क्या गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने यूनियन बैंक के मैनेजर को बैंक धोखाधड़ी में 4.5 साल की सजा सुनाई?

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क्या गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने यूनियन बैंक के मैनेजर को बैंक धोखाधड़ी में 4.5 साल की सजा सुनाई?

सारांश

गाजियाबाद में सीबीआई कोर्ट ने यूनियन बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर को बैंक धोखाधड़ी के मामले में सजा सुनाई है। यह मामला 15 साल पुराना है, जिसमें 40 लाख का ऋण फर्जी दस्तावेजों पर मंजूर किया गया था। जानें इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • यूनियन बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर को चार साल छह महीने की सजा।
  • मामला 15 साल पुराना है।
  • फर्जी दस्तावेजों पर 40 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया।
  • सीबीआई द्वारा आरोप पत्र दाखिल।
  • अदालत ने गंभीर आर्थिक अपराध पर की कठोर टिप्पणी।

गाजियाबाद, 21 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। गाजियाबाद की सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को एक पुरानी बैंक धोखाधड़ी के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व ब्रांच मैनेजर मनोज श्रीवास्तव को दोषी ठहराते हुए चार साल छह महीने की सजा सुनाई। अदालत ने उन पर 30,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला लगभग 15 साल पुराना है, जिसकी जांच और कार्रवाई लंबी चली। सीबीआई ने 14 दिसंबर 2010 को मनोज श्रीवास्तव और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि मई 2007 से जून 2009 के बीच नोएडा स्थित यूनियन बैंक की एसएसआई शाखा में ब्रांच मैनेजर रहते हुए मनोज ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी लाभ के लिए साजिश रची।

सीबीआई के अनुसार, आरोपी ने कौशल किशोर शर्मा और सुरेन्द्र कुमार शुक्ला के साथ मिलकर 15 नवंबर 2008 को 40 लाख रुपए का ऋण मंजूर किया, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर था। इससे बैंक को नुकसान हुआ।

सीबीआई की जांच के बाद 29 सितंबर 2012 को मनोज श्रीवास्तव, कौशल किशोर शर्मा और सुरेन्द्र कुमार शुक्ला के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। अदालत में पेश सबूतों और गवाही को परखते हुए यह पाया गया कि मनोज ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक की प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर फर्जी दस्तावेजों पर ऋण स्वीकृत किया।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मनोज ने अदालत के समक्ष अपना अपराध स्वीकार किया। इसके बाद सीबीआई एंटी-करप्शन कोर्ट, गाजियाबाद ने मनोज को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

अदालत ने कहा कि इस प्रकार के गंभीर आर्थिक अपराध लोक सेवकों की ओर से वित्तीय संस्थानों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति न हो।

Point of View

तो यह न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनता है बल्कि समाज में विश्वास को भी हानि पहुंचाता है। ऐसे मामलों में सख्ती से निपटने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी के प्रयासों को रोका जा सके।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

मनोज श्रीवास्तव को कितनी सजा सुनाई गई?
उन्हें चार साल छह महीने की सजा सुनाई गई है।
यह मामला कब का है?
यह मामला लगभग 15 साल पुराना है।
मनोज ने किस बैंक में काम किया?
मनोज ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में ब्रांच मैनेजर के रूप में काम किया।
कितने रुपए का ऋण मंजूर किया गया था?
40 लाख रुपए का ऋण मंजूर किया गया था।
इस मामले में सीबीआई का क्या रोल था?
सीबीआई ने इस मामले की जांच की और आरोप पत्र दाखिल किया।
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