15 अगस्त 2026
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कोलकाता भूमि घोटाला: गिरफ्तार कारोबारी जॉय कामदार ने ईडी के सामने सरकारी गवाह बनने की अर्ज़ी दी

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कोलकाता भूमि घोटाला: गिरफ्तार कारोबारी जॉय कामदार ने ईडी के सामने सरकारी गवाह बनने की अर्ज़ी दी

सारांश

कोलकाता के भूमि-घोटाले में गिरफ्तार कारोबारी जॉय कामदार ने ईडी के सामने सरकारी गवाह बनने की पेशकश की है। यदि अदालत यह दर्जा देती है, तो पूर्व पुलिस उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास और कथित माफिया सरगना बिस्वजीत पोद्दार के खिलाफ मामला और मज़बूत हो सकता है।

मुख्य बातें

कोलकाता के रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की माँग की।
स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने ईडी को इस प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखने के लिए 25 अगस्त तक का समय दिया है।
मामला कामदार , कथित भूमि माफिया सरगना बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और पूर्व पुलिस उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े अवैध गठजोड़ पर केंद्रित है।
कामदार को अप्रैल में और सिन्हा बिस्वास व पोद्दार को मई में गिरफ्तार किया गया था।
ईडी ने मलेशिया , ब्रिटेन और दुबई में हवाला नेटवर्क तथा बोलपुर-शांतिनिकेतन में अचल संपत्तियों का पता लगाया है।

कोलकाता के रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से संपर्क कर सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की इच्छा जताई है। ईडी ने उन्हें इस वर्ष की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में अवैध भूमि-हथियाने के कई मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था। यह घटनाक्रम कोलकाता की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच सामने आया है।

औपचारिक अर्ज़ी और अदालत का निर्देश

सूत्रों के अनुसार, कामदार के अधिवक्ता ने कोलकाता की स्पेशल प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट में इस आशय की एक औपचारिक अर्ज़ी दाखिल की है। अदालत ने ईडी को इस प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखने के लिए 25 अगस्त तक का समय दिया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जाँच एजेंसी इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगी या नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि: भूमि माफिया का त्रिकोण

यह मामला तीन प्रमुख नामों के इर्द-गिर्द केंद्रित है — कारोबारी जॉय कामदार, कथित भूमि माफिया सरगना बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, और कोलकाता के पूर्व पुलिस उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास। जाँचकर्ताओं का दावा है कि इन तीनों ने मिलकर एक अवैध भूमि-हथियाने का गठजोड़ बनाया और उससे भारी अवैध संपत्ति अर्जित की।

कामदार को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था, जबकि सिन्हा बिस्वास और पोद्दार को मई में हिरासत में लिया गया। गौरतलब है कि एक सेवारत या पूर्व पुलिस अधिकारी का इस प्रकार के भूमि-माफिया नेटवर्क से जुड़ाव इस मामले को राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत बनाता है।

हवाला नेटवर्क और अचल संपत्तियाँ

ईडी ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने हवाला चैनलों के ज़रिए अवैध कमाई का लेन-देन किया। जाँचकर्ताओं ने कथित तौर पर कामदार के मलेशिया, ब्रिटेन और दुबई स्थित हवाला ऑपरेटरों के साथ संचार का पता लगाया है।

इसके अतिरिक्त, बीरभूम जिले के बोलपुर-शांतिनिकेतन क्षेत्र में कामदार और सिन्हा बिस्वास से जुड़ी महत्वपूर्ण अचल संपत्तियाँ चिह्नित की गई हैं, जिन्हें जाँच एजेंसी के अनुसार बेहिसाब धन से खरीदा गया था। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भूमि-अतिक्रमण के मामले लगातार जाँच एजेंसियों की निगाह में आ रहे हैं।

सरकारी गवाह बनने की कानूनी प्रक्रिया

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कानून के तहत किसी आरोपी को सरकारी गवाह का दर्जा दिलाना एक जटिल और बहु-चरणीय प्रक्रिया है। जाँच एजेंसी को पहले प्रस्ताव और उसके कानूनी निहितार्थों का मूल्यांकन करना होता है, उसके बाद ही अदालत की मंजूरी माँगी जाती है।

यदि कामदार की याचिका स्वीकार होती है, तो उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष गोपनीय बयान दर्ज कराना होगा। ऐसी गवाही पोद्दार और सिन्हा बिस्वास जैसे अन्य आरोपियों के विरुद्ध अभियोजन पक्ष के मामले को और मज़बूत कर सकती है। अंतिम निर्णय पीठासीन न्यायाधीश का होगा, जिन्हें दर्जा देने से पूर्व समस्त प्रासंगिक कानूनी पहलुओं पर विचार कर कारण दर्ज करने होंगे।

आगे क्या होगा

25 अगस्त को ईडी के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि एजेंसी कामदार को अप्रूवर का दर्जा दिलाने के पक्ष में है या नहीं। इस मामले का परिणाम पश्चिम बंगाल में भूमि-घोटाले की व्यापक जाँच की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह राज्य की कानून-व्यवस्था में संस्थागत मिलीभगत के सवाल उठाता है। यदि कामदार का बयान दर्ज होता है, तो जाँच का दायरा केवल तीन व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा — यह उन राजनीतिक और प्रशासनिक कड़ियों की तरफ भी इशारा कर सकता है जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जॉय कामदार कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
जॉय कामदार कोलकाता के एक रियल एस्टेट कारोबारी और प्रमोटर हैं, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने अप्रैल में पश्चिम बंगाल में अवैध भूमि-हथियाने के कई मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था। जाँचकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने हवाला नेटवर्क के ज़रिए अवैध धन का लेन-देन किया।
सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की प्रक्रिया क्या होती है?
भारतीय कानून के तहत कोई आरोपी सरकारी गवाह बन सकता है, लेकिन यह एक जटिल बहु-चरणीय प्रक्रिया है। जाँच एजेंसी पहले प्रस्ताव का मूल्यांकन करती है, फिर अदालत से मंजूरी माँगती है; अंतिम निर्णय पीठासीन न्यायाधीश का होता है, जिन्हें कारण दर्ज करने होते हैं।
इस मामले में और कौन-कौन से आरोपी हैं?
इस मामले में कथित भूमि माफिया सरगना बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता के पूर्व पुलिस उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास प्रमुख आरोपी हैं। दोनों को मई में गिरफ्तार किया गया था।
ईडी को 25 अगस्त तक क्या करना है?
स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने ईडी को 25 अगस्त तक कामदार के सरकारी गवाह बनने के प्रस्ताव पर अपना आधिकारिक पक्ष और निर्णय अदालत के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।
यदि कामदार को अप्रूवर का दर्जा मिलता है तो मामले पर क्या असर होगा?
यदि कामदार को सरकारी गवाह का दर्जा मिलता है, तो उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष गोपनीय बयान दर्ज कराना होगा। यह बयान अन्य आरोपियों — विशेषकर पोद्दार और सिन्हा बिस्वास — के खिलाफ अभियोजन पक्ष के मामले को काफी मज़बूत कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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