21 जुलाई 2026
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बटुकेश्वर दत्त पुण्यतिथि: ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह और नितिन गडकरी ने अर्पित की श्रद्धांजलि

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बटुकेश्वर दत्त पुण्यतिथि: ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह और नितिन गडकरी ने अर्पित की श्रद्धांजलि

सारांश

20 जुलाई को बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने एक्स पर श्रद्धासुमन अर्पित किए — उस क्रांतिवीर को, जिन्होंने 1929 में भगत सिंह के साथ केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर ब्रिटिश दमन को चुनौती दी थी।

मुख्य बातें

20 जुलाई को महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला , रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , गृह मंत्री अमित शाह , नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर नमन किया।
बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह के साथ केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी।
उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली और काला पानी (अंडमान की सेलुलर जेल) भेजा गया, जहाँ उन्होंने कठोर यातनाएँ सहीं।
अमित शाह ने अपनी पोस्ट में कहा कि उनका साहस, त्याग और बलिदान सदैव युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर 20 जुलाई को देशभर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें नमन किया। यह दिन उस क्रांतिवीर की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद को चुनौती दी थी।

नेताओं की श्रद्धांजलि

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा, 'भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले अमर क्रांतिकारी और महान देशभक्त बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, 'महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। सच्चे राष्ट्रवादी और साहसी व्यक्तित्व वाले बटुकेश्वर दत्त ने अन्याय और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर, हम इस महान राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।'

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'महान स्वाधीनता सेनानी और अमर क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। बटुकेश्वर दत्त ने भगत सिंह के साथ केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर अंग्रेजों के अन्याय के विरुद्ध पूरे देश में आजादी की अलख जलाई। उन्होंने कालापानी की कठोर यातनाएं सहकर भी स्वाधीनता के संकल्प को अडिग रखा और कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए अंग्रेजी दमन के विरुद्ध सशक्त आवाज बुलंद की।'

अन्य मंत्रियों का नमन

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, 'महान राष्ट्रभक्त क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र अभिवादन।' केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'मां भारती के अनन्य सेवक, महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन करता हूं। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आपका अप्रतिम संघर्ष व योगदान सदैव भावी पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार करता रहेगा।'

बटुकेश्वर दत्त का ऐतिहासिक योगदान

बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह के साथ मिलकर केंद्रीय विधानसभा (वर्तमान संसद भवन) में बम फेंका था — यह विस्फोट किसी की जान लेने के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटिश सरकार को 'बहरों को सुनाने' के लिए किया गया था। इस कृत्य के लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली और उन्हें काला पानी (अंडमान की सेलुलर जेल) भेजा गया, जहाँ उन्होंने अमानवीय यातनाएँ सहीं। गौरतलब है कि आज़ादी के बाद भी उनके जीवन के अंतिम वर्ष अत्यंत कठिनाई में बीते, जो स्वतंत्र भारत में क्रांतिकारियों के पुनर्वास की विफलता को रेखांकित करता है।

आम जनता पर असर और प्रेरणा

बटुकेश्वर दत्त का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को ठुकराकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें स्मरण किया जाना इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने नायकों को राष्ट्रीय स्मृति में उचित स्थान मिलना चाहिए। आने वाली पीढ़ियाँ उनके साहस और बलिदान से प्रेरणा लेती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि जिन क्रांतिकारियों ने आज़ादी के बाद गुमनामी और गरीबी में जीवन बिताया, उनके लिए ठोस स्मारक, शोध पीठ या पाठ्यक्रम में स्थान जैसे दीर्घकालिक कदम कब उठाए जाएँगे। सोशल मीडिया पोस्ट से परे, बटुकेश्वर दत्त जैसे 'भूले-बिसरे' स्वतंत्रता सेनानियों को राष्ट्रीय पाठ्यपुस्तकों और सार्वजनिक स्मृति में वह स्थान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं। यह केवल श्रद्धांजलि का नहीं, बल्कि संस्थागत स्मरण का प्रश्न है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बटुकेश्वर दत्त कौन थे और उनका स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान था?
बटुकेश्वर दत्त भारत के महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह के साथ केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी थी। इस कार्य के लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई और काला पानी (अंडमान की सेलुलर जेल) भेजा गया।
बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि कब होती है?
बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि प्रतिवर्ष 20 जुलाई को मनाई जाती है। इस दिन देशभर में नेता और आम नागरिक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
20 जुलाई 2025 को किन नेताओं ने बटुकेश्वर दत्त को श्रद्धांजलि दी?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट कर बटुकेश्वर दत्त को नमन किया। सभी नेताओं ने उनके साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद किया।
केंद्रीय विधानसभा बम कांड 1929 क्या था?
8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह ने तत्कालीन केंद्रीय विधानसभा (वर्तमान संसद भवन, नई दिल्ली) में बम फेंके थे। यह विस्फोट जानबूझकर किसी को हानि पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटिश सरकार को भारतीयों की माँगों के प्रति 'बहरेपन' का जवाब देने के लिए किया गया था।
बटुकेश्वर दत्त को काला पानी की सजा क्यों हुई?
केंद्रीय विधानसभा बम कांड में संलिप्तता के कारण ब्रिटिश सरकार ने बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उन्हें अंडमान की सेलुलर जेल (काला पानी) भेजा गया। वहाँ उन्होंने अमानवीय परिस्थितियों में रहते हुए कैदियों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया।
राष्ट्र प्रेस
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