दिल्ली पुलिस साइबर लैब को ISO 9001:2015 सर्टिफिकेशन, BIS ने दी डिजिटल फॉरेंसिक को मान्यता
सारांश
Key Takeaways
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) में स्थित साइबर लैब ने 3 मई 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की — भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इस लैब को प्रतिष्ठित 'ISO 9001:2015 क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम' सर्टिफिकेशन से नवाज़ा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले BIS का यह प्रमाणपत्र लैब की मानकीकृत कार्यप्रणाली और गुणवत्ता प्रबंधन पर आधिकारिक मुहर है।
क्यों अहम है यह सर्टिफिकेशन
ISO 9001:2015 सर्टिफिकेशन किसी भी संस्था की प्रोसेस-ड्रिवन कार्यशैली और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है। दिल्ली पुलिस की साइबर लैब के संदर्भ में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ डिजिटल साक्ष्यों की जाँच न्यायिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराधों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और डिजिटल फॉरेंसिक की विश्वसनीयता पर न्यायालयों की निर्भरता भी बढ़ी है।
लैब की कार्यक्षमता और तकनीकी दक्षता
साइबर लैब में मोबाइल फोन फॉरेंसिक, कंप्यूटर और हार्ड डिस्क से डेटा रिकवरी, क्लाउड-आधारित साक्ष्य विश्लेषण, क्रिप्टोकरेंसी ट्रैकिंग और मैलवेयर एनालिसिस जैसे उन्नत कार्य किए जाते हैं। यहाँ इस्तेमाल होने वाले उपकरण और तकनीकें अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक मानकों के अनुरूप हैं।
लैब की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी डिजिटल साक्ष्य न्यायालय में स्वीकार्य हो। इसके लिए 'चेन ऑफ कस्टडी' प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जाता है — अर्थात् साक्ष्य को सही तरीके से एकत्र करना, सुरक्षित रखना और बिना किसी छेड़छाड़ के जाँच करना अनिवार्य है।
किन मामलों में होती है जाँच
यह लैब साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, रैनसमवेयर अटैक, डेटा चोरी और वित्तीय साइबर अपराध जैसे जटिल मामलों की जाँच में केंद्रीय भूमिका निभाती है। गौरतलब है कि डिजिटल युग में अपराध के तरीके भी तकनीकी रूप से परिष्कृत होते जा रहे हैं, जिससे ऐसी विशेषज्ञ लैब की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
टीम को मिली सराहना
इस उपलब्धि पर सतीश गोलछा ने साइबर लैब की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम, एसीपी मुकेश राठी और इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव सहित पूरी टीम की मेहनत और व्यावसायिकता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की उपलब्धियाँ पुलिसिंग को और अधिक तकनीक-संचालित और भरोसेमंद बनाती हैं।
यह सर्टिफिकेशन दिल्ली पुलिस की डिजिटल फॉरेंसिक क्षमताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाता है — और भविष्य में अन्य राज्य पुलिस बलों के लिए एक मानक स्थापित कर सकता है।