आरक्षण अब जरूरी नहीं, सभी को मिले सामान्य दर्जा: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 18 सितंबर 2026 को बरेली में यह बयान देकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया कि देश में अब आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं रही और सभी वर्गों को सामान्य दर्जा दिया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन और कानूनी विवाद जारी हैं।
मौलाना का मुख्य तर्क
बरेलवी ने कहा कि पिछले दो से तीन दशकों में देश ने व्यापक आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक प्रगति की है, जिसके चलते आरक्षण की प्रासंगिकता कम हो गई है। उन्होंने कहा, 'लोगों के हालात काफी हद तक बदल चुके हैं। जिन लोगों के मकान पहले खपरैल या छप्पर के हुआ करते थे, वे अब पक्के मकानों में रह रहे हैं।'
उन्होंने आर्थिक सुधार का एक और ठोस उदाहरण देते हुए कहा, 'पहले जिन लोगों के लिए साइकिल खरीदना भी मुश्किल था, आज उनके घरों में दो-तीन मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहन हैं।' उनके अनुसार, इन बदलावों को देखते हुए किसी भी वर्ग को आरक्षण की जरूरत नहीं है।
भेदभाव समाप्त करने की अपील
मौलाना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'सभी को सामान्य दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि किसी तरह का भेदभाव न हो।' उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण को लेकर होने वाले आंदोलन सरकारों पर अनावश्यक दबाव डालते हैं और इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
गौरतलब है कि यह बयान किसी वंचित समुदाय के नेता की ओर से नहीं, बल्कि एक प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु की तरफ से आया है — जो इसे और भी उल्लेखनीय बनाता है। आलोचकों का कहना है कि आर्थिक प्रगति के आँकड़े समान रूप से सभी समुदायों पर लागू नहीं होते और सामाजिक भेदभाव केवल आर्थिक सुधार से खत्म नहीं होता।
महाराष्ट्र आरक्षण विवाद की पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय लंबे समय से आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। बरेलवी ने इन्हीं आंदोलनों का संदर्भ देते हुए कहा कि अलग-अलग समुदाय अपने लिए आरक्षण की माँग कर रहे हैं और इसे लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।
इसी संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राम कदम ने मराठा आरक्षण में ओबीसी कोटे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि मराठा समुदाय भलीभाँति जानता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ही पहली बार उन्हें आरक्षण दिया था।
राम कदम का बयान
विधायक राम कदम ने कहा, '13 मांगों में से 12 मांगें पूरी की गई हैं। 13वीं मांग अदालत के अधिकार क्षेत्र में आती है और वह अदालत में टिक नहीं पाएगी।' उन्होंने जोर देकर कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि 'महाराष्ट्र के लोग समझते हैं कि मौजूदा राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है।'
यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मामला न्यायालयों में विचाराधीन है और राज्य की राजनीति में यह मुद्दा केंद्र में बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ और तेज होने की संभावना है।