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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जय एस. कामदार को गिरफ्तार किया, बड़ी छापेमारी से हुए खुलासे

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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जय एस. कामदार को गिरफ्तार किया, बड़ी छापेमारी से हुए खुलासे

सारांश

कोलकाता में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जय एस. कामदार को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बिस्वजीत पोद्दार से जुड़े मामले की जांच के दौरान की गई। जानिए इस मामले में क्या हैं महत्वपूर्ण खुलासे।

मुख्य बातें

कामदार की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में महत्वपूर्ण है।
ईडी ने बिस्वजीत पोद्दार के साथ संबंधों का खुलासा किया है।
फर्जी कंपनियों के माध्यम से अवैध लेन-देन की जांच चल रही है।
महंगे उपहार देने के आरोप भी सामने आए हैं।
जांच में और नए खुलासे होने की संभावना है।

कोलकाता, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत जय एस. कामदार को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और अन्य व्यक्तियों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के संदर्भ में की गई है।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 20 अप्रैल 2026 को कोलकाता स्थित बिचार भवन में विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ईडी को आगे की जांच के लिए नौ दिनों की हिरासत दी है। इससे पहले 19 अप्रैल को ईडी ने कोलकाता और बैरकपुर में छह अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी भी की थी। इस दौरान पुलिस उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास और जय एस. कामदार के आवासों की भी जांच की गई और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।

जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जय एस. कामदार का सोना पप्पू, उर्फ बिस्वजीत पोद्दार, के साथ घनिष्ठ संबंध था, और दोनों के बीच बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन होते थे। यह भी आरोप है कि कामदार ने बिस्वजीत पोद्दार की पत्नी, सोमा सोनार पोद्दार, को हथियार भी उपलब्ध कराए थे, हालाँकि उन्होंने इस संबंध में किसी भी जानकारी से इनकार किया है।

ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि जय एस. कामदार कई फर्जी कंपनियों यानी शेल कंपनियों के माध्यम से अवैध घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाला लेन-देन में शामिल था। इन कंपनियों की विस्तृत जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि इन लेन-देन के जरिए बड़ी मात्रा में अवैध धन को इधर-उधर किया गया।

इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया है कि जय एस. कामदार का कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ भी करीबी संपर्क था। आरोप है कि वह इन अधिकारियों और उनके परिवारों को महंगे उपहार और अन्य लाभ देता था, ताकि अपने अवैध कामों में उसे सहयोग मिल सके। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कुछ मामलों में निर्दोष लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करवाईं और संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश की।

ईडी ने इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी इसी मामले में छापेमारी की थी, जिसमें लगभग 1.47 करोड़ रुपए नकद, सोने-चांदी के आभूषण जिनकी कीमत करीब 67.64 लाख रुपए थी, एक फॉर्च्यूनर वाहन, एक बिना लाइसेंस की रिवॉल्वर, कई दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। जांच में कई अचल संपत्तियों की भी पहचान हुई है, जो कथित तौर पर अवैध गतिविधियों से अर्जित की गई हैं।

एजेंसी के अनुसार, अपराध से अर्जित धन का उपयोग जबरन वसूली, रियल एस्टेट संपत्तियों पर कब्जा करने और बिना अनुमति निर्माण गतिविधियों में किया गया है। इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें कई उच्च-स्तरीय व्यक्ति शामिल हैं। सभी तथ्य और साक्ष्य एकत्रित करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह एक महत्वपूर्ण जांच है जो समाज में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता को दर्शाती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जय एस. कामदार क्यों गिरफ्तार किए गए?
उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है जो बिस्वजीत पोद्दार से जुड़े मामले की जांच के दौरान सामने आए हैं।
ईडी ने किस अधिनियम के तहत कार्रवाई की?
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत कार्रवाई की है।
जांच में क्या खुलासे हुए हैं?
जांच में जय एस. कामदार के संबंधों, फर्जी कंपनियों, और पुलिस अधिकारियों के साथ उनके संपर्कों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है।
छापेमारी के दौरान क्या-क्या जब्त किया गया?
छापेमारी में 1.47 करोड़ रुपए नकद, आभूषण, एक फॉर्च्यूनर वाहन, और कई दस्तावेज जब्त किए गए।
क्या आगे की जांच होगी?
हाँ, इस मामले की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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