उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन परिपक्व पत्रकारिता के लिए चुनौतियों और उपलब्धियों पर बोले

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन परिपक्व पत्रकारिता के लिए चुनौतियों और उपलब्धियों पर बोले

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आईआईएमसी के दीक्षांत समारोह में पत्रकारिता के मूल्यों और डिजिटल युग की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को सच्चाई के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया।

Key Takeaways

  • पत्रकारिता के मूल मूल्य - सटीकता, निष्पक्षता, और जवाबदेही
  • सत्यता और ईमानदारी को प्राथमिकता देना
  • डिजिटल युग में गलत सूचना से निपटना
  • रचनात्मकता का सकारात्मक उपयोग
  • सकारात्मक खबरों को प्रमुखता देना

नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के 57वें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए स्नातक छात्रों को दिल से बधाई दी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईआईएमसी की स्थापना लगभग छह दशकों पहले की गई थी और तब से इसने पत्रकारों और संचार पेशेवरों की कई पीढ़ियों को तैयार किया है जिन्होंने भारत के लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उपराष्ट्रपति ने जनवरी 2024 में आईआईएमसी के डीम्ड यूनिवर्सिटी में परिवर्तित होने का उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आईआईएमसी अपनी धरोहर को बनाए रखेगा। उन्होंने मीडिया नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए परिसर में स्थापित किए गए इनक्यूबेशन केंद्रों की भी सराहना की।

मीडिया में आए परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा विश्लेषण, आकर्षक कहानी कहने की कला और सोशल प्लेटफार्मों ने स्टोरीज के निर्माण और उपभोग के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने एवीजीसी क्षेत्र, एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स तथा व्यापक रचनाकार अर्थव्यवस्था के महत्व पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने विश्व स्तरीय प्रतिभा और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय एवीजीसी-एक्सआर मिशन और उत्कृष्टता केंद्र जैसी पहलें शुरू की हैं।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संसद टीवी के साथ इंटर्नशिप और परियोजनाओं के अवसरों की खोज के लिए भी आमंत्रित किया। कलम की शक्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राय बनाने वाले लोग सत्य पर आधारित सही और सकारात्मक राय बनाकर राष्ट्र का मार्गदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने स्नातक छात्रों से कहा, "निडर होकर सत्य लिखें और आप एक विकसित भारत बनाएंगे।"

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से आग्रह किया कि वे रेटिंग या शॉर्टकट के पीछे न भागें, बल्कि अपने लेखन की सत्यता और ईमानदारी को प्राथमिकता दें। दिग्गज पत्रकार एएन शिवरामन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से जागरूक और सूचनात्मक पत्रकारिता नए नेताओं को गढ़ सकती है।

डिजिटल युग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के रास्ते तो बढ़ा दिए हैं, लेकिन साथ ही गलत सूचना और ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा दिया है, जो समाज के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि शब्दों के परिणाम होते हैं, चित्र धारणाओं को आकार देते हैं और कहानियां विचारों को प्रभावित करती हैं।

उपराष्ट्रपति ने पत्रकारों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले माध्यम बनने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों के दौरान उनके लेखन से सशस्त्र बलों का मनोबल बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार और वैश्विक प्रभाव में वृद्धि को देखते हुए, संचारक विभाजनों को पाटने और जागरूक नागरिकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने मीडिया संस्थानों से आर्थिक विकास, नवाचार और राष्ट्रीय प्रगति की सकारात्मक खबरों को प्रमुखता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतुलित पत्रकारिता में चुनौतियों के साथ-साथ उपलब्धियों को भी उजागर किया जाना चाहिए। विज्ञापन और जनसंपर्क के छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि रचनात्मकता को ईमानदारी और उद्देश्य के साथ परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने अपने समापन भाषण में कहा कि प्रौद्योगिकी और मंचों का निरंतर विकास होता रहेगा, लेकिन पत्रकारिता के मूल मूल्य - सटीकता, निष्पक्षता और जवाबदेही - अटल रहने चाहिए। उन्होंने स्नातक छात्रों से सत्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहने का आग्रह करते हुए कहा, "सत्य को अपने हृदय में बसा लो, फिर कोई तुम्हें हरा नहीं सकता।"

Point of View

NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को क्या सलाह दी?
उपराष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि वे निडर होकर सत्य लिखें और अपने लेखन की सत्यता और ईमानदारी को प्राथमिकता दें।
आईआईएमसी की स्थापना कब हुई थी?
आईआईएमसी की स्थापना लगभग छह दशक पहले की गई थी।
डिजिटल युग की चुनौतियों के बारे में उपराष्ट्रपति ने क्या कहा?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के रास्ते बढ़ाए हैं, लेकिन गलत सूचना और ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा दिया है।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को किस प्रकार के अवसरों की खोज के लिए आमंत्रित किया?
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संसद टीवी के साथ इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट के अवसरों की खोज के लिए आमंत्रित किया।
संतुलित पत्रकारिता का क्या महत्व है?
संतुलित पत्रकारिता में चुनौतियों के साथ-साथ उपलब्धियों को भी उजागर किया जाना चाहिए।
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