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क्या झारखंड के साहिबगंज में ट्रेन की सुरक्षा तलाशी में एक हजार से ज्यादा प्रतिबंधित कछुए जब्त हुए?

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क्या झारखंड के साहिबगंज में ट्रेन की सुरक्षा तलाशी में एक हजार से ज्यादा प्रतिबंधित कछुए जब्त हुए?

सारांश

साहिबगंज में आरपीएफ ने एक ट्रेन की तलाशी के दौरान एक हजार से अधिक प्रतिबंधित कछुए पकड़े, जिसमें तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया। यह एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है जो तस्करी के खिलाफ चल रही लड़ाई को उजागर करती है।

मुख्य बातें

आरपीएफ ने एक हजार से अधिक प्रतिबंधित कछुए जब्त किए।
यह कार्रवाई बरहड़वा रेलवे स्टेशन पर की गई।
तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
कछुओं को बंगाल ले जाने की योजना थी।
वन विभाग कछुओं को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की प्रक्रिया में है।

साहिबगंज, 19 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के साहिबगंज जिले में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक ट्रेन की तलाशी के दौरान एक हजार से अधिक प्रतिबंधित कछुओं को बरामद किया है। इस कार्रवाई में दो महिलाएं और एक पुरुष गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि कुछ तस्कर मौके से भागने में सफल रहे।

आरपीएफ के अनुसार, यह कार्रवाई बरहड़वा रेलवे स्टेशन पर नियमित चेकिंग अभियान के दौरान की गई। डाउन फरक्का एक्सप्रेस (15744) के स्टेशन पर पहुंचने के बाद उसके डिब्बों की तलाशी ली जा रही थी। इसी दौरान 22 बैगों में भरकर ले जाए जा रहे अलग-अलग आकार के एक हजार से अधिक कछुए बरामद किए गए। जांच में दो महिलाएं और एक पुरुष हिरासत में लिए गए, जो कछुओं की तस्करी में शामिल पाए गए।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के निवासी करण पाथकर (25), मंजू पाथकर (30), और उषा पाथकर के रूप में की गई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कछुओं को वाराणसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में लोड किया गया था और इन्हें बंगाल के फरक्का ले जाया जा रहा था।

आरपीएफ इस बात की भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में कछुए कहां से लाए गए और इसके पीछे कौन सा संगठित तस्कर गिरोह सक्रिय है।

आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि वाराणसी में एक बड़े तस्कर ने इन तीनों को कछुए फरक्का पहुंचाने के लिए सौंपे थे। आरपीएफ ने मामले की सूचना वन विभाग को भी दे दी है।

वन विभाग के अधिकारी कछुओं की गिनती और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की प्रक्रिया में जुट गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी कछुओं को सुरक्षित रूप से गंगा नदी में छोड़ा जाएगा। फरक्का एक्सप्रेस कोहरे और अन्य कारणों से निर्धारित समय से काफी विलंब से बरहड़वा स्टेशन पहुंची थी। ट्रेन की देरी के दौरान आरपीएफ ने सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ी सफलता हाथ लगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह घटना न केवल तस्करी के खिलाफ सुरक्षा बलों की सक्रियता को दर्शाती है बल्कि यह भी सिखाती है कि हमारे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कितना महत्वपूर्ण है। हमें अपने वातावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कछुए तस्करी का शिकार होते हैं?
हाँ, कई बार कछुओं की तस्करी की जाती है, जो अवैध रूप से बेचे जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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