुरुआत कब हुई थी?
इस मामले की शुरुआत 11 जुलाई 2013 को हुई थी।
क्या संजीव दीक्षित ट्रायल में शामिल हुए?
नहीं, संजीव दीक्षित इस मामले में भगोड़ा अपराधी है और ट्रायल से बच रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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