तमिलनाडु में हॉस्टल-पीजी किराया 10% बढ़ा, 5 मई से लागू; कमर्शियल LPG की बढ़ती कीमतें बनीं वजह
सारांश
Key Takeaways
तमिलनाडु में हॉस्टल और पेइंग गेस्ट (पीजी) में रहने वाले लाखों छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है। राज्य स्तरीय हॉस्टल एवं पीजी मालिकों के संगठन ने 5 मई 2026 से किराए में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। इसकी मुख्य वजह 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल और खाना पकाने की समग्र लागत में हुई तेज़ बढ़ोतरी बताई जा रही है।
नए किराए का ढाँचा
संगठन द्वारा जारी दरों के अनुसार, बिना एसी वाले कमरों के लिए नए किराए निर्धारित किए गए हैं। चार लोगों के कमरे का किराया अब ₹6,500 से ₹7,500 के बीच रहने की उम्मीद है। तीन लोगों के कमरे का किराया ₹7,000 से ₹8,000 और दो लोगों के कमरे का किराया ₹8,000 से ₹9,000 तक हो सकता है। हालाँकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि असली किराया स्थान, उपलब्ध सुविधाओं और स्थानीय माँग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
कमर्शियल गैस की कीमतों का असर
हॉस्टल मालिकों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम दोगुने से भी ज़्यादा हो गए हैं। बड़े पैमाने पर खाना पकाने के लिए गैस का भारी उपयोग करने वाली हॉस्टल रसोइयों पर इसका सीधा असर पड़ा है। गैस की आपूर्ति में कमी के कारण कई मालिकों को खुले बाज़ार से महँगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पर मजबूर होना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य पदार्थों की कीमतें भी पहले से ऊँची बनी हुई हैं।
वैकल्पिक ईंधन का भी बढ़ा खर्च
लागत कम करने के प्रयास में कुछ हॉस्टलों ने अस्थायी रूप से लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन विकल्पों की ओर रुख किया, परंतु उनके दाम भी बढ़ने से यह उपाय भी कारगर नहीं रहा। गौरतलब है कि ईंधन के सभी प्रमुख विकल्पों में एक साथ मूल्य वृद्धि ने मालिकों के सामने किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा।
रहने वालों पर असर
अनुमानों के अनुसार, पूरे तमिलनाडु में 20,000 से अधिक हॉस्टल हैं, जिनमें करीब 20 लाख लोग निवास करते हैं — इनमें से एक बड़ी संख्या चेन्नई में है। बढ़ती लागत के कारण कई हॉस्टलों ने खाने की सुविधाएँ सीमित कर दी हैं या ऐसे व्यंजन बंद कर दिए हैं जिनमें अधिक ईंधन की खपत होती है। जो निवासी हॉस्टल के भोजन पर निर्भर थे, उन्हें अब बाहर का खाना या पैकेट बंद खाना लेना पड़ रहा है, जिससे उनका कुल मासिक खर्च और बढ़ गया है। कुछ स्थानों पर मेंटेनेंस चार्ज में भी बढ़ोतरी की गई है।
आगे क्या
यदि कमर्शियल गैस और अन्य संचालन लागतें इसी तरह ऊँची बनी रहीं, तो विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में हॉस्टल और पीजी में रहना और भी महँगा हो सकता है। इससे तमिलनाडु के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों और कम आय वर्ग के नौकरीपेशा लोगों के लिए आवास व्यय एक गंभीर चुनौती बन सकता है।