कोलकाता में ईडी ने जाली दस्तावेजों से जमीन हड़पने वाले अमित गांगुली को किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कोलकाता शाखा ने मंगलवार की रात जमीन हड़पने, दस्तावेज़ों में धोखाधड़ी और पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग से जुड़े एक गंभीर मामले में अमित गांगुली को गिरफ्तार किया। ईडी के अनुसार, गांगुली ने कई अवैध तरीकों से विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्तियों पर कब्जा किया, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।
किस तरह दिया जाता था धोखे को अंजाम
ईडी की जाँच के अनुसार, अमित गांगुली ने जाली बोर्ड प्रस्तावों, जाली हस्ताक्षरों वाले बिक्री समझौतों, फर्जी डीड और अन्य कूटरचित दस्तावेज़ों का सहारा लेकर संपत्तियाँ हड़पीं। इसके अलावा उसने जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की और झूठे दावों के आधार पर दीवानी मुकदमे दायर किए। जो जमीन मालिक अपने कानूनी अधिकारों की माँग करते, उन्हें धमकाया जाता या उनके साथ मारपीट की जाती।
पश्चिम बंगाल पुलिस की 23 एफआईआर पहले से दर्ज
कथित तौर पर अमित गांगुली के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस पहले ही 23 अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर चुकी है। ईडी का कहना है कि इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि गांगुली का धोखाधड़ी और अवैध तरीकों से संपत्तियाँ हासिल करने का एक सुनियोजित और निरंतर तरीका रहा है।
अमृत ग्रुप ऑफ कंपनीज पर भी छापेमारी
इसी के साथ, ईडी का कोलकाता ज़ोनल ऑफिस कोलकाता और इंदौर में अमृत ग्रुप ऑफ कंपनीज के निदेशकों और प्रमोटर्स — केसी दुजारी, काली किशोर बागची और अन्य — से जुड़े 17 घरों और कार्यालयों में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती अभियान चला रहा है। आरोप है कि इस समूह ने अलग-अलग डिपॉज़िट स्कीमों के जरिए अधिक रिटर्न का वादा कर आम जनता से भारी रकम इकट्ठा की और बाद में वादा पूरा नहीं किया।
चिट फंड मामले में उत्तरी कोलकाता में छापा
ईडी ने बुधवार को कोलकाता में करोड़ों रुपये के एक चिट फंड मामले के सिलसिले में छह स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के साथ ईडी की टीम सुबह करीब 7 बजे उत्तरी कोलकाता के नारकेलडांगा इलाके में एक कारोबारी के घर पहुँची और तलाशी ली।
आगे क्या होगा
गांगुली को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है और उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। ईडी की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।