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पुणे में वन्यजीव तस्करी पर वन विभाग का शिकंजा, 'हत्था जोड़ी' के साथ तस्कर मल्हार लोखंडे गिरफ्तार

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पुणे में वन्यजीव तस्करी पर वन विभाग का शिकंजा, 'हत्था जोड़ी' के साथ तस्कर मल्हार लोखंडे गिरफ्तार

सारांश

पुणे रेलवे स्टेशन पर वन विभाग की गोपनीय सूचना-आधारित कार्रवाई में तस्कर मल्हार लाला लोखंडे को प्रतिबंधित 'हत्था जोड़ी' के साथ दबोचा गया। मॉनिटर लिजार्ड के इस सुखाए हुए अंग की तांत्रिक बाज़ार में अवैध माँग वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।

मुख्य बातें

पुणे रेलवे स्टेशन परिसर में 22 जून को वन विभाग ने छापेमारी कर तस्कर मल्हार लाला लोखंडे को गिरफ्तार किया।
आरोपी के पास से प्रतिबंधित वन्यजीव उत्पाद 'हत्था जोड़ी' (मॉनिटर लिजार्ड/गोह का सुखाया हुआ गुप्तांग) बरामद हुई।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत वन अपराध दर्ज; न्यायालय ने एक दिन की फॉरेस्ट रिमांड दी।
दोषसिद्धि पर 3 से 7 वर्ष कारावास और न्यूनतम ₹25,000 जुर्माने का प्रावधान।
कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक आशीष ठाकरे , उप वन संरक्षक अभिजीत वायकोस और सहायक वन संरक्षक विशाल चव्हाण के नेतृत्व में हुई।

पुणे के रेलवे स्टेशन परिसर में 22 जून को महाराष्ट्र वन विभाग ने एक सुनियोजित जाल बिछाकर वन्यजीव तस्कर मल्हार लाला लोखंडे को रंगेहाथ दबोचा। आरोपी के पास से प्रतिबंधित वन्यजीव उत्पाद 'हत्था जोड़ी' — यानी मॉनिटर लिजार्ड (गोह) का सुखाया हुआ गुप्तांग — बरामद की गई, जिसकी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत खरीद-बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है।

मुख्य घटनाक्रम

वन विभाग को गोपनीय सूत्रों से जानकारी मिली थी कि पुणे रेलवे स्टेशन परिसर में कुछ व्यक्ति वन्यजीवों और उनके अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त के लिए एकत्र होने वाले हैं। इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुणे वन क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों की एक विशेष टीम ने स्टेशन के निकट घेराबंदी की।

टीम ने संदिग्ध अवस्था में घूम रहे मल्हार लाला लोखंडे को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 'हत्था जोड़ी' बरामद हुई, जिसे तत्काल जब्त कर लिया गया।

कानूनी कार्रवाई

आरोपी के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत वन अपराध दर्ज किया गया है। अदालत में पेश किए जाने पर न्यायालय ने लोखंडे को एक दिन की वन कस्टडी (फॉरेस्ट रिमांड) में भेज दिया। वन विभाग की टीम अब यह जाँच कर रही है कि आरोपी यह प्रतिबंधित उत्पाद कहाँ से लाया था और किसे बेचने की योजना थी।

कानून क्या कहता है

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध किसी भी वन्यजीव अथवा उसके अंगों की तस्करी पर कड़ी सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 वर्ष और अधिकतम 7 वर्ष के कारावास के साथ-साथ न्यूनतम ₹25,000 के जुर्माने का नियम है।

नेतृत्व और टीम

यह पूरी कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक (प्रादेशिक) आशीष ठाकरे, उप वन संरक्षक अभिजीत वायकोस और सहायक वन संरक्षक विशाल चव्हाण के मार्गदर्शन में संपन्न की गई। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी के विरुद्ध ऐसी सतर्क कार्रवाइयाँ आगे भी जारी रहेंगी।

आगे क्या

जाँच का मुख्य फोकस इस तस्करी नेटवर्क की जड़ तक पहुँचना है — यह पता लगाना कि 'हत्था जोड़ी' की आपूर्ति कहाँ से हो रही थी और खरीदार कौन था। गौरतलब है कि 'हत्था जोड़ी' को कुछ समुदायों में तांत्रिक महत्व दिया जाता है, जिसके कारण इसकी अवैध माँग बनी रहती है और मॉनिटर लिजार्ड की आबादी पर गंभीर खतरा मँडराता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मॉनिटर लिजार्ड जैसी संरक्षित प्रजातियों के अस्तित्व पर सीधा प्रहार है। पुणे की यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि तांत्रिक मान्यताओं से जुड़ी माँग एक सुसंगठित आपूर्ति श्रृंखला को पोषित कर रही है, जिसकी जड़ें अभी भी उजागर होनी बाकी हैं। एक दिन की फॉरेस्ट रिमांड जाँच के लिए बेहद सीमित समय है — असली परीक्षा यह है कि विभाग इस नेटवर्क के आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों तक पहुँच पाता है या नहीं। बिना नेटवर्क को तोड़े, इकलौती गिरफ्तारियाँ इस काले बाज़ार को रोकने में नाकाफी साबित होती रही हैं।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'हत्था जोड़ी' क्या है और यह प्रतिबंधित क्यों है?
'हत्था जोड़ी' मॉनिटर लिजार्ड (गोह) का सुखाया हुआ गुप्तांग है, जिसे कुछ समुदायों में तांत्रिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत मॉनिटर लिजार्ड संरक्षित है, इसलिए इसके किसी भी अंग की खरीद-बिक्री या तस्करी पूर्णतः अवैध है।
पुणे में गिरफ्तार तस्कर पर क्या कार्रवाई हुई?
आरोपी मल्हार लाला लोखंडे को 22 जून को पुणे रेलवे स्टेशन परिसर से 'हत्था जोड़ी' के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। उसके विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत वन अपराध दर्ज कर अदालत ने एक दिन की फॉरेस्ट रिमांड दी।
वन्यजीव तस्करी में दोषी पाए जाने पर क्या सजा होती है?
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत आने वाले जीवों की तस्करी पर कम से कम 3 वर्ष और अधिकतम 7 वर्ष के कारावास का प्रावधान है। इसके अलावा न्यूनतम ₹25,000 का जुर्माना भी देना होता है।
वन विभाग को इस तस्करी की जानकारी कैसे मिली?
वन विभाग को गोपनीय सूत्रों से सूचना मिली थी कि पुणे रेलवे स्टेशन परिसर में वन्यजीव अंगों की अवैध खरीद-बिक्री होने वाली है। इसी आधार पर पुणे वन क्षेत्र की विशेष टीम ने स्टेशन के पास जाल बिछाकर आरोपी को दबोचा।
इस मामले में आगे की जाँच किस दिशा में होगी?
वन विभाग की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने 'हत्था जोड़ी' कहाँ से प्राप्त की और उसे किसे बेचने की योजना थी। जाँच का उद्देश्य इस तस्करी नेटवर्क की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को उजागर करना है।
राष्ट्र प्रेस
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