ईडी ने कोलकाता के रियल एस्टेट निदेशक अमित गांगुली को मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया, 23 FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 सितंबर 2026 को कोलकाता स्थित रियल एस्टेट कंपनी गांगुली होम सर्च प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित गांगुली को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। एजेंसी ने 18 सितंबर को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गांगुली को पीएमएलए की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें चार दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
जाँच अधिकारियों के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर पीएमएलए के तहत शुरू किया गया था। ईडी का आरोप है कि गांगुली का नाम कुल लगभग 23 एफआईआर में दर्ज है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और कपटपूर्ण संपत्ति अधिग्रहण से जुड़े अनुसूचित अपराध शामिल हैं।
गौरतलब है कि ईडी ने इससे पहले 28 मार्च 2026 को गांगुली के परिसरों में तलाशी ली थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए थे।
आरोपों का विवरण
ईडी के दावे के अनुसार, गांगुली ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर और विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से मूल्यवान अचल संपत्तियों का अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण किया। जाँच में पाया गया कि इस प्रक्रिया में जाली बिक्री विलेख, मनगढ़ंत समझौते, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, उपहार विलेख, बोर्ड प्रस्ताव और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
जाँचकर्ताओं का आरोप है कि वास्तविक मालिकों के कब्जे और स्वामित्व अधिकारों को बाधित करने के लिए भूमि और नगरपालिका अभिलेखों में हेरफेर किया गया। इस तरह की गतिविधियों से अर्जित संपत्तियाँ और आय पीएमएलए के तहत 'अपराध की आय' मानी जाती हैं।
संयुक्त उद्यम की आड़ में धोखाधड़ी का आरोप
ईडी ने दावा किया है कि गांगुली ने भूस्वामियों के साथ संयुक्त उद्यम करके संपत्तियों पर विकास अधिकार प्राप्त किए, किंतु बाद में उनके कानूनी हकों का पालन नहीं किया और नियंत्रण जताने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए। एजेंसी के अनुसार, इस कार्यप्रणाली से कई निवेशकों और भूस्वामियों को आर्थिक नुकसान पहुँचाया गया।
जब्त सामग्री की जाँच में यह भी सामने आया कि रियल एस्टेट परियोजनाओं और अचल संपत्तियों से संबंधित मामलों में स्थानीय अधिकारियों पर कथित प्रभाव का भी इस्तेमाल हुआ।
आगे क्या होगा
ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जाँच जारी है और मामले में अन्य संस्थाओं तथा व्यक्तियों की भूमिका भी खँगाली जा रही है। विशेष पीएमएलए अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी। यह मामला पश्चिम बंगाल में रियल एस्टेट क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहाँ हाल के वर्षों में संपत्ति धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं।