18 सितंबर 2026
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आरक्षण अब जरूरी नहीं, सभी को मिले सामान्य दर्जा: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

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आरक्षण अब जरूरी नहीं, सभी को मिले सामान्य दर्जा: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

सारांश

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने महाराष्ट्र में आरक्षण आंदोलन के बीच बड़ा बयान दिया — देश में अब आरक्षण की जरूरत नहीं, सभी को सामान्य दर्जा मिले। एक मुस्लिम धर्मगुरु का यह रुख राष्ट्रीय बहस को नई दिशा देता है।

मुख्य बातें

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 18 सितंबर 2026 को कहा कि देश में अब आरक्षण की जरूरत नहीं।
उनके अनुसार पिछले दो-तीन दशकों में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
बरेलवी ने माँग की कि सभी वर्गों को सामान्य दर्जा दिया जाए ताकि किसी तरह का भेदभाव न हो।
BJP विधायक राम कदम ने कहा कि मराठा समुदाय की 13 में से 12 मांगें पूरी हो चुकी हैं; 13वीं अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण और ओबीसी कोटे को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 18 सितंबर 2026 को बरेली में यह बयान देकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया कि देश में अब आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं रही और सभी वर्गों को सामान्य दर्जा दिया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन और कानूनी विवाद जारी हैं।

मौलाना का मुख्य तर्क

बरेलवी ने कहा कि पिछले दो से तीन दशकों में देश ने व्यापक आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक प्रगति की है, जिसके चलते आरक्षण की प्रासंगिकता कम हो गई है। उन्होंने कहा, 'लोगों के हालात काफी हद तक बदल चुके हैं। जिन लोगों के मकान पहले खपरैल या छप्पर के हुआ करते थे, वे अब पक्के मकानों में रह रहे हैं।'

उन्होंने आर्थिक सुधार का एक और ठोस उदाहरण देते हुए कहा, 'पहले जिन लोगों के लिए साइकिल खरीदना भी मुश्किल था, आज उनके घरों में दो-तीन मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहन हैं।' उनके अनुसार, इन बदलावों को देखते हुए किसी भी वर्ग को आरक्षण की जरूरत नहीं है।

भेदभाव समाप्त करने की अपील

मौलाना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'सभी को सामान्य दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि किसी तरह का भेदभाव न हो।' उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण को लेकर होने वाले आंदोलन सरकारों पर अनावश्यक दबाव डालते हैं और इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

गौरतलब है कि यह बयान किसी वंचित समुदाय के नेता की ओर से नहीं, बल्कि एक प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु की तरफ से आया है — जो इसे और भी उल्लेखनीय बनाता है। आलोचकों का कहना है कि आर्थिक प्रगति के आँकड़े समान रूप से सभी समुदायों पर लागू नहीं होते और सामाजिक भेदभाव केवल आर्थिक सुधार से खत्म नहीं होता।

महाराष्ट्र आरक्षण विवाद की पृष्ठभूमि

महाराष्ट्र में मराठा समुदाय लंबे समय से आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। बरेलवी ने इन्हीं आंदोलनों का संदर्भ देते हुए कहा कि अलग-अलग समुदाय अपने लिए आरक्षण की माँग कर रहे हैं और इसे लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।

इसी संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राम कदम ने मराठा आरक्षण में ओबीसी कोटे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि मराठा समुदाय भलीभाँति जानता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ही पहली बार उन्हें आरक्षण दिया था।

राम कदम का बयान

विधायक राम कदम ने कहा, '13 मांगों में से 12 मांगें पूरी की गई हैं। 13वीं मांग अदालत के अधिकार क्षेत्र में आती है और वह अदालत में टिक नहीं पाएगी।' उन्होंने जोर देकर कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि 'महाराष्ट्र के लोग समझते हैं कि मौजूदा राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है।'

यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मामला न्यायालयों में विचाराधीन है और राज्य की राजनीति में यह मुद्दा केंद्र में बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह तर्क कि आर्थिक प्रगति ने आरक्षण को अप्रासंगिक बना दिया है, सामाजिक न्याय के शोधकर्ताओं और दलित-ओबीसी संगठनों के नजरिए से विवादास्पद है — क्योंकि जाति-आधारित भेदभाव का संबंध केवल आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान से भी है। मराठा आरक्षण विवाद के बीच यह बयान आरक्षण-विरोधी राजनीतिक खेमे को अप्रत्यक्ष समर्थन दे सकता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं उठाती कि ऐसे बयानों का सामाजिक असर वास्तविक नीतिगत बदलाव लाने से कहीं अधिक चुनावी ध्रुवीकरण को प्रभावित करता है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आरक्षण पर क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 18 सितंबर 2026 को बरेली में कहा कि देश में अब आरक्षण की जरूरत नहीं है और सभी वर्गों को सामान्य दर्जा दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि पिछले दो-तीन दशकों में लोगों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
मौलाना रजवी बरेलवी कौन हैं?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष हैं और बरेली स्थित एक प्रमुख इस्लामी धर्मगुरु हैं। वे समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बयान देने के लिए जाने जाते हैं।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण विवाद क्या है?
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय लंबे समय से शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की माँग कर रहा है। यह मामला न्यायालयों में विचाराधीन है और ओबीसी कोटे पर इसके संभावित असर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद जारी है।
BJP विधायक राम कदम ने मराठा आरक्षण पर क्या कहा?
BJP विधायक राम कदम ने कहा कि मराठा समुदाय की 13 मांगों में से 12 पूरी हो चुकी हैं और 13वीं मांग अदालत के अधिकार क्षेत्र में है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ही पहली बार मराठा समुदाय को आरक्षण दिया था।
क्या मौलाना के इस बयान का कोई कानूनी या नीतिगत असर होगा?
यह बयान व्यक्तिगत राय के रूप में है और इसका सीधा कानूनी या नीतिगत असर नहीं होगा, क्योंकि आरक्षण नीति का निर्धारण संसद, राज्य विधानसभाओं और न्यायालयों द्वारा होता है। हालाँकि, इस तरह के बयान सामाजिक विमर्श और राजनीतिक बहस को प्रभावित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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