निशिकांत दुबे का बड़ा आरोप: '3 मई 1962 को रखी गई पश्चिम बंगाल में हिंदू प्रताड़ना की नींव', नेहरू और कांग्रेस पर निशाना

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निशिकांत दुबे का बड़ा आरोप: '3 मई 1962 को रखी गई पश्चिम बंगाल में हिंदू प्रताड़ना की नींव', नेहरू और कांग्रेस पर निशाना

सारांश

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने 1962 के पश्चिम बंगाल दंगों का हवाला देते हुए नेहरू और कांग्रेस पर निशाना साधा। उनका दावा है कि मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और कूचबिहार में हुए उन दंगों ने बंगाल में हिंदू उत्पीड़न की राजनीतिक नींव रखी — और नेहरू के राजगोपालाचारी को लिखे पत्र इसका प्रमाण हैं।

Key Takeaways

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने 3 मई 2026 को 'एक्स' पर कांग्रेस और पंडित नेहरू पर गंभीर आरोप लगाए। दुबे के अनुसार, 3 मई से 30 मई 1962 के बीच मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और कूचबिहार में हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति सी. राजगोपालाचारी को नेहरू द्वारा लिखे गए पत्रों को साक्ष्य के रूप में साझा किया। दुबे ने दावा किया कि पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से भागे अधिकांश शरणार्थी मतुआ/अनुसूचित जाति समुदाय के थे, जिन्हें मोदी सरकार ने नागरिकता दी। ये आरोप दुबे के व्यक्तिगत दावे हैं; कांग्रेस या किसी अन्य पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने रविवार, 3 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कांग्रेस पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के कथित उत्पीड़न और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की नींव 3 मई 1962 को ही रख दी गई थी।

मुख्य आरोप और दावे

दुबे ने अपने पोस्ट में दावा किया कि 3 मई 1962 से 30 मई 1962 के बीच पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और कूचबिहार जिलों में भीषण हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए। उनके अनुसार, इन दंगों में बड़ी संख्या में हिंदू मारे गए और कई लोग शरणार्थी बनने पर मजबूर हुए। उन्होंने लिखा,

Point of View

परंतु उनकी विषयवस्तु और संदर्भ की स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है। यह भी उल्लेखनीय है कि ऐसे ऐतिहासिक आरोप अक्सर चुनावी मौसम या सांप्रदायिक तनाव के दौर में तेज़ होते हैं — पाठकों को तथ्य और राजनीतिक आख्यान के बीच अंतर करना होगा।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

निशिकांत दुबे ने 1962 के बंगाल दंगों के बारे में क्या दावा किया?
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि 3 मई से 30 मई 1962 के बीच मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और कूचबिहार में हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए जिनमें बड़ी संख्या में हिंदू मारे गए। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल में हिंदू उत्पीड़न की राजनीतिक नींव बताया।
निशिकांत दुबे ने नेहरू पर क्या आरोप लगाए?
दुबे ने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1962 के दंगों के दौरान संसद के भीतर और बाहर मुसलमानों का पक्ष लिया। उन्होंने इसके समर्थन में नेहरू द्वारा पूर्व राष्ट्रपति सी. राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्रों को साक्ष्य के रूप में साझा किया।
मतुआ समुदाय का इस मुद्दे से क्या संबंध है?
दुबे ने दावा किया कि 1962 के दंगों और पूर्वी पाकिस्तान में उत्पीड़न के कारण भारत आए अधिकांश शरणार्थी मतुआ यानी अनुसूचित जाति समुदाय के थे। उन्होंने कहा कि इन शरणार्थियों को मोदी सरकार ने नागरिकता प्रदान की।
क्या इन आरोपों पर कांग्रेस की कोई प्रतिक्रिया आई है?
अभी तक इन आरोपों पर कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ये दावे दुबे के व्यक्तिगत बयान हैं जो उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए हैं।
1962 के बंगाल दंगों का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
1962 में पश्चिम बंगाल और पूर्वी पाकिस्तान में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएँ दर्ज हैं, जो भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद की जनसांख्यिकीय उथल-पुथल का हिस्सा थीं। हालाँकि, दुबे द्वारा लगाए गए विशिष्ट आरोपों की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
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