डीआरआई पुणे का वन्यजीव तस्करी पर प्रहार: मालाबार गिलहरी व स्टार कछुए बरामद, 2 गिरफ्तार

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डीआरआई पुणे का वन्यजीव तस्करी पर प्रहार: मालाबार गिलहरी व स्टार कछुए बरामद, 2 गिरफ्तार

सारांश

डीआरआई की पुणे और मुंबई टीमों ने 20 मई को एक सुनियोजित अभियान में तीन मालाबार विशाल गिलहरियाँ और सात भारतीय स्टार कछुए बरामद किए — दोनों प्रजातियाँ अनुसूची-I संरक्षित। दो तस्कर गिरफ्तार, वन्यजीव पुणे वन विभाग को सौंपे गए।

मुख्य बातें

डीआरआई की मुंबई जोनल यूनिट और पुणे क्षेत्रीय इकाई ने 20 मई 2025 को पुणे रेलवे स्टेशन के पास वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
3 जीवित मालाबार विशाल गिलहरियाँ नालीदार डिब्बों में छिपी मिलीं; 7 जीवित भारतीय स्टार कछुए दूसरे स्थान से बरामद।
दोनों प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च संरक्षित हैं।
दो संदिग्ध गिरफ्तार ; बरामद वन्यजीव और पैकिंग सामग्री पुणे वन विभाग को सौंपी गई।
डीआरआई ने कहा — वन्यजीव तस्करी के विरुद्ध खुफिया-आधारित अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की मुंबई जोनल यूनिट और पुणे क्षेत्रीय इकाई ने 20 मई 2025 को पुणे रेलवे स्टेशन के निकट एक बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए इस अभियान में तीन जीवित मालाबार विशाल गिलहरियाँ और सात जीवित भारतीय स्टार कछुए बरामद किए गए तथा दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। ये दोनों प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत देश में सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त जीव हैं।

मुख्य घटनाक्रम

डीआरआई को विशेष सूचना मिली थी कि पुणे में कुछ व्यक्ति प्रतिबंधित वन्यजीवों को अवैध रूप से रखकर बेचने की फिराक में हैं। इसी के आधार पर 20 मई को निगरानी टीम ने पुणे रेलवे स्टेशन के पास एक संदिग्ध को रोका। तलाशी में दो नालीदार गत्ते के डिब्बों में छिपाई गई तीन जीवित मालाबार विशाल गिलहरियाँ मिलीं।

इसके बाद टीम ने पुणे के एक अन्य स्थान पर दूसरे संदिग्ध को दबोचा, जिसके पास से सात जीवित भारतीय स्टार कछुए बरामद हुए। दोनों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।

कानूनी स्थिति और प्रजातियों का महत्व

मालाबार विशाल गिलहरी और भारतीय स्टार कछुआ — दोनों ही वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध हैं। इस श्रेणी में आने वाली प्रजातियों का शिकार, कब्जा, परिवहन या व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है। बिना अनुमति के इनसे जुड़ी कोई भी गतिविधि गंभीर आपराधिक अपराध मानी जाती है। गौरतलब है कि भारतीय स्टार कछुआ अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार में भी अत्यधिक माँग में रहता है, जिस कारण यह तस्करों के निशाने पर होता है।

आगे की कार्रवाई

बचाए गए सभी वन्यजीवों और तस्करी में इस्तेमाल की गई पैकिंग सामग्री को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पुणे वन विभाग को सौंप दिया गया है। दोनों आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

डीआरआई का रुख

डीआरआई ने स्पष्ट किया है कि वह वन्यजीव शिकार गिरोहों और अवैध तस्करी नेटवर्क के खिलाफ खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान निरंतर जारी रखेगी। पुणे वन विभाग के साथ समन्वय करते हुए ऐसे अवैध धंधों पर नज़र रखी जा रही है। यह कार्रवाई पुणे और महाराष्ट्र में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बढ़ती सतर्कता का संकेत है। आने वाले समय में इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भी पहचान की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये तस्कर आपूर्ति श्रृंखला में कहाँ खड़े हैं — क्या ये छोटे वाहक हैं या बड़े नेटवर्क की कड़ी? गिरफ्तारियाँ तभी प्रभावी होंगी जब जाँच उन आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों तक पहुँचे जो इस अवैध व्यापार को चला रहे हैं। वन विभाग के साथ समन्वय की दिशा सही है, पर दीर्घकालिक रोकथाम के लिए वन्यजीव अपराध के डेटाबेस और अंतर-एजेंसी खुफिया साझेदारी को और मज़बूत करना ज़रूरी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई पुणे ने किन वन्यजीवों को बरामद किया?
डीआरआई ने 20 मई 2025 को पुणे में तीन जीवित मालाबार विशाल गिलहरियाँ और सात जीवित भारतीय स्टार कछुए बरामद किए। ये दोनों प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत देश में सर्वोच्च संरक्षित हैं।
मालाबार विशाल गिलहरी और भारतीय स्टार कछुआ क्यों संरक्षित हैं?
ये दोनों प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल हैं, जो भारत में वन्यजीवों को दी जाने वाली सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा है। इनका शिकार, परिवहन, कब्जा या व्यापार बिना किसी अपवाद के पूरी तरह प्रतिबंधित है।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
दोनों आरोपियों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। बरामद वन्यजीव और तस्करी में इस्तेमाल सामग्री पुणे वन विभाग को सौंप दी गई है, जो आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।
डीआरआई वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कैसे काम करती है?
डीआरआई खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी अभियान चलाती है और स्थानीय वन विभाग के साथ समन्वय करती है। इस मामले में भी विशेष सूचना के आधार पर संदिग्धों की निगरानी की गई और दो अलग-अलग स्थानों पर छापे मारे गए।
बरामद वन्यजीवों का अब क्या होगा?
बचाई गई तीन मालाबार विशाल गिलहरियाँ और सात भारतीय स्टार कछुए पुणे वन विभाग की देखरेख में हैं। वन विभाग इन्हें उचित पुनर्वास या संरक्षण केंद्र में भेजने की प्रक्रिया करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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