<b>उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन:</b> आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधुनिक शिक्षा का साथी है
सारांश
Key Takeaways
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शिक्षा में सकारात्मक प्रभाव है।
- इग्नू ने उच्च शिक्षा को सुलभ बनाया है।
- जिम्मेदार तकनीक उपयोग की आवश्यकता है।
- समाजिक गतिशीलता में इग्नू का योगदान महत्वपूर्ण है।
- डिजिलॉकर और पूर्व छात्र पोर्टल का शुभारंभ किया गया है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या आधुनिक तकनीकी विकास से भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं है। जब देश में कंप्यूटर का आगमन हुआ था, तब कई चिंताएं थीं कि ये नौकरियों पर असर डालेंगे। परंतु, कंप्यूटर के आगमन ने अंततः नए रोजगार के अवसर उत्पन्न किए और राष्ट्रीय विकास में सकारात्मक योगदान दिया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने यह बात मंगलवार को छात्रों के समक्ष कही।
उपराष्ट्रपति मंगलवार को नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने देशभर के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों में स्वयं प्रभा स्टूडियो का उद्घाटन भी किया। त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपने-अपने राज्यों के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों से इस समारोह में आभासी रूप से भाग लिया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक उपकरण शिक्षण अनुभवों को बेहतर बना सकते हैं, छात्रों को अधिक सहायता प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षा को सशक्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन तकनीकों का जिम्मेदार और जवाबदेह उपयोग आवश्यक है।
उन्होंने भारत की सबसे बड़ी ताकत हमारे नैतिक मूल्यों में बताई और आधुनिक विकास के साथ अपनी परंपराओं को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस समारोह में 3.2 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए। उपराष्ट्रपति ने इग्नू को देश की दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया, जिसने पूरे देश में उच्च शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाया है।
उन्होंने बताया कि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण तथा वंचित समुदायों से आते हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि इग्नू के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह शैक्षिक समानता, सामाजिक गतिशीलता और राष्ट्रीय विकास में इग्नू के योगदान को प्रदर्शित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इग्नू ने निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘स्वयं’ और ‘ई-ज्ञानकोष’ जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।
उपराष्ट्रपति ने इग्नू द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित हो गई है। उन्होंने सामूहिक जिम्मेदारी की बात की और कहा कि व्यक्तिगत प्रयासों को एक साथ लाकर 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में मदद मिलेगी।
उपराष्ट्रपति ने देशभर के छात्रों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए डिजिलॉकर पर प्रमाण पत्र जारी किए और इग्नू पूर्व छात्र पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं।