बटुकेश्वर दत्त पुण्यतिथि: ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह और नितिन गडकरी ने अर्पित की श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर 20 जुलाई को देशभर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें नमन किया। यह दिन उस क्रांतिवीर की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद को चुनौती दी थी।
नेताओं की श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा, 'भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले अमर क्रांतिकारी और महान देशभक्त बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, 'महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। सच्चे राष्ट्रवादी और साहसी व्यक्तित्व वाले बटुकेश्वर दत्त ने अन्याय और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर, हम इस महान राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।'
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'महान स्वाधीनता सेनानी और अमर क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। बटुकेश्वर दत्त ने भगत सिंह के साथ केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर अंग्रेजों के अन्याय के विरुद्ध पूरे देश में आजादी की अलख जलाई। उन्होंने कालापानी की कठोर यातनाएं सहकर भी स्वाधीनता के संकल्प को अडिग रखा और कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए अंग्रेजी दमन के विरुद्ध सशक्त आवाज बुलंद की।'
अन्य मंत्रियों का नमन
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, 'महान राष्ट्रभक्त क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र अभिवादन।' केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'मां भारती के अनन्य सेवक, महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन करता हूं। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आपका अप्रतिम संघर्ष व योगदान सदैव भावी पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार करता रहेगा।'
बटुकेश्वर दत्त का ऐतिहासिक योगदान
बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह के साथ मिलकर केंद्रीय विधानसभा (वर्तमान संसद भवन) में बम फेंका था — यह विस्फोट किसी की जान लेने के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटिश सरकार को 'बहरों को सुनाने' के लिए किया गया था। इस कृत्य के लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली और उन्हें काला पानी (अंडमान की सेलुलर जेल) भेजा गया, जहाँ उन्होंने अमानवीय यातनाएँ सहीं। गौरतलब है कि आज़ादी के बाद भी उनके जीवन के अंतिम वर्ष अत्यंत कठिनाई में बीते, जो स्वतंत्र भारत में क्रांतिकारियों के पुनर्वास की विफलता को रेखांकित करता है।
आम जनता पर असर और प्रेरणा
बटुकेश्वर दत्त का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को ठुकराकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें स्मरण किया जाना इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने नायकों को राष्ट्रीय स्मृति में उचित स्थान मिलना चाहिए। आने वाली पीढ़ियाँ उनके साहस और बलिदान से प्रेरणा लेती रहेंगी।