18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईडी ने कोलकाता के रियल एस्टेट निदेशक अमित गांगुली को मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया, 23 FIR दर्ज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईडी ने कोलकाता के रियल एस्टेट निदेशक अमित गांगुली को मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया, 23 FIR दर्ज

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता की रियल एस्टेट कंपनी गांगुली होम सर्च के निदेशक अमित गांगुली को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया है। जाँच में जाली दस्तावेजों, फर्जी विलेखों और भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर के ज़रिए अचल संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण का आरोप है। गांगुली के खिलाफ लगभग 23 एफआईआर दर्ज हैं।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमित गांगुली , निदेशक, गांगुली होम सर्च प्राइवेट लिमिटेड , को 15 सितंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया।
पीएमएलए की विशेष अदालत ने गांगुली को 4 दिन की ईडी हिरासत में भेजा।
गांगुली पर लगभग 23 एफआईआर दर्ज हैं; जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस की FIR के आधार पर शुरू हुई।
आरोप है कि जाली बिक्री विलेख, पावर ऑफ अटॉर्नी और फर्जी दस्तावेजों से मूल्यवान अचल संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया।
ईडी ने 28 मार्च 2026 को तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण जब्त किए थे।
मामले में आगे की जाँच जारी है; अन्य संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका की भी जाँच हो रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 सितंबर 2026 को कोलकाता स्थित रियल एस्टेट कंपनी गांगुली होम सर्च प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित गांगुली को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। एजेंसी ने 18 सितंबर को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गांगुली को पीएमएलए की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें चार दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

जाँच अधिकारियों के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर पीएमएलए के तहत शुरू किया गया था। ईडी का आरोप है कि गांगुली का नाम कुल लगभग 23 एफआईआर में दर्ज है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और कपटपूर्ण संपत्ति अधिग्रहण से जुड़े अनुसूचित अपराध शामिल हैं।

गौरतलब है कि ईडी ने इससे पहले 28 मार्च 2026 को गांगुली के परिसरों में तलाशी ली थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए थे।

आरोपों का विवरण

ईडी के दावे के अनुसार, गांगुली ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर और विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से मूल्यवान अचल संपत्तियों का अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण किया। जाँच में पाया गया कि इस प्रक्रिया में जाली बिक्री विलेख, मनगढ़ंत समझौते, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, उपहार विलेख, बोर्ड प्रस्ताव और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

जाँचकर्ताओं का आरोप है कि वास्तविक मालिकों के कब्जे और स्वामित्व अधिकारों को बाधित करने के लिए भूमि और नगरपालिका अभिलेखों में हेरफेर किया गया। इस तरह की गतिविधियों से अर्जित संपत्तियाँ और आय पीएमएलए के तहत 'अपराध की आय' मानी जाती हैं।

संयुक्त उद्यम की आड़ में धोखाधड़ी का आरोप

ईडी ने दावा किया है कि गांगुली ने भूस्वामियों के साथ संयुक्त उद्यम करके संपत्तियों पर विकास अधिकार प्राप्त किए, किंतु बाद में उनके कानूनी हकों का पालन नहीं किया और नियंत्रण जताने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए। एजेंसी के अनुसार, इस कार्यप्रणाली से कई निवेशकों और भूस्वामियों को आर्थिक नुकसान पहुँचाया गया।

जब्त सामग्री की जाँच में यह भी सामने आया कि रियल एस्टेट परियोजनाओं और अचल संपत्तियों से संबंधित मामलों में स्थानीय अधिकारियों पर कथित प्रभाव का भी इस्तेमाल हुआ।

आगे क्या होगा

ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जाँच जारी है और मामले में अन्य संस्थाओं तथा व्यक्तियों की भूमिका भी खँगाली जा रही है। विशेष पीएमएलए अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी। यह मामला पश्चिम बंगाल में रियल एस्टेट क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहाँ हाल के वर्षों में संपत्ति धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ भूमि अभिलेख हेरफेर और जाली दस्तावेज एक व्यवस्थागत समस्या बन चुके हैं। 23 एफआईआर का आँकड़ा बताता है कि यह अलग-थलग धोखाधड़ी नहीं, बल्कि कथित तौर पर सुनियोजित तंत्र था। असली परीक्षा यह होगी कि क्या अभियोजन पक्ष जाली दस्तावेजों की श्रृंखला और स्थानीय अधिकारियों के कथित मिलीभगत को अदालत में साबित कर पाता है — क्योंकि ऐसे मामलों में तकनीकी कानूनी खामियाँ अक्सर सजा की राह में बाधा बन जाती हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित गांगुली को ईडी ने किस आरोप में गिरफ्तार किया?
ईडी ने अमित गांगुली को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत 15 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेजों और भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर के ज़रिए मूल्यवान अचल संपत्तियों का अवैध अधिग्रहण किया।
गांगुली होम सर्च प्राइवेट लिमिटेड पर क्या आरोप हैं?
जाँचकर्ताओं के अनुसार, इस कंपनी के निदेशक ने संयुक्त उद्यम के नाम पर भूस्वामियों से विकास अधिकार प्राप्त किए और फिर फर्जी बिक्री विलेख, पावर ऑफ अटॉर्नी व बोर्ड प्रस्तावों के ज़रिए संपत्तियों पर नाजायज नियंत्रण जमाया। कई निवेशकों और भूस्वामियों को कथित तौर पर नुकसान पहुँचाया गया।
ईडी की जाँच में क्या प्रमुख तथ्य सामने आए?
जाँच में पाया गया कि गांगुली का नाम लगभग 23 एफआईआर में दर्ज है। 28 मार्च 2026 को ईडी की तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त हुए थे, जिनसे स्थानीय अधिकारियों पर कथित प्रभाव का भी पता चला।
अमित गांगुली को कितने दिन की हिरासत मिली और अगला कदम क्या है?
पीएमएलए की विशेष अदालत ने गांगुली को 4 दिन की ईडी हिरासत में भेजा है। मामले में आगे की जाँच जारी है और अन्य व्यक्तियों तथा संस्थाओं की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
पीएमएलए के तहत 'अपराध की आय' में क्या शामिल है?
पीएमएलए के अनुसार, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे अनुसूचित अपराधों से अर्जित संपत्तियाँ और आय 'अपराध की आय' मानी जाती हैं। इस मामले में मूल्यवान अचल संपत्तियाँ और संपत्ति अधिकार इस श्रेणी में रखे गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले