ईडी की बड़ी कार्रवाई: सोना पप्पू सिंडिकेट मामले में कोलकाता के तीन ठिकानों पर छापेमारी

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: सोना पप्पू सिंडिकेट मामले में कोलकाता के तीन ठिकानों पर छापेमारी

सारांश

ईडी ने सोना पप्पू सिंडिकेट मामले में कोलकाता के आनंदपुर और अलीपुर में तीन ठिकानों पर छापे मारे। जॉय कामदार की पूछताछ से मिले सुराग पर यह कार्रवाई हुई। पुलिस डीसी शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम भी जांच में है। बंगाल चुनाव के बीच यह कदम राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।

Key Takeaways

  • ईडी ने 26 अप्रैल 2025 को कोलकाता के आनंदपुर और अलीपुर में तीन ठिकानों पर छापेमारी की।
  • यह कार्रवाई सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच के तहत की गई।
  • जॉय कामदार की पूछताछ से नए ठिकानों का पता चला; वह फिलहाल ईडी हिरासत में है।
  • कोलकाता पुलिस के डीसी शांतनु सिन्हा विश्वास के घर पर भी इस माह ईडी छापा मार चुकी है।
  • सोना पप्पू फरवरी 2025 गोलपार्क हिंसा का मुख्य आरोपी है और फिलहाल फरार है।
  • यह कार्रवाई बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच हुई; 29 अप्रैल को 142 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान होना है।

कोलकाता, 26 अप्रैल 2025: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को कोलकाता में 'सोना पप्पू सिंडिकेट' से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई आनंदपुर और अलीपुर इलाकों में दो कारोबारियों के आवासों पर की गई। इन छापों का सीधा संबंध सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार के आपराधिक नेटवर्क से बताया जा रहा है।

जॉय कामदार की पूछताछ से मिला सुराग

ईडी सूत्रों के अनुसार, जिन कारोबारियों के यहां तलाशी ली जा रही है, उनके नाम और पते जॉय कामदार से पूछताछ के दौरान सामने आए। जॉय कामदार सोना पप्पू का करीबी कारोबारी सहयोगी है और फिलहाल ईडी की हिरासत में है।

रविवार सुबह ईडी की कई टीमें केंद्रीय सशस्त्र बलों के साथ साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स से रवाना हुईं और अलग-अलग स्थानों पर एक साथ जांच शुरू की। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कारोबारियों का जॉय कामदार के निवेश से कोई आर्थिक संबंध था या नहीं।

सोना पप्पू पर गंभीर आरोप, फरार है आरोपी

सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार पर हत्या की कोशिश, उगाही और सिंडिकेट संचालन जैसे कई संगीन आरोप हैं। वह दक्षिण कोलकाता के कस्बा और बालीगंज इलाकों में अपना सिंडिकेट चलाता है। फरवरी 2025 में हुई गोलपार्क हिंसा में भी वह मुख्य आरोपी है।

सोना पप्पू फिलहाल फरार है, लेकिन समय-समय पर सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर जांच एजेंसियों पर अपने परिवार को परेशान करने के आरोप लगाता रहता है। यह रवैया उसे कानून की पकड़ से दूर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस अधिकारी का नाम भी जांच के दायरे में

इस मामले में एक चौंकाने वाला पहलू यह है कि कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम भी जांच में सामने आया है। आरोप है कि उनके जॉय कामदार के साथ वित्तीय लेन-देन थे। ईडी इस महीने की शुरुआत में उनके घर पर भी छापेमारी कर चुकी है, जो इस मामले की गहराई को दर्शाता है।

किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट के बीच कथित वित्तीय संबंध की जांच यह संकेत देती है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

चुनावी माहौल में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता पर विवाद

यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच हो रही है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो चुका है, जबकि शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कोलकाता पहुंचे और नॉर्थ कोलकाता में रोड शो किया।

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार इन एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। हालांकि ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है।

आने वाले दिनों में ईडी की जांच और गहरी हो सकती है। जॉय कामदार की हिरासत में पूछताछ से और नए नामों के सामने आने की संभावना है, जो इस सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क को और उजागर कर सकते हैं।

Point of View

बल्कि उस गहरे गठजोड़ की परतें उघाड़ रही है जो कथित तौर पर राज्य पुलिस, कारोबारियों और संगठित अपराध के बीच बना है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में आना यह सवाल उठाता है कि क्या कानून लागू करने वाली संस्थाएं खुद ही इस तंत्र का हिस्सा बन गई थीं। चुनावी मौसम में यह कार्रवाई राजनीतिक रंग जरूर ले रही है, लेकिन इससे इन तथ्यों की गंभीरता कम नहीं होती। असली सवाल यह है कि सोना पप्पू वर्षों से फरार क्यों है और उसे संरक्षण कहां से मिल रहा था।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

सोना पप्पू सिंडिकेट क्या है और ईडी की जांच किस मामले में हो रही है?
सोना पप्पू सिंडिकेट, बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू द्वारा दक्षिण कोलकाता के कस्बा और बालीगंज इलाकों में चलाया जाने वाला आपराधिक नेटवर्क है। ईडी इस सिंडिकेट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच कर रही है।
जॉय कामदार कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
जॉय कामदार सोना पप्पू का करीबी कारोबारी सहयोगी है जिसे ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसकी पूछताछ से ही कोलकाता के नए ठिकानों का पता चला जिन पर रविवार को छापेमारी की गई।
कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर का नाम इस मामले में क्यों आया?
डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास पर आरोप है कि उनके जॉय कामदार के साथ वित्तीय लेन-देन थे। ईडी इस महीने की शुरुआत में उनके घर पर भी छापेमारी कर चुकी है।
सोना पप्पू पर क्या-क्या आरोप हैं और वह अभी कहां है?
सोना पप्पू पर हत्या की कोशिश, उगाही और फरवरी 2025 की गोलपार्क हिंसा में मुख्य आरोपी होने के आरोप हैं। वह फिलहाल फरार है लेकिन सोशल मीडिया पर सक्रिय रहता है।
बंगाल चुनाव के दौरान ईडी की इस कार्रवाई पर TMC का क्या कहना है?
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार चुनाव के दौरान ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है। ईडी ने कहा है कि यह कार्रवाई PMLA के तहत नियमित जांच का हिस्सा है।
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