अशोकनगर में लकड़ी तस्करी रोकने गई वन टीम पर कुल्हाड़ी-लाठी से हमला, डिप्टी रेंजर कमलेश बाथम का पैर फ्रैक्चर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में 28 जुलाई 2025 को लकड़ी तस्करी के विरुद्ध अभियान चला रही वन विभाग की आठ सदस्यीय टीम पर तस्करों के सहयोगियों ने लाठी, पत्थर और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। इस हिंसक वारदात में डिप्टी रेंजर कमलेश बाथम के पैर में फ्रैक्चर हो गया, जबकि वन कर्मचारी बलवीर पटेल सहित दो अन्य कर्मचारी भी घायल हुए। पुलिस ने मंगलवार को घटना की पुष्टि की और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें मैदान में उतार दी हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला
पुलिस के अनुसार, यह घटना मुंगावली वन परिक्षेत्र के किरौला गांव के समीप सोमवार को हुई। वन विभाग को सूचना मिली थी कि आसपास के जंगल से अवैध रूप से काटी गई लकड़ी बैलगाड़ी के ज़रिए तस्करी की जा रही है। इस सूचना पर टीम ने मौके पर पहुँचकर लकड़ी से लदी बैलगाड़ी को रोककर जब्त कर लिया।
जब जब्त बैलगाड़ी को ट्रैक्टर की सहायता से मुंगावली ले जाया जा रहा था, तभी बैलगाड़ी के साथ मौजूद लोगों ने अपने साथियों को सूचित कर दिया। कुछ ही मिनटों में पाँच मोटरसाइकिलों पर सवार 8 से 10 लोग मौके पर आ धमके, ट्रैक्टर का रास्ता रोका और वन दल पर लाठी, पत्थर व कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया।
घायलों की स्थिति और उपचार
डिप्टी रेंजर कमलेश बाथम को पैर में फ्रैक्चर आया और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद मुंगावली सिविल अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किया गया। वन कर्मचारी बलवीर पटेल सहित दो अन्य कर्मचारियों को भी चोटें आईं और उनका इलाज मुंगावली अस्पताल में किया गया।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
मुंगावली के एसडीओपी सनम बी. खान ने बताया कि वन दल वैधानिक निरीक्षण और जब्ती की कार्रवाई में लगा था, तभी हमलावरों ने उस पर हमला किया। उन्होंने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और घटना में शामिल सभी आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हमले के बाद सभी आरोपी पास के जंगल में फरार हो गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी जियाजीगढ़ गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं, हालाँकि अधिकारियों के अनुसार अभी तक उनकी आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है।
वन कर्मियों पर हमलों का व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य प्रदेश में वन माफिया के विरुद्ध अभियान तेज़ किए गए हैं। गौरतलब है कि वन कर्मियों पर हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है — अवैध लकड़ी कटाई और खनन पर रोक लगाने की कोशिशों में अनेक बार अधिकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तस्करी नेटवर्क स्थानीय स्तर पर संगठित हैं और कार्रवाई के दौरान प्रतिरोध की यह प्रवृत्ति चिंताजनक है।
आगे क्या होगा
एसडीओपी सनम बी. खान के अनुसार आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं। मामले में केस दर्ज होने के बाद वन विभाग भी स्वतंत्र रूप से शिकायत दर्ज कराएगा। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों के दौरान वन दल को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करे।