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पुलवामा पुलिस ने संगरवानी में अवैध लकड़ी की खेप बरामद, आरोपी लियाकत अहमद पर FIR दर्ज

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पुलवामा पुलिस ने संगरवानी में अवैध लकड़ी की खेप बरामद, आरोपी लियाकत अहमद पर FIR दर्ज

सारांश

पुलवामा पुलिस ने 3 मई को संगरवानी में वन विभाग के साथ मिलकर एक कच्चे मकान में छिपाई गई अवैध लकड़ी की बड़ी खेप पकड़ी — 6 बीम और 7 गोल लट्ठे। आरोपी लियाकत अहमद डोई पर BNS और वन अधिनियम के तहत FIR दर्ज। पुलिस का कहना है यह अभियान जारी रहेगा।

मुख्य बातें

पुलवामा पुलिस ने 3 मई 2026 को संगरवानी में छापेमारी कर 6 लकड़ी के बीम और 7 कच्चे गोल लट्ठे बरामद किए।
आरोपी लियाकत अहमद डोई , निवासी सोनाबांजर , के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता धारा 303(2) और वन अधिनियम धारा 26 के तहत FIR दर्ज।
खुफिया सूचना के आधार पर वन विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त छापेमारी की गई।
बरामद लकड़ी को आगे की कार्रवाई के लिए वन विभाग के हवाले किया गया।
पुलिस ने नागरिकों से अवैध लकड़ी तस्करी की सूचना तुरंत देने की अपील की है।

पुलवामा पुलिस ने 3 मई 2026 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के संगरवानी इलाके में अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक बड़ी खेप बरामद की। पुलिस पोस्ट संगरवानी की टीम ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर छापा मारा और 6 लकड़ी के बीम तथा 7 कच्चे गोल लट्ठे जब्त किए। आरोपी लियाकत अहमद डोई, निवासी सोनाबांजर, के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

कैसे हुई कार्रवाई

पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि संगरवानी क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपने कच्चे मकान (कोठे) में जंगल से अवैध रूप से काटी गई लकड़ी छिपा रखी है। सूचना मिलते ही पुलिस पोस्ट संगरवानी की टीम ने तत्काल कार्रवाई की। इस छापेमारी में वन विभाग के अधिकारियों को भी साथ लिया गया ताकि जाँच प्रक्रिया विधिसम्मत तरीके से पूरी हो सके।

बरामदगी और कानूनी कार्रवाई

आरोपी लियाकत अहमद डोई के घर से बरामद लकड़ी को अधिकारियों के अनुसार अवैध तरीके से जंगल से काटकर छिपाया गया था और आगे बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने समय रहते इस तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया। बरामद लकड़ी को आगे की कार्रवाई के लिए वन विभाग के हवाले कर दिया गया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) और वन अधिनियम की धारा 26 के तहत दर्ज किया गया है।

पर्यावरण पर असर

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की अवैध गतिविधियाँ न केवल जंगलों को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के जंगल पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं और यहाँ वन संरक्षण कानूनों का उल्लंघन एक गंभीर अपराध माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रशासन वन माफिया के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है।

पुलिस की प्रतिबद्धता

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि पुलवामा पुलिस उन व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है जो प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचाने और पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ने वाली गतिविधियों में शामिल हैं। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध लकड़ी कटाई या तस्करी की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

आगे क्या होगा

फिलहाल पुलिस मामले की जाँच जारी रखे हुए है। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अवैध लकड़ी तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस नेटवर्क के बड़े खिलाड़ियों तक जाँच पहुँचेगी या सिर्फ निचले स्तर के तस्करों पर कार्रवाई होकर रह जाएगी। BNS और वन अधिनियम दोनों के तहत FIR दर्ज करना कानूनी दृष्टि से मज़बूत कदम है, लेकिन सज़ा की दर तब तक नहीं सुधरेगी जब तक अदालतों में मामले तेज़ी से नहीं निपटाए जाते।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुलवामा में अवैध लकड़ी की बरामदगी कब और कहाँ हुई?
यह कार्रवाई 3 मई 2026 को पुलवामा जिले के संगरवानी इलाके में हुई, जब पुलिस पोस्ट संगरवानी की टीम ने वन विभाग के साथ मिलकर एक कच्चे मकान में छापा मारा और 6 बीम व 7 गोल लट्ठे बरामद किए।
आरोपी के खिलाफ कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपी लियाकत अहमद डोई के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) और वन अधिनियम की धारा 26 के तहत FIR दर्ज की गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
बरामद लकड़ी का क्या किया गया?
बरामद की गई लकड़ी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वन विभाग के हवाले कर दिया गया है। इसमें 6 लकड़ी के बीम और 7 कच्चे गोल लट्ठे शामिल थे।
क्या पुलवामा में इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी?
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। नागरिकों से अपील की गई है कि ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
अवैध लकड़ी तस्करी से पर्यावरण को क्या नुकसान होता है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अवैध लकड़ी कटाई से जंगलों को सीधा नुकसान पहुँचता है और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है। जम्मू-कश्मीर के वन पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए यहाँ वन संरक्षण कानूनों का उल्लंघन गंभीर अपराध माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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